#बाल विवाह वीभत्स रूप भाग 3
रूपम अब पहले से बहुत बदल गया था। उससे बचपना रूठ गया था। वह पश्चाताप की आग में सुलग रहा था। लेकिन उसका पश्चाताप रश्मि को जिन्दा नहीं कर सकता था । उसकी रातो की नींद उड़ चुकी थी। जागते -सोते हर समय रश्मि उसके ख्यालो में बनी रहती थी। उससे छुटकारा पाना चाहता था।उसके घर -वालो ने उसे जेल से बाहर तो निकलवा लिया था। उसके लिए उनकी सारी जमा -पूंजी स्वाहा हो गयी थी। पुत्र -मोह के कारण उन्होंने बाहर निकलवाने के सारे उपाय कर डाले थे लेकिन उनके अंदर रूपम के प्रति मोह नहीं रहा था। उसकी भौतिक जरूरते सभी पूरी की जा रही थी लेकिन उसके मन की उथल -पुथल से सभी अनभिज्ञ थे। सब अपराध बोध के कारण चुप थे। लेकिन उनके अंदर रूपम के प्रति गुस्सा उबल रहा था। जिसके कारण कोई उसके मन के दर्द को समझ नहीं पा रहा था।
रूपम अपने दर्द को कम करने के लिए गलत लोगो की संगत में पड़ गया। उनके कारण वह नशेड़ी हो गया। कुछ समय में उसके चेहरे की सारी रौनक खत्म हो गयी। उसका गोरा रंग मद्धिम हो गया। उसकी सारी सुंदरता खत्म हो गई। उसे देखकर उसकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल था।
वह अपने बेटे अरूप को कभी पिता का प्यार नहीं दे सका। संयुक्त परिवार में जैसे बच्चे पलते है वैसे ही वह बड़ा होने लगा।
रूपम ने औरत का सुख भोग लिया था। जो भले ही कम समय रहा हो लेकिन अब उसे इसकी ललक सताती थी। लेकिन उसके कारनामे के कारण उसकी शादी के बारे में परिवार का कोई सदस्य सोचना भी नहीं चाहता था।
कोई शादी के लिए रिश्ता आ भी नहीं रहा था। जबकि ऐसे में कई लड़के जिनकी पत्नी विधाता के क्रोध के कारण दुनिया से चली गई थी उनकी दूसरी शादी भी हो गई थी। ऐसे में उसे रश्मि की बहुत याद आती थी।
वह राह में जाती हुई हर लड़की को एकटक देखता रहता था। मानो आँखों ही आखो में पी जाना चाहता हो। लेकिन इस व्यवहार के कारण उसपर लफंगा का लेबल और लगने लगा था। उसकी आदिम भूख हर समय बेचैन किये रहती थी। गरीब औरतो और लड़कियों को फंसाने की कोशिश भी करता हुआ देखा गया था। लेकिन उसके जाल में कोई नहीं फंसी।
उससे किसी को हमदर्दी नहीं रही थी। वह अंदर ही अंदर घुट रहा था। देखते ही देखते उसकी शादी को बीस साल बीत गए। इतने समय में उसका बेटा अरूप भी 19 साल का हो गया था। लेकिन कोई भी उसकी शादी के बारे में सोचना नहीं चाहता था। सब उसकी पढ़ाई के बारे में सोच रहे थे। अरूप कुछ समय से गलत संगति में पड़ने लगा था। उसे किसी की सख्ती की जरूरत थी। जिसका इस घर में आभाव था।
अरूप के प्रति सभी जिम्मेदारी समझते थे। लेकिन उसका भविष्य क्या होगा अभी कहा नहीं जा सकता।
रूपम नशेड़ी होने के कारण दिन -दुनिया से बेखबर रहता था। उसकी दुनिया कल्पना लोक तक सीमित थी क्योंकि यह दुनिया उसे रास नहीं आयी थी। उसका सारा सुख खो गया था। नशे के कारण उसकी बीमारियों से लड़ने की क्षमता खत्म हो गई थी।
एक दिन उसे बुखार आया। जब तक उसकी बीमारी के प्रति लोग सजग होते वह दुनिया से कूच कर गया। उसके बारे में सोच कर दुःख होता हे। उसकी जिंदगी के मायने क्या थे। उसके जीवित रहने का मकसद क्या था। कुछ लोग बेमकसद दुनिया में रह कर सