बाघ
हम लोगो ने जंगल में बाघ नहीं देखे है। बाघ केवल हमे चिड़ियाघर में ही देखने को मिलते है। बाघों का शिकार इतनी बेदर्दी से किया गया कि हमें लगने लगा इस सदी के अंत तक धरती से इनका नामोनिशान मिट जायेगा। नई पीढ़ी केवल किताबो में इनका चित्र देख पायेगी।
बहुत सारे देशो में एक भी बाघ नहीं बचा है। केवल भारत ही ऐसा देश है जिसमे संसार की अपेक्षा अधिक बाघ है। उनकी संख्या भी बढ़ रही है। कुछ समय पहले कम्बोडिया की सरकार ने भारत से बाघों की मांग की है क्योंकि वहाँ पहले बाघ थे लेकिन इस समय एक भी बाघ नहीं बचा है। यह एक अच्छी शुरुरात है। अब देश इस खत्म होती जाति के उत्थान के लिए कदम उठा रहे है।
बाघ को मारना शान और ताकत का प्रतीक समझा जाता था। जो जितने ज्यादा शिकार करता था उसे उतना ज्यादा सम्मान दिया जाता था। हमारे पास इतनी अधिक संख्या में हथियार हो गए है कि उनसे बाघों की नस्ल ही खात्मे की दिशा में बढ़ गई। पूरी दुनियाँ में सन 1901 में एक लाख बाघ थे जिनकी संख्या 2010 तक केवल 1706 रह गई थी। लेकिन 2016 में इनकी संख्या लगभग पूरे संसार में 500 के आसपास बढ़ गई है ।
जो जीव भोजन श्रृंखला में सबसे उपर था वह अब मनुष्यो के कारण जीवन के लिए तरस रहा है। जो शिकारी था उसका अंधाधुंध शिकार हो रहा था। लेकिन मानव ने अब अपनी जिम्मेदारी समझी तब उनकी संख्या बढ़नी शुरू हो गई है।
कई देशो में इसकी हड्डियों, माँस और शरीर के सभी अंगो का औषधी के रूप में इस्तेमाल होता है। उनके लिए वे कुछ भी दाम देने के लिए तैयार रहते है। नेपाल जैसे देश में इसकी खाल से बने परिधान विशेष महत्व रखते है। उन्हें बिशेष दिनों में पहन कर लोग स्वय को गौरवान्वित महसूस करते है. हमें लोगो की मान्यताओं और रीति -रिवाजो पर आघात नहीं करना है बल्कि उन्हें बाघों की जाति पर प्रतिकूल असर पड रहा है उसके प्रति जागरूक करना है। जिससे बाघों को जीने का अवसर मिले।
बाघ यदि सारे संसार से खत्म हो जायेंगे तो मानव जाती का विनाश भी तीन साल के अंदर हो जायेगा। आपको मेरी बातो पर यकिन नहीं आ रहा होगा ऐसा असम्भव लग रहा होगा। आप खुद सोचिये संसार में हर जीव का औचित्य है सृष्टि में शाकाहारी जानवरों की संख्या हद से ज्यादा न बढ़े इसलिए हिंसक जानवरों को बनाया गया। जब धरती से सारे हिंसक जानवर खत्म कर दिए जायेंगे तब शाकाहारी जीवो की संख्या बढ जाएगी वेइतनी ज्यादा संख्या में बढ़ जायेंगे कि हरियाली कम पड़ जाएगी वे सारी हरियाली उगने से पहले ही खत्म कर देंगे सारी सृष्टि हरियाली के कारण ही जीवित है। उनसे मिलने वाले लाभ किसी को नहीं मिल पाएंगे। वातावरण दूषित हो जायेगा साँस लेना दूभर हो जायेगा। भोजन खत्म हो जायेगा। हमारी आधी से ज्यादा जरूरतें पेड़ - पोधो से जुडी है। वह जब पूरी नहीं होंगी हम कैसे जीवित रह सकेंगे।
कुछ देशो में शेर का प्रजनन मुर्गी -पालन जैसे केंद्रों में किया जा रहा है। जब मेने देखा तब मुझे उनको बाड़े में बंद देख कर बहुत दुःख हुआ। उनका व्यवहार बाघों की अपेक्षा कुत्तो जैसा लग रहा था। लेकिन औषधी ,माँस हड्डी और खाल के शिकार के लिए इस तरह से उनका प्रजनन करके बाकि जंगली बाघों को बचाने का प्रयास किया जा सकता है। .
