#mahanayk or samaj

                           महानायक और समाज (कबाली )

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      मेने आधुनिक समय में महानायक की कल्पना नही की थी मुझे हमेशा लगता था। पुराने समय के अनपढ़ और गवाँर लोग किसी  इंसान की पूजा करते थे लेकिन अब लोग ऐसा नही कर सकते। बहुत समय से एक इंसान के पीछे चलने वाले अनुयायी देखने को नही मिले। लेकिन रजनीकांत(कबाली ) को लेकर पैदा हुआ जूनून देख कर हैरान हूँ। 
       एक कलाकार की फिल्म देखने  के लिए लोग अपनी जमीन ,गहने और मकान तक बेचने के लिए तैयार हो रहे है। उन्हें अपने भविष्य से मतलब नही केवल एक फिल्म उन्हें किस तरह से झकझोर सकती है।ऐसा जनून इससे पहले नही देखा।   मेने त्यौहारो के दिन बड़े कलाकारों को फिल्म पर्दे पर आते देखि थी। किसी छुट्टी वाले दिन बड़ी फिल्मे सिनेमा हॉल में लगती देखि थी लेकिन फिल्म के रिलीज के समय किसी राज्य में छुट्टी होते पहली बार देखा  है। 
        आम तौर पर रजनी कान्त सुंदरता के हिसाब से बहुत सुंदर नही कहला सकते। उनकी फिल्मे दक्षिण के अलावा दूसरे राज्यो के लोगो को बहुत पसंद  नही आती होंगी। उनकी कहानी आम कहानियो के सामान ही लगती है। लेकिन उनके प्रसंशक उनके संवादों के दीवाने है। उनके हर हाव -भाव उनके अंदर नया जोश भर देते  है।
      बीस साल पहले जब मेने उनकी फिल्म देखी तो मुझे उनमे कुछ असाधारण नही लगा था। लोगो का जूनून देख कर अब उनकी हिंदी डब की गयी फिल्मे देखनी अच्छी लगने लगी। ये करिश्मा उनकी फिल्मो से अधिक उनके व्यवहार का है। 
       वे समाज के कामो में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते है। उनके द्वार पर जो आ जाता है। वो उसकी अवश्य मदद करते है। अनजाने लोगो की बिना बताये उन्होंने मदद की है। दक्षिण भारत में उन्हें भगवान का अवतार माना जाता है। उनकी फोटो की पूजा की जाती है। उसे दूध से नहलाया जाता है। उनके 50000 हजार फेन क्लब बने हुए है। उनकी फिल्म रिलीज के समय ,अराजकता से बचाने के लिए उनके फेन क्लब के सदस्य सक्रिय होकर हिंसात्मक कार्यवाही होने से रोकते है। आप सोच के देखिये जिसके इतने सारे फेन क्लब है। उसमे उनके कितने फेन हो सकते है। उनके दक्षिण में मंदिर बनवाये गए है। 
