# dhuandhar jharne ka adbhut saundry

                 धुआंधार झरने का अद्भुत सौंदर्य 


  मध्यप्रदेश के जबलपुर में धुआंधार झरना  दर्शनीय स्थान है। यह मुख्य शहर से कुछ दूर है लेकिन सिटी बस से भी पहुंचा जा सकता है।  हमें मालूम नहीं था इसलिए हमने एक टैक्सी से पूरा   शहर घूमने के बारे में सोचा। हमें धुआँधार झरने तक पहुंचने के लिए, जहां हमारे गाइड ने छोड़ा, वहां से एक लम्बा गलियारा पार करना था।
         उस गलियारे में अनेक तरह की चीजे बिक  रही थी। उसमे अधिकतर संगमरमर से बनी हुई थी। मेने इस तरह के सामान की कल्पना नहीं की थी। हाथो, बालो, कानो और गले को सजाने वाली अनेक चीजे दिखाई दे रही थी। पहले तो मुझे वे  चीजे प्लास्टिक की लगी लेकिन बाद में गौर से देखने पर  वे सच  में संगमरमर की थी। इतने बारीक़ काम की कल्पना करना मेरे लिए मुश्किल था।
         संगमरमर के बड़े -बड़े सामान भी बिक रहे थे जो आमतौर पर आपने पहले भी देखे हुए है। जैसे मूर्तियां, सजावटी सामान जो मन को लुभा रहे थे । मेने उनके बारे में जानने की कोशिश की तब पता चला यहां पर संगमरमर काम करने के लिए बाहर से मंगवाया जाता है। यहाँ के संगमरमर की चट्टानों को तोड़ने पर मनाही है.
      दुकानों को निहारते हुए   जब  हम झरनें  के पास पहुंचे तब हमें रोप वे दिखाई दिया। जिससे हम इस झरने को ऊंचाई से देख सकते थे।हमने इसके द्वारा सफर करने के बारे में सोचा। रोप वे से हमें  झरने  का बृहद रूप दिखाई दिया। जिसे देखकर मन विभोर हो उठा।
        इतना विशाल झरना इससे पहले मेने नहीं देखा था। चारो और पानी -ही पानी था  पहाड़ के ऊपर झरने को देखने के लिए रेलिंग लगाई हुई है। हम ऊंचाई से  झरने को देखने के लिए रेलिंग के  पास आये।  हम पहाड़ के बहुत ऊपर से इसे निहार रहे थे। लेकिन इसके पानी की फुहारे इतनी ऊंचाई तक पहुंच कर हमें भिगो रही थी। इतनी अधिक बौछारे हमे वहां से हटने के लिए मजबूर कर रही थी। पानी की नन्ही नन्ही बुँदे धुंए की शक्ल में हमारे चारो तरफ मौजूद थी। रेलिंग के पास खड़े होकर झरने को निहारने में आनंद की अनुभूति हो रही थी। उसकी चौड़ाई देखकर मुझे नियाग्रा फाल याद आ रहा था। इतना विस्तृत झरना अलग अहसास दिलाता है।
     यहाँ पर हमें चाय और पकोड़े वाले की दुकान दिखाई दी। तब इसे निहारते हुए चाय -पकोड़ो का मजा लेने से हम स्वयं को नहीं रोक सके। अनेक रंगो की  संगमरमरी  चट्टानों पर उड़ते वाष्पकण आलौकिक आभा बिखेर रहे थे।
      झरने के नीचे बहुत सारे लोग नहा  रहे थे। उनके लिए अलग जगह बना रखी थी जो कम पानी की धारा  थी या जिसे रुका हुआ पानी कहा जा सकता है। नर्मदा के पानी में स्नान करना यहां के लोगो के लिए धार्मिक कृत्य है।
       दूसरी तरफ पानी की मोटी  धारा  सतत  बह    रही थी। अनेक रंगो की  संगमरमरी  चट्टानों के बीच हरियाली लिए हुए पानी बहते हुए देखना लाजबाब था। उसके ऊपर आसमानी प्रदूषण रहित आसमान और चारो तरफ बिखरी हुई हरियाली अद्भुत छटा बिखेर रही थी। 

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