water

                                 जल 

     
जल का महत्व संसार के सारे प्राणी समझते है। इसको सँभालने का काम केवल मानव कर  सकता है.बाकी प्राणी केवल अपने जीवन के लिए पानी का प्रयोग कर सकते है।
      केवल मानव अपनी विलासिता को साबित करने के लिए पानी की अंधाधुंध बर्बादी कर रहा है। इसके कारण हर तरफ हाहाकार  मच गया है। जीने के लिए पानी कितना अहम स्थान रखता है।  इस बारे में सुखा पीडित इलाके के लोग अच्छी तरह जानते है। 
       हमारी सभी जरूरतें पानी  से जुडी हुई है। सुबह के नितयकर्म  से लेकर रात को सोने तक हमारे सभी काम पानी के द्वारा संपन्न होते है। आप खाना बनाना ,नहाना ,सफाई धुलाई जैसे अनेक काम पानी के माध्यम से कर पाते है। 
     जब से नल के द्वारा पानी  मिलने लगा है  तब से पानी का महत्व लोग भूलने लगे। आसानी से मिलने के कारण वे पानी का उपयोग लापरवाही से करने लगे. एक बाल्टी पानी  से नहाने के स्थान पर शाबर  और नहाने के तालाव के द्वारा बहुत सारा पानी बर्बाद करने लगे। शौचालय में फ्लश के द्वारा पानी बहुत ज्यादा बर्बाद हो जाता है। सब्जियाँ बर्तन में पानी भर कर  धोने की जगह खुले नलके का उपयोग ,गाड़ियां और सड़के धोने में पाइप का इस्तेमाल ,ब्रश करते हुए, या हाथ धोते हुए पानी को बहता देख कर उसे बंद न करना। इन सबके कारण बहुत ज्यादा जल बह जाता है। 
       १९४० के समय दिल्ली में इतना ज्यादा पानी था कि लोग जमीन  की नमी को कम करने के लिए मोटर से पानी बाहर फिक्वाते थे। तब उस जगह पर निर्माण कार्य करवाया जा   सकता था। मेरे सामने 70  के दशक तक 4  मंजिल तक पानी बिना मोटर की सहायता के चढ़ जाता था। शाहदरा में 90  के दशक तक दो मंजिल तक पानी  पूरे  दिन बिना मोटर के आता  था। अब कुछ समय पहले तक पानी  मोटर से  आता था।लेकिन अब यहाँ जल मोटर से भी रात  के 12 बजे आता  है जबकि दिन में पानी का कोई अता -पता नहीं होता। पानी के इंतजार में पूरी रात खराब हो जाती है।पहले 10  फूट की गहराई  वाले  हैंडपम्प में पानी  आ जाता था। अब हैंडपंप में पानी  आता ही नहीं है  इस दिक्क्त से बचने के लिए लोगो ने समर्सिबल पंप  लगवाने शुरू कर दिए है।  लेकिन ऐसे घरों के लोग पानी की बर्बादी करने लगे है। 
