कबाड़े से बना आश्चर्य जनक स्थान
आप कूड़े के ढेर पर पिकनिक मनाना पसंद करोगे ,कभी नहीं। मुझे पागल तक कहने में गुरेज नहीं करोगे। लेकिन आजकल ऐसा हो रहा है। आपने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ में मिलेनियम पार्क और सेवन वंडर पार्क का नाम सुना है। वह उसी जगह बनाये गए है। जहाँ काफी साल पहले दिल्ली का कूड़ा ट्रको के द्वारा फेंका जाता था। यह जगह डंपिंग यार्ड थी। लेकिन जब यहां कूड़ा डालने की सीमा खत्म हो गयी तब इसका पुनर्निर्माण शुरू हुआ। अब इस जगह पर आकर लोगो को ख़ुशी महसूस होती है। लोग बहुत सारे पैसे खर्च करके आते है।
मैने सेवन वंडर पार्क का बहुत नाम सुना था। मुझे रविवार को यहां जाने का मौका मिला। इस जगह पर बहुत सारी गाड़ियां खड़ी हुई थी। जिनकी पार्किंग का शुल्क प्रत्येक घंटे के हिसाब से लिया जा रहा था। पहले घंटे के 40 रूपये उसके बाद हर घंटे के हिसाब से 20 रूपये लिए जा रहे थे। उसके बाबजूद बहुत दूर जाकर गाड़ी खड़ी करने की जगह मिली। हमें बहुत दूर गेट तक चलना पड़ा। उसके बाद अंदर जाने के लिए लम्बी पंक्ति में खड़े होकर टिकट लेनी पड़ी। रविवार को टिकट दुगने पैसे(100 रूपये ) की मिली।
अंदर कबाड़े से बनायी गयी हैरतअंगेज चीजे दिखाई दी. सबसे पहले फव्वारा दिखाई दिया। जिसके नीचे का स्थान लोहे के सीखचों के अंदर पत्थर भर कर मजबूती दी गयी थी। वैसे ही मुख्य दरवाजे के बड़े स्तम्भ भी इसी प्रकार बनाये गए थे।
जहाँ सेवन वंडर पार्क लिखा था वह भी बेकार के सामान से बनाया गया था। उस पर यदि पेंट किया गया होगा तो उसका रंग ऐसा रखा गया है मानो जंग लग गयी है। यहाँ पर दुनिया के सात अजूबे बनाये गये है जैसे ताजमहल- आपने ताजमहल सफेद रंग का देखा होगा लेकिन यहां का यह तारो से बना हुआ है। उसके ऊपर भी ऐसा लगता है। मानो जंग लग गई है। उसके बाग और नहर के दृश्य भी बनाने की कोशिश की गयी है।
पीसा की झुकी हुई मीनार - इटली में यह मीनार बनते ही झुकनी शुरू हो गयी। तभी से इसको सीधा करने की बहुत कोशिश की गयी लेकिन इसे सीधा नहीं किया जा सका। बल्कि गिर कर टूटने से बचाने के ही सारे यत्न लगते है। इसकी सुंदरता निहारने के लिए ही लाखो लोग पहुंचते है।
रोम का कोलोजियम -इसे आज के समय का स्टेडियम कहा जा सकता है। पुराने समय में लोगो का लड़ाई के माध्यम से मनोरंजन किया जाता था। इसमें एकसाथ 65 हजार लोग बैठ सकते थे।
स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी -यह फ़्रांस के सहयोग से ऊँची पहाड़ी पर बनाया गया है जिसे बहुत दूर से देखा जा सकता है।
रियो दी रिडीमर - यह ब्राजील में एक पहाड़ी पर बनायीं गयी है। इसके कारण इस राज्य को नई पहचान मिली।
फ्रांस की पहचान एफिल टावर की प्रतिकृति भी बनाई गयी है इसके चारो तरफ बाढ़ नहीं बनाई गयी है . बाकी सभी प्रतिकृति को छूने से रोकने के लिए बाढ़ बनाई गयी है। लेकिन इसके अंदर जाकर फोटो खिचवाई जा सकती है।
मिश्र के पिरामिड पत्थरो की जगह तारो से बनाये गए है लेकिन यह भी मिस्र के पिरामिड के हमरूप लगते है।
यहाँ पर बड़े -बड़े कंटेनर में केंटीन बनाई गयी है। जिसमे खाने का सामान तैयार होता है। बाहर खुली जगह पर कुर्सियों और मेजो पर बैठकर खाने के इंतजाम किये गए है। सर्दियों की खुली धुप में बैठकर खाते हुए चारो तरफ का दृश्य देखने में मजा आ रहा था।
यहाँ पर वाशरूम भी बेकार पड़े कंटेनर में बनाये गए है। आपको भी कबाड़ का इतना अच्छा सदुपयोग कही अन्य जगह नहीं मिलेगा।
हम जैसे साधारण लोग जो विदेशो में जाकर इनके दर्शन नहीं कर सकते वे भारत में रहकर सात अजूबे देखकर मन बहला सकते है
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