      अधिकतर सिनेमा घरो में 10 बजे से फिल्मे शुरू होती है। लेकिन उनकी फिल्म के समय 5 बजे का शो शुरू किया जाता है। इतनी सुबह आम इंसान उठना पसंद नही करते लेकिन ये रजनीकांत की फिल्मो का कमाल है। उनकी एक फिल्म की टिकट 14000 रु तक ब्लेक में बिकी है। टिकट काउंटर पर टिकट बिक्री  शुरू होने से पहले ही ऑनलाइन सारी टिकट बिक गयी। 
         दक्षिण में कमाल हसन  30 करोड़ रूपये एक फिल्म के लेते है.रजनीकांत की एक फिल्म की फ़ीस 60 करोड़ रूपये होती है। वे अपनी कमाई का आधा हिस्सा समाज की भलाई में खर्च देते है। देखा जाये तो वे अपनी कमाई अपने परिवार और अपने ऊपर कम खर्चते है लेकिन उनकी आधी कमाई ही उन्हें महामानव बनाती है। 
       इतने बड़े स्टार होने के बाबजूद वे जमीन से जुड़े हुए इंसान है। वे आम जीवन में साधारण इंसान के समान रहते है। उनका मेकअप केवल फिल्मो तक सीमित है। समाज में वे अपने असली रूप में होते है बिना मेकअप के 65  साल के गंजे और बुड्ढे व्यक्ति के रूप में दिखाई देने में उन्हें कोई झिझक नही होती है। 
       उनके आलावा फिल्म लाइन से जुड़े लोगो की जिंदगी विवादास्पद होती है। लेकिन ये बिलकुल साधारण भारतीय इंसान के सामान जीवन जी रहे है। इनके साथ कभी कोई विवाद सुनाई नही दिया। 
        इन्होंने जीवन का आरम्भ बहुत छोटे काम से शुरू किया। इन्होंने कंडक्टर की नोकरी के साथ कभी -कभार अभिनय करने को बहुत  सुखद समझा था। उनके अंदर बड़ी आकांक्षा नही थी। 
     पिता के कहने पर पहली जमीं 24 लाख रूपये की खरीदी। जिसका कर्ज चुकाने में उनकी 20 फिल्मो की आय लग गयी। वहाँ उन्होंने बड़ा होटल बनवाया जो हमेशा खचाखच भरा रहता है। उस होटल को रजनीकांत की तस्वीरों और उनकी पसंद की चीजो से सजाया गया है। 
      वे अपनी फिल्मो के रिलीज को लेकर फिक्रमंद नही होते। उनके लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित नही करते। बल्कि फिल्म खत्म होने के बाद विदेश  चले जाते है । उन्हें भारत में रहना जरूरी नही लगता। वे जिस देश में रहते है। उस जगह उनके लिए विशेष शो आयोजित  किया जाता है। भारत के   आलावा  एक ही दिन उनकी फिल्म संसार के बहुत सारे देशो में रिलीज की गयी। उनके शो को देखने के लिए लोग राज्य ही नही देश तक बदलने के लिए तैयार हो जाते है।पहले दिन और पहला शो देखने के लिए जपानी प्रशंसक भारत आया।  उनके प्रसंशक संसार के सभी देशो में फैले हुए है।   
       रजनीकांत समाज उद्धारक होने के साथ किस्मत के धनी है। उनके इतने बड़े सफर में उनके हमदर्द ज्यादा और दुश्मन बहुत कम है। 