      लोग भूल जाते है कि महाराष्ट्र ,कर्नाटक.तमिलनाडु, राजस्थान  ,गुजरात मध्यप्रदेश से लोग पानी की कमी के कारण पलायन कर  रहे है।  पानी की कमी के कारण 150 मोते हो चुकी है। लातूर में 1000  से अधिक पक्षी मर गए है। वहाँ का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया है। वहाँ शादी ,ब्याह जैसे काम टाले जा रहे है। 33 करोड़ आबादी पानी की कमी का   शिकार हो रही है। आईपीएल जैसे आयोजनों का विरोध पानी की बर्बादी के कारण हो रहा है। जबकि उस राज्य को इससे कमसकम 100 करोड़ की आमदनी होनी थी। 
      हमने आज की सुविधा को स्थाई समझ कर उसके बचाव के उपाय करने छोड़ दिए. पुराने समय में अकबर ने फतेहपुर सिकरी बसाई  थी। पानी के आभाव में पूरा इलाका छोड़ कर उन्हें आगरा आना पड़ा। 
       इन इलाको के समान हमारा राज्य न हो इसके लिए हमें अभी से जागरूक होना पड़ेगा। बर्षा जल को बर्बादी से रोकना होगा। इसके लिए हमें पानी के लिए वाटर हार्वेस्टिंग जैसे उपाय करने चाहिए। इसमें पानी को अलग -अलग टैंकों के द्वारा जमीं के अंदर पहुंचाया जाता है। पक्की जमीं होने के कारण भूमि पानी सोखने की शक्ति गवा बैठी  है। उसके लिए उपाय करने पड़ेंगे। 
     पहले पानी बहुत साफ होता था। अब जल बोर्ड का पानी भी r.o के बिना पीना  मुश्किल हो गया है।
       टॉयलेट की टंकी में एक लीटर की बोतल भर के डाल देने से एक लीटर  पानी की बचत होगी।रसोई के जल को बागवानी में प्रयोग किया जा सकता है। हमें तालाब ,कुए ,बाबड़ी ,जोहड़ जैसे पानी जमा करने के उपायों को फिर से जीवित करना पड़ेगा। इससे जमीन के ऊपर और अंदर पानी रह सके। पानी की टंकी बंद रखनी चाहिए जिससे उसमे गंदगी न जा सके। धुप के कारण वाष्पीकरण से पानी बचा रहे।अपने आसपास के लोगो को भी पानी बर्बाद करने से रोकेंगे तभी हम भविष्य में पानी की जरूरतें पूरी करने में संभव हो सकेंगे। अकेले सरकार इस समस्या का समाधान नहीं कर सकेगी हम सबको मिलजुलकर प्रयास करने पड़ेंगे तभी इस समस्या का हल निकल सकेगा।  
     हमारी आज के प्रयास हमें भविष्य की" पानी पर की लड़ाई "से   बचाएंगे। आपको ये शब्द बड़े अजीव लग रहे होंगे। क्योंकि आपने "पानीपत की तींन लड़ाइयों" के बारे में सुना होगा। ये शब्द आप पहली बार सुन रहे है। यदि समय रहते हम सचेत नहीं होंगे तब भविष्य में पानी  पर की लड़ाइयाँ होकर रहेंगी। 
     आप कभी राजस्थान जैसे जगह जाकर देखिये वहाँ की जनता अपने घर के बाहर पानी की  बहुत बड़ी  टंकी में पानी भरकर ताला लगा   देती है जिससे कोई उनका पानी चुरा न सके। पानी के लिए दोस्ती को भी तिलांजलि दे दी जाती है। 
     इसलिए आप भी पानी के महत्व को समझिए बर्बादी से रोकिये। 
        