इनके विकास में गीर के बब्बर शेरो जैसा प्रयास करना भी उचित है। जंगलों में इंसानी दखल के कारण उनकी जाति पर भी संकट के बदल मड़रा रहे थे। लेकिन गुजरात सरकार ने इंसानो को जानवरों के व्यवहार की जानकारी दी। उन्हें अपने सहायक के सामान समझाने में सफल हुए। आपको जानकर हैरानी होगी वहाँ पर इंसानो और बबबर शेर के बीच अद्भुत सम्बन्ध स्थापित हो गया है ,वे इंसानो के आस -पास घूमते हुए मिल जायेंगे। इक्का -दुक्का ही शेर इंसानो पर हमला करते है। जिसका कारण जान कर उसका उपचार किया जाता है। वहाँ का वातावरण देखकर मुझे हमारे ऋषियों के आश्रम याद आ गए। जहाँ हिंसक जानवर भी अपना व्यवहार बदल देते थे।
कुछ समय पहले बनारस के जंगलों में गिर के बबबर शेरो के विकास की कोशिश की गई थी लेकिन वहाँ लोगो में इनका इतना अधिक डर समाया हुआ था कि उन्होंने शेरो के खाने में जहर देकर उन्हें मार डाला। सरकार की योजना धरी रह गई।
बाघों की बढ़ती संख्या के कारण मन में आशा की किरण का संचार हो रहा है। ये जाति डायनासोर की तरह लुप्त नहीं होती। आने वाले समय में लोग इन्हे देख सकेंगे।
कई देशो में इसकी हड्डियों, माँस और शरीर के सभी अंगो का औषधी के रूप में इस्तेमाल होता है। उनके लिए वे कुछ भी दाम देने के लिए तैयार रहते है। नेपाल जैसे देश में इसकी खाल से बने परिधान विशेष महत्व रखते है। उन्हें बिशेष दिनों में पहन कर लोग स्वय को गौरवान्वित महसूस करते है. हमें लोगो की मान्यताओं और रीति -रिवाजो पर आघात नहीं करना है बल्कि उन्हें बाघों की जाति पर प्रतिकूल असर पड रहा है उसके प्रति जागरूक करना है। जिससे बाघों को जीने का अवसर मिले।
बाघ यदि सारे संसार से खत्म हो जायेंगे तो मानव जाती का विनाश भी तीन साल के अंदर हो जायेगा। आपको मेरी बातो पर यकिन नहीं आ रहा होगा ऐसा असम्भव लग रहा होगा। आप खुद सोचिये संसार में हर जीव का औचित्य है सृष्टि में शाकाहारी जानवरों की संख्या हद से ज्यादा न बढ़े इसलिए हिंसक जानवरों को बनाया गया। जब धरती से सारे हिंसक जानवर खत्म कर दिए जायेंगे तब शाकाहारी जीवो की संख्या बढ जाएगी वेइतनी ज्यादा संख्या में बढ़ जायेंगे कि हरियाली कम पड़ जाएगी वे सारी हरियाली उगने से पहले ही खत्म कर देंगे सारी सृष्टि हरियाली के कारण ही जीवित है। उनसे मिलने वाले लाभ किसी को नहीं मिल पाएंगे। वातावरण दूषित हो जायेगा साँस लेना दूभर हो जायेगा। भोजन खत्म हो जायेगा। हमारी आधी से ज्यादा जरूरतें पेड़ - पोधो से जुडी है। वह जब पूरी नहीं होंगी हम कैसे जीवित रह सकेंगे।
कुछ देशो में शेर का प्रजनन मुर्गी -पालन जैसे केंद्रों में किया जा रहा है। जब मेने देखा तब मुझे उनको बाड़े में बंद देख कर बहुत दुःख हुआ। उनका व्यवहार बाघों की अपेक्षा कुत्तो जैसा लग रहा था। लेकिन औषधी ,माँस हड्डी और खाल के शिकार के लिए इस तरह से उनका प्रजनन करके बाकि जंगली बाघों को बचाने का प्रयास किया जा सकता है। .
इनके विकास में गीर के बब्बर शेरो जैसा प्रयास करना भी उचित है। जंगलों में इंसानी दखल के कारण उनकी जाति पर भी संकट के बदल मड़रा रहे थे। लेकिन गुजरात सरकार ने इंसानो को जानवरों के व्यवहार की जानकारी दी। उन्हें अपने सहायक के सामान समझाने में सफल हुए। आपको जानकर हैरानी होगी वहाँ पर इंसानो और बबबर शेर के बीच अद्भुत सम्बन्ध स्थापित हो गया है ,वे इंसानो के आस -पास घूमते हुए मिल जायेंगे। इक्का -दुक्का ही शेर इंसानो पर हमला करते है। जिसका कारण जान कर उसका उपचार किया जाता है। वहाँ का वातावरण देखकर मुझे हमारे ऋषियों के आश्रम याद आ गए। जहाँ हिंसक जानवर भी अपना व्यवहार बदल देते थे।
कुछ समय पहले बनारस के जंगलों में गिर के बबबर शेरो के विकास की कोशिश की गई थी लेकिन वहाँ लोगो में इनका इतना अधिक डर समाया हुआ था कि उन्होंने शेरो के खाने में जहर देकर उन्हें मार डाला। सरकार की योजना धरी रह गई।
बाघों की बढ़ती संख्या के कारण मन में आशा की किरण का संचार हो रहा है। ये जाति डायनासोर की तरह लुप्त नहीं होती। आने वाले समय में लोग इन्हे देख सकेंगे।

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