#bhikhariyo ki samsya

                              भिखारियों की समस्या 

   
  पहले समय में भिखारी धार्मिक आस्था से जुड़े हुए थे। उनके  भरण -पोषण से लोगो को लगता था वे दान -पुण्य करके उनका भला कर रहे है। उनके माध्यम से उनका परलोक सुधर रहा है। उनकी आस्था को भिखारियों ने अपना अधिकार समझ लिया था जिसके कारण मंदिरों में जाने से लोगो को डर सताने लगा था। वे एक भिखारी को कुछ देते तो भिखारियों का झुण्ड उन्हें  देने के लिए विवश कर देता था। भिखारियों से पिंड छुड़ाना मुश्किल हो जाता था। ये समस्या इतनी भयंकर हो गई कि सरकार को इनसे निबटने के लिए सामने आना पड़ा। 
       अब सरकार की सख्ती के कारण भिखारी मंदिर के बाहर दिखाई नहीं देते उन्होंने दूसरे ठिकाने ढूंढ लिए है। अब ये ट्रैफिक सिगनल पर नए तरिके अपना कर भीख मांगते दिखाई देते है। ये सिग्नल उनकी कमाई के अड्डे बन गए है। कारों की खिड़कियाँ बंद करके बैठे लोग उनसे बच जाते है लेकिन खुली खिड़की वाले या दोपहिया गाड़ी वाले उनके कारण परेशान होते रहते है। 
     बस के अंदर या रेलगाड़ी में सफर करने वालो को भीख मांगने वाले हिजड़े बहुत परेशान करते है। उनके कद -काठी, हाब -भाव ,बोलने का तरीका उनके सामने मुँह खोलने नहीं देता। यदि हम जैसे हिम्म्त करके मना कर दे तो उनके कहे हुए गंदे शब्द सामने वाले को झकझोर देते है। ऐसे ही एक हिजड़े को मेने पैसे देने से मना कर दिया। तो वह बोला "-पैसे नहीं है तो ये पर्स क्यों ले रखा है। चल मेरे साथ पैसो के ढेर लग जायेंगे। "
     उसके शब्द सुनकर मॅ शर्मिंदा हो गई। मुझे लगा भिखारी वह नहीं बल्कि मै हुँ।आम भिखारियों को मना करते लोगो को देखा है। लेकिन हिजड़ो की तालियाँ बजाकर माँगने पर कोई उन्हें देने से नानुकुर नहीं करता। 
     भिखारी हर उस जगह मिल जायेंगे जहाँ लोग बहुत अधिक संख्या में जाते है। इसका उदाहरण मेट्रो स्टेशन बन गए है। अधिकतर मेट्रो स्टेशनों पर भिखारियों का जमाबड़ा दिखाई दे जाता है। ये स्थान ऐसे होते है जहाँ अधिकतर  इंसान को जाना पड़ता है। 
     भिखारियों को  देखकर भारत की गरीबी याद आ जाती है। बाहर से आने वालो पर गलत प्रभाव पड़ता है। इन भिखारियों के पास अच्छे कपड़े होते है लेकिन अच्छे रख-रखाव के कारण भीख नहीं मिलेगी इस लिए फटे -पुराने कपड़ो में,बिना नहाए ,गंदे बिखरे वालो में  रह कर अपने प्रति लोगो के मन में दया की भावना पैदा करके कमाने में लगे रहते है। पिछली सरकार की सख्ती के कारण भिखारी काफी समय तक दिखाई नहीं दिए लेकिन फिर से बहुत अधिक संख्या में दिखाई दे रहे है। 
        ये भिखारी आलसी होते है। बूढ़े -अपाहिज लोगो को देखकर दया उपजती है लेकिन जवान लोगो को देखकर गुस्सा आता है। अपनी मेहनत की कमाई इन्हे देने का मन नहीं करता 
       कुछ समय पहले अख़बार में खबर पढ़कर हैरान रह गई। कुछ  घरों के लोग दुबई जैसे देशो में 3 महीनो के लिए  जाते है। वहाँ वे भीख माँग कर इतना अधिक कमा लेते हे कि भारत में शानोशौकत की जिंदगी गुजरते है।  उन्हें इतने कम समय में इतनी अधिक भीख मिल जाती है कि उनका एक साल का खर्च निकल जाता है। उनके रोजगार के बारे में लोगो को सही जानकारी नहीं होती साधारण लोगो को उनका ठाठ -बाट से रहना दिखाई देता है। 
      भिखारियों के भीख माँगने के ठिकानो की नीलामी होती है। एक भिखारी अपनी जगह पर दूसरे भिखारियों को बैठने नहीं देता। उनके बीच का झगड़ा हैरान कर देता है। 
      एक दिन मेंने  सुबह शाहदरा मेट्रो स्टेशन पर एक जवां आदमी को अपने पिता को बिठाते हुए देखा वह अपने पिता से कह रहा था -" पिताजी आप यहाँ बैठ जाओ। ये तुम्हारा खाना और पानी रखा है। "इसे देखकर मुझे अपने बच्चों की परवरिश पर गुस्सा आया। जिन बच्चों को पालने के लिए अभिभावक दिन -रात मेहनत करते है। उन्ही के बच्चे बुढ़ापे में उन्हें  भिखारी बना देते है। 
     कई भिखारी आम लोगो से बहुत ज्यादा अमीर होते है । उनकी अमीरी के बारे में सुनकर आँखे खुली रह जाती है। 
    भारत में बहुत ज्यादा संख्या में बच्चे उठाये जाते है। जिन्हे बाद में गलत कार्यो में लगा दिया जाता है। ट्रैफिक सिगनलों पर सामान बेचते बच्चे अधिकतर अपहृत होते है। गरीब घरों के बच्चे न के बराबर होते है। यदि इन पर पाबंदी नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में हर तरफ भिखारी दिखाई देने लगेंगे।  

#bangladesh ki ghatna

                                             बांग्ला देश  की घटना

     
बांग्ला देश मुस्लिम देश होने के बाबजूद शांतिप्रिय देश रहा था। लेकिन कुछ समय से वहाँ कटटरता पैर ज़माने लगी है।अब  अन्य देशो के सामान यहाँ कटटरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। हिन्दुओ पर होने वाले आक्रमण,ब्लॉगर की हत्या इसके प्रमाण है। हाल की घटना को अंजाम देने वाले गरीव या अनपढ़ लोग नहीं थे बल्कि सभ्य और पढ़े लिखे परिवारों से सम्बद्ध थे। इसमें एक राजनेता का बेटा भी था। उनके अंदर नफरत के बीज कहाँ  से पनपे इसका कारण समझ में नहीं आ रहा। 
      मुस्लिम कटटरपंथी जिस तरह अलगाव पैदा कर रहे है। उससे एक समय बाद हर मुस्लिम शक की निगाह का सामना कर रहा होगा। प्रत्येक देश में लोग मुस्लिम से भय खाने लगे है। अपने देश को मुस्लिम बहुल होने पर, अन्य देशो के लोगो  को सहन नहीं करने के कारण उन्हें मार देने से उनकी समस्या का हल नहीं निकल पाएगा।सभी देश वसुधैव कुटुंबकम की भावना से जुड़ कर तरक्की पा सकते  है।
      बांग्ला देश में जापानी और अन्य देशो के लोगो को जान  से मार  देने से क्या  वहाँ के व्यवसायी उनके देश में आकर व्यापार करने की  हिम्म्त जुटा पाएंगे। इंसान पहले अपनी जान -माल की सलामती के दम पर दूसरे देश में उद्योग लगाने का फैसला करता है। बांग्ला देश एक गरीब देश है। उसे दूसरे देश की सहायता से तरक्की करने के अवसर मिल रहे थे। ये हमला सबसे अच्छे इलाके में हुआ था। जब सम्भ्रान्त वर्ग सुरक्षित नहीं रहा तो अन्य लोग अपनी सुरक्षा के बारे में क्या सोचते होंगे। 
        धर्म से  मानसिक शांति मिलती है।जबकि मुस्लिम धर्म को मानने वाले सबसे अशांत दिखाई दे रहे है। वे अपने धर्म को बचाने के लिए जिहाद छेड़े हुए है। इसके कारण कितने लोग मर रहे है उसकी गिनती करना भूल गए है। इस जिहाद के कारण हर मुस्लिम महिला को कम से कम 10  बच्चे पैदा करने जरूरी है। उस माँ की बेबसी देखो जो अपने बच्चे को मरने के लिए ,धर्म के नाम पर शहीद होने के लिए जन्म देती है। 
      आज के समय में धर्म खाने के लिए रोटी मुहैया नहीं करवा पा रहा है। सभी कटटर  देशो ने  पहले दूसरे धर्म के लोगो से नफरत करने के कारण ,उन्हें देश से निकलने पर मजबूर किया। अब जिन देशो में केवल मुस्लिम बर्ग रह गया है। उसे भी अनेक भागो में बाँट दिया अब  उनके साथ ही लड़ रहे है। इन्ही में से निकले  उइगर, कुर्द ,रोहिंगिया, अहमदिया ,शिया ,सुन्नी ,मुहाजिर ,ब्लोच और  यजीदी है। ये अनेक वर्गों में बाँट कर उनका संहार कर रहे है।
       जब लोग अपने देश की सीमाओं में सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते तभी वे अन्य देशो में शरण पाने के लिए अपना सब कुछ छोड़ कर निकलते है। मुस्लिम लोगो से सभी इस कदर खौफ खा रहे है कि कोई देश उन्हें शरण देने के लिए तैयार नहीं है। जितने लोग किसी देश में शरण ले रहे है उससे कई गुना ज्यादा भूख -प्यास से तड़प -तड़प कर मर रहे है।  इंसानो पर राज किया जाता है। मुर्दो पर शासन नहीं किया जाता। वीराने किसी को शासन करने के लिए नहीं उकसाते। 
      इन आतंकियों ने कुरान की आयते सुन कर लोगो की जान बक्श दी। उन्हें खाने की सुविधाएं भी दी।  इस देश में अधिकतर विदेशियों के हाथो में  उद्योग है। उनके द्वारा अधिकतर लोगो को रोजगार मिला हुआ है। जब ये देश में नहीं रहेंगे तब उनके सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो जाएगी। 
          अमरीका और रूस की अफगानिस्तान को लेकर टकराहट ने पाकिस्तान को आतंकवाद की फसल पैदा करने वाला देश बना दिया। रूस ने अफगानिस्तान से पैर समेट लिए लेकिन पाकिस्तान को आतंकवाद पैदा करने का ऐसा चस्का लग गया कि  जहाँ आतंकवाद दिखाई देता है वहाँ उसके तार पाकिस्तान से किसी न किसी रूप से अवश्य जुड़े दिखाई दे जाते है। आज भी अमरीका आतंक वाद को अच्छे और बुरे में बाँट रहा है। यदि हम आतंकवाद को इन श्रेणियों से अलग करके देखे तभी इस समस्या का हल निकल सकेगा।
      पहले समय में रमजान के पाक महीने में हिंसा की घटनाएं नहीं होती थी। लेकिन अब कोई सीमा नहीं रही है।इस महीने में मुस्लिम ही मुस्लिम को मार रहे है।  यदि  आतंकवाद से मिलकर लड़ेंगे तभी इससे मुक्ति मिल सकेगी। ये समस्या अब पूरे संसार में फैल चुकी है। कोई भी देश इससे बचा नहीं है। ऐसे देशो को आर्थिक मदद देनी बंद कर देनी चाहिए। 
     पाकिस्तान भी अब इस समस्या से सुलग रहा है। उसे पूरी ताकत से इससे सुलटने की कोशिश करनी चाहिए। जाकिर नाइक जैसे लोगो पर पाबंदी लगानी चाहिए जो लोगो में नफरत की आग फैला रहे है।  