                                          बाघ 

     
  हम लोगो ने जंगल में बाघ नहीं देखे है। बाघ केवल हमे चिड़ियाघर में ही देखने को मिलते है। बाघों का शिकार इतनी बेदर्दी से किया गया कि हमें लगने लगा इस सदी के अंत तक धरती से इनका नामोनिशान मिट जायेगा। नई  पीढ़ी केवल किताबो में इनका चित्र देख पायेगी।
      बहुत  सारे  देशो में एक भी बाघ नहीं बचा है। केवल भारत ही ऐसा  देश है जिसमे संसार की अपेक्षा अधिक बाघ है। उनकी संख्या भी बढ़  रही है। कुछ समय पहले कम्बोडिया की सरकार ने भारत से बाघों की मांग की है क्योंकि वहाँ  पहले बाघ थे लेकिन इस समय एक भी बाघ नहीं बचा है। यह एक अच्छी शुरुरात है। अब देश इस खत्म होती जाति के उत्थान के लिए कदम उठा रहे है। 
         बाघ को मारना शान और ताकत का प्रतीक समझा जाता था। जो जितने ज्यादा शिकार करता था उसे उतना ज्यादा सम्मान दिया जाता था। हमारे पास इतनी अधिक संख्या में हथियार हो गए है कि  उनसे बाघों की नस्ल ही खात्मे की दिशा में बढ़ गई। पूरी दुनियाँ में सन 1901 में एक लाख बाघ थे जिनकी संख्या 2010  तक केवल 1706  रह गई थी। लेकिन 2016  में इनकी संख्या लगभग पूरे संसार में 500 के आसपास बढ़ गई है । 
        जो जीव भोजन श्रृंखला में सबसे उपर  था वह अब मनुष्यो के कारण जीवन के लिए तरस रहा है। जो शिकारी था उसका अंधाधुंध शिकार हो रहा था। लेकिन मानव ने अब अपनी जिम्मेदारी समझी तब उनकी संख्या बढ़नी शुरू हो गई है।
      कई देशो में इसकी हड्डियों, माँस  और शरीर के सभी अंगो का औषधी के रूप में इस्तेमाल होता है। उनके लिए वे कुछ भी दाम देने के लिए तैयार रहते है। नेपाल जैसे देश में इसकी खाल  से बने परिधान विशेष महत्व रखते है। उन्हें बिशेष दिनों में पहन कर  लोग स्वय को गौरवान्वित महसूस करते है. हमें लोगो की मान्यताओं और रीति -रिवाजो पर आघात नहीं करना है बल्कि उन्हें बाघों की जाति पर प्रतिकूल असर पड  रहा है उसके प्रति जागरूक करना है। जिससे बाघों को जीने का अवसर मिले। 
            बाघ यदि सारे संसार से खत्म हो जायेंगे तो मानव जाती का  विनाश भी तीन  साल के अंदर हो जायेगा। आपको मेरी बातो पर यकिन  नहीं आ रहा होगा ऐसा  असम्भव लग रहा होगा। आप खुद सोचिये संसार में हर जीव का औचित्य है  सृष्टि में शाकाहारी जानवरों की संख्या हद से ज्यादा न बढ़े इसलिए हिंसक जानवरों को बनाया गया। जब धरती से सारे हिंसक जानवर खत्म कर  दिए जायेंगे   तब शाकाहारी जीवो की संख्या बढ जाएगी वेइतनी ज्यादा संख्या में बढ़ जायेंगे कि हरियाली कम पड़ जाएगी वे  सारी  हरियाली उगने से पहले ही खत्म कर  देंगे सारी  सृष्टि हरियाली के कारण ही जीवित है। उनसे मिलने वाले लाभ किसी को नहीं मिल पाएंगे। वातावरण दूषित हो जायेगा साँस लेना दूभर हो जायेगा। भोजन खत्म हो जायेगा। हमारी आधी  से ज्यादा जरूरतें पेड़ - पोधो  से जुडी है। वह जब पूरी नहीं होंगी हम कैसे जीवित रह सकेंगे। 
        कुछ देशो में शेर का प्रजनन मुर्गी -पालन जैसे केंद्रों में किया जा रहा है। जब मेने देखा तब मुझे उनको बाड़े में बंद देख कर  बहुत दुःख हुआ।  उनका व्यवहार बाघों की अपेक्षा कुत्तो जैसा लग रहा था। लेकिन औषधी ,माँस हड्डी और खाल के शिकार के लिए इस तरह से उनका प्रजनन करके बाकि जंगली बाघों को बचाने का प्रयास किया जा सकता है। . 
        इनके विकास में गीर के  बब्बर  शेरो जैसा प्रयास करना भी उचित है। जंगलों में इंसानी दखल के कारण उनकी जाति पर भी संकट के बदल मड़रा रहे थे। लेकिन गुजरात सरकार ने इंसानो को जानवरों के व्यवहार की जानकारी दी। उन्हें अपने सहायक के सामान समझाने में सफल हुए। आपको जानकर हैरानी होगी वहाँ पर इंसानो और बबबर शेर के बीच अद्भुत सम्बन्ध स्थापित हो गया है ,वे इंसानो के आस -पास घूमते हुए मिल जायेंगे। इक्का -दुक्का ही शेर इंसानो पर हमला करते है। जिसका कारण जान कर उसका उपचार किया जाता है। वहाँ का वातावरण देखकर मुझे हमारे ऋषियों के आश्रम याद आ गए। जहाँ हिंसक जानवर भी अपना व्यवहार बदल देते थे। 
       कुछ समय पहले बनारस के जंगलों में गिर के बबबर शेरो के विकास की कोशिश की गई थी लेकिन वहाँ लोगो में इनका इतना अधिक डर समाया हुआ था कि उन्होंने शेरो के खाने में जहर देकर उन्हें मार डाला। सरकार की योजना धरी रह गई। 
      बाघों की बढ़ती संख्या के कारण मन में आशा की किरण का संचार हो रहा है। ये जाति डायनासोर की तरह लुप्त नहीं होती। आने वाले समय में लोग इन्हे देख सकेंगे। 
   
         

   नरेंदर मोदी 

  
     
आज तक जितने भी नेता के बारे में जाना उन सबने ऊँचा ओहदा ,शानदार जिंदगी जीने के लिए पाना चाहा। उनके अंदर अपना विकास करने की इच्छा सर्वोपरी  थी। उन्होंने सभी तरह के ऐशोआराम पाने के लिए जी तोड़ मेहनत की। इसके आलावा अपनी कई पुश्तो के आराम का सामान मुहैया करा दिया।
        मोदी जी के बारे में जितना जाना उससे लगता है जो जवानी में साधु बनने की इच्छा उनके मन में थी वह अब तक खत्म नहीं हुई है। वे नवरात्रो के सारे  व्रत  पानी पीकर  रखते  है।  उनके काम में किसी तरह की कमी या थकावट देखने को नहीं मिलती है। एक पाकिस्तानी वक्ता ने मोदी के बारे में कहा था -"ये पानी पीकर इतना काम कर  लेते है यदि इन्हे दारु पिला दी जाये तो ये कितना अधिक काम करेंगे। " मुझे उसके शब्द सुनकर बहुत हंसी आई थी।  सही मायने में उनका जीवन एक तपस्वी के सामान है। इतने साधन होते हुए भी कभी गलत खान -पान के बारे में नहीं सुना। उनके द्वारा मर्यादाओ के उल्लंघन की खबरें भी नहीं सुनाई देती है। 
       एक पाकिस्तानी वक्ता ने कहा था -"जिसे मास , दारु और शबाब का शौक नहीं है। वह गलत  कर ही क्या  सकता है.. "मुझे उसके शब्दों ने लाजबाब कर  दिया।उनके बीबी -बच्चे साथ  नहीं जिनके कारण वह भ्रस्ट बने तब भी   भारतीय राजनीतिज्ञ  उनकी धज्जियां उड़ाने का कोई मौका नहीं चुकते।
         मोदी जी का कार्यकाल दो साल(730 दिन ) का रहा। इसमें  95  दिन में 20 यात्राएं 40  देशो में  की। उनके बारे में अधिकतर सुनने में आता है. उन्हें भारत से ज्यादा विदेशो में सम्मान पाने का शौक है। वे व्यक्तिगत लाभ के लिए ये दौरे लगाते  है। उनके दौरे के कारण भारत और अन्य देशो के साथ बहुत सारे समझौते हुए है जिनके बारे में आलोचक बयान नहीं करते है। इससे पहले किसी अन्य नेता ने इतने कम समय में इतने अधिक देशो की यात्राएं नहीं की थी।
          वे अपना समय बचाने के लिए सोने का समय किसी देश के होटल में बिताने के स्थान पर रात के समय प्लेन में सफर करते है। इससे उनके समय और देश के धन की बचत होती है। जबकि एक साधारण इंसान अपने सोने के समय में पूरा आराम करना पसंद करता है। उस यात्रा के समय वे अपने स्टाफ के साथ आने वाले कार्यक्रमों के विषय में चर्चा करते रहते है। उस समय में भी वे और उनका स्टाफ भरपूर नींद नहीं ले पाता  है। मोदी तो असाधारण व्यक्ति है लेकिन उनका स्टाफ तो साधारण लोगो का है। पहले नेताओं के साथ उनका स्टाफ ऐश की जिंदगी जीता था अब ये दिन उन्हें सजा के सामान लगते होंगे। 
       वे पांच दिन में 3 देशो की यात्राएं कर पाते है। उनके साथ बहुत सारे लोग जैसे व्यवसायी ,अनेक चैनलों के लोग ,उनके साथ के लोग नहीं होते। बल्कि वे अपने साथ बहुत कम स्टाफ के लोगो को लेकर चलते है। जिसके कारण बहुत कम   धन और समय की बर्बादी होती है। इससे पहले सुनने में आता  था जब एक प्रधानमंत्री किसी जगह खाना खाते  थे तो उस जगह के लोगो के बारे- न्यारे हो जाते थे। एक बार खाने का बिल लाखो का बैठता था। ये सब भारतीय कर दाताओ की जेब से जाता था। 
      मोदी जी अपने साथ स्टाफ के कुछ जरूरी लोगो और दूरदर्शन के चैनल के लोगो के साथ चलते है। उन्हें भी ताकीद होती है वे अपना खर्च खुद उठाये। इसलिए मोदी जी जब खाना खाते है उसका बिल  केवल रु  3000 के आस -पास ही   आता है जिसका खर्च वह खुद उठाते है।वे अपने साथ बहुत कम अधिकारी लेकर चलते है।  जब वे खुद अपना खर्च वहन करते है तो दूसरों को भी अपना बिल खुद भरना पड़ता है। जिसके कारण उनकी यात्राओं पर खर्च बहुत कम होता है। 
      जबसे मोदी जी की सरकार आई है तब से उन्होने  दूरदर्शन और रेडिओ को महत्ब देना शुरू किया है  दूरदर्शन और रेडिओ घाटे में थे लेकिन मोदी जी ने रेडिओ पर "मन की बात "और दूरदर्शन को बढ़ावा देने के कारण दोनों घाटे से उबर रहे है। अब से पहले के लोगो ने अपने स्वार्थ के लिए दूसरे चेनलो वालो से पैसे लेकर रेडिओ और दूरदर्शन को घाटे में डुबो दिया था। 
       हमारी इंडियन एयरलाइन पहले अच्छा मुनाफा कमा रही थी लेकिन जिस समय प्राइवेट एयरलाइन आई उन्हें मुनाफे का समय दे दिया गया जिसके कारण नेताओं के  घर भर गए लेकिन इंडियन एयरलाइन को यात्रिओ का आभाव हो गया। ये  काफी समय से घाटे में चल रही थी। उसका घाटा पूरा हम जैसे कर दाताओ के पैसे से चल रहा था। मोदी जी के आने के बाद फिर से इंडियन एयरलाइन में मुनाफा होने लगा है। 
        हम जिस इंसान में हर समय कमियाँ ढूंढ रहे है उसके बारे में जरा सोच के देखिये उसके अकाउंट में कितने पैसे है। वह कितनी आरामदायक जिंदगी जी रहा है। वह जो काम कर रहा है उससे उसका व्यक्तिगत कितना फायदा हो रहा है। उसके राज में कोई भ्रस्टाचार का मामला सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने मंत्रियो पर भी लगाम लगा रखी है।
       उन्हें जनता ने काम के लिए चुना है वे आम इंसानो की अपेक्षा ज्यादा काम  कर रहे है। उन्हें पांच साल तक लगातार काम करने दीजिए। जिसके आने पर विदेशो में पलक -पावड़े बिछाई जा रही है उनके लिए इतने गंदे शब्दों का इस्तेमाल करके हम खुद अपने आपको गिरा रहे है। वह इंसान दुनियाँ में केवल काम करने के लिए आया है।  उसे काम करने दीजिए। 