#yog

                                   योग और मानव 

     
 हिन्दू   धर्म के साथ योग जुड़ा हुआ है लेकिन योग किसी एक धर्म के उपयोग के लिए नहीं  है। यह एक विज्ञानं है जो मानव  तन और और मन को  निरोग रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका धर्म विशेष से जोड़कर देखना अहितकर है। यह शारीरिक ,मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मानव को सबल बनाता है। मानव जब शरीर से निरोग होगा तब पूरी सामर्थ्य अनुसार काम करके सफलता हासिल कर पाएगा। 
        इसके माध्यम से कम समय और पैसे के द्वारा इंसान सदैब स्वस्थ बना रह सकता है।एलोपेथिक इलाज यदि हमारी एक बीमारी को ठीक करती  है तो कही दूसरे अंग पर उसका ख़राब असर हो रहा होता है। उनके सेवन करने से इंसान दवाइयों का गुलाम बन जाता है। उसका ध्यान हमेशा दवाइयों  और बीमारियों पर लगा रहता है।वह  दुनिया से निराश रहता है। 
       भौतिक समृद्धि के कारण साधनों के भंडार पर बैठकर भी मानव शांति महसूस नहीं कर रहा है। उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही है। उसे अधूरेपन का अहसास हर समय बना रहता है। यह अधूरेपन का अहसास उसे मानसिक रोगी बना देता है। योगासन के द्वारा मानसिक शांति हमें दुनिया से जोड़कर सामाजिक उत्थान में सहायक होती है। शहरी सभ्यता में शारीरिक और मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है  योगासन के कई रूप से हम मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त करते है  .शवासन ,सुदर्शन क्रिया और सांसो  पर ध्यान केंद्रित करने से हमारी एकाग्रता बढ़ती है। जिससे मन शांत होकर किसी  कार्य में निपुणता हासिल करता है। मानव मे आत्मविश्वास का समावेश हो जाता है। हममें अध्यात्म से जुड़ने की सामर्थ्य बढ़ जाती है। इंसान और ईशवर एकाकार हो जाते है।
     योग हमें जोड़ता है योग का अर्थ हमें अपने,समाज और अन्य लोगो से जोड़ने का काम करता है। योग के पांच रूप है हठ  , कर्म, राज, सठ और कर्म योग। ये हमारे जीवन के सभी पहलुओं से जुड़े हुए है। 
     हमारे योग को महत्ता दिलाने में विवेकानंद जी का  बहुत बड़ा योगदान रहा है। उनके प्रयासों से हमारे धर्म और योग की तरफ लोगो का रुझान बड़ा है । हमारी संस्कृति और योग के महत्व को अंतरास्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उसके बाद अन्य महर्षियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगो को जागरूक किया। 
     आपको जानकर हैरानी होगी आदियोगी शिवजी को कहा जाता है। शिवजी ने सप्त ऋषियों को योग का ज्ञान दिया था। उनके द्वारा समस्त मानव जाति योग को जान  सकी। 
        मोदी जी के प्रयासों के द्वारा 21 जून का दिन unesko ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में स्वीकार किया। इस साल  दूसरा योग दिवस मनाया गया। इसकी  भव्यता ने गिनिस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में 7  नए आयाम  बना दिए। इन्हे तोडना बहुत मुश्किल होगा।फरीदाबाद में  एक लाख लोगो  के द्वारा एक स्थान पर योग करना ,408 लोगो ने शीर्षासन किया,एक इंसान ने  पीठ पर ३६६०० ग्राम  वजन रखकर एक मिनट में 51 पुशअप किये । ये सभी  असाधारण काम है। 
     भारत के आलावा सभी देश योग सीखने में रूचि दिखा रहे है। यह हमारा स्वाभिमान बढ़ाने की बात है यहाँ तक की इस बार   190  देशो ने इस दिन भव्य रूप में योग दिवस मनाया ।उनके योगदान ने धर्म की कटटरता खत्म कर दी। मुस्लिम देशो ने बढ़चढ़कर भाग लिया। 
        हमारे देश के कई दिग्गजों ने  इस दिन का बहिष्कार किया। आप उनके बहिष्कार को किस रूप में देखेंगे। यह एक इंसान को निचा दिखाने की बात नहीं बल्कि अपनी संस्कृति का बहिष्कार करना है। कुछ लोग रोजमर्रा योग करते है। उन्हें इससे बहुत लाभ भी महसूस हुआ है। लेकिन विशेष रूप  से  उन्होंने इस दिन योग न करके कौन सा सुख हासिल किया मुझे समझ नहीं आया। 

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...