#ajadi ke mayne

           लिखने या बोलने की आजादी का मतलव ये कभी नहीं होता कि इसके कारण देश या इंसानो की भावनाओ को आहत  किया जाये। यदि देश के बारे में कोई विदेशी कुछ गलत लिखता या बोलता है तो हम एकजुट होकर विरोध  करते है। इसके उदाहरण आपको बहुत मिल जायेंगे।
      कुछ समय पहले वेंडी  डोनिगर की किताब "द हिन्दुज: एन अलटरनेटिव हिस्टरी " में हिन्दू देवी देवताओ को कामुकता के शिकार बताया है। चण्डिका ने शुम्भ को यौन के उन्माद में मार डाला। यम -यमी के संवाद को विकृत  रूप में प्रस्तुत किया है। सीता  और लक्ष्मण के बीच कामुकता का संबंध बताने का प्रयास किया गया है जबकि बाल्मीकि की रामायण में ऐसा कोई प्रसंग नहीं है। पुस्तक के मुख्य पृष्ठ पर कृष्ण को निर्वस्त्र गोपियों से घिरे हुए दिखाया है। सूर्य ने कुन्ती से बलात्कार किया है। ये सब हिन्दुओ की भावनाओ से अलग था। 
         वेंडी  ने जानबूझकर बताया - विवेकानंद ने श्रोताओं से गोमांस खाने  का आग्र्रह  किया। हिन्दुओ की पूजा में नारियल तोड़ने की प्रकिया को बलि प्रथा से जोड़कर दिखाया है।  यह किताब मूलत: ईसाई मान्यताओं को मजबूती प्रदान करने और हिन्दुत्ब को बदनाम करने का प्रयास था।  
       इस किताब का विरोध किया गया जिसके कारण इस किताब को बाजार से लेखिका को हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। पेंग्विन प्रकाशन ने माफ़ी मांगते हुए आगे इसकी छपाई करने से मना कर दिया।
     चित्रकार हुसैन को हिन्दू विरोध के कारण भारत छोड़ना पड़ा। 
    बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन  को बांग्लादेश छोड़कर दूसरे देश की शरण में जाना पड़ा। उसकी किताबो का उस देश में प्रतिबन्ध लगा दिया गया। 
    मेकेल एडवर्ड,जसवंत सिंह,जोसेफ लेलीवेल्ड ,डी.एन,झा की पुस्तकों पर प्रतिबन्ध लगाया गया। क्योंकि इनकी  किताबो के द्वारा भारतीयों की भावनाएं आहट हो रही थी।  इन पर पाबन्दी  लगाने वाली कांग्रेस सरकार  थी। 
      आज कांग्रेस के द्वारा बनाई गई इण्डिया सांस्कृतिक सेंटर के सदस्य हिन्दुओ की बर्बादी का कारण बन रहे है क्योंकि मोदी सरकार ने इस संस्था पर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिश की तो इन सब सदस्यों  के हितों  पर आघात होने लगा तब ये सभी एकजुट होकर अपने पुरस्कार वापिस करने लगे। विदेशो और भारत में असहिषुणता पर अपनी टिप्पणी देकर केवल अपने हितों को साधने में लगे है। इससे भारत की कितनी बदनामी हो रही है इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है    
    लेकिन आज के माहौल में हमारी राजनीतिक दायरा इतना बढ़  गया है कि हिन्दू धर्मग्रन्थ हमारे विश्विद्यालयो  में जलाए जा रहे है। जब मनुसमृति लिखी गई थी उसमे चार वर्ग कामो के आधार पर बांटे गए थे। उन्हें जन्म के आधार पर निर्धारित नहीं किया गया था। ये विकृति बाद में आई थी। यदि हम ही अपने धर्म ग्रंथो का अनादर करेंगे तब हिन्दू धर्म का उत्थान कौन करेगा। 
      हमारे विरोधी  राजनीतिक  दल इनको सजा देने पर इसे बोलने की आजादी का हनन कह रहे है। सभी अधिकार तभी तक मान्य होते है जब तक उससे किसी इंसान या देश की  हानि ना हो वरना हर तरफ अराजकता फैल जाएगी। इस अराजकता के कारण केवल बोलने की आजादी का हनन ही नहीं होगा बल्कि जीवन जीना भी बहुत कठिन हो जायेगा।इंसान के अंदर का नरपशु जाग जाने पर हर तरफ मार -काट मच जाएगी। तब आजादी के लिए इंसान छट्पटाएगा। 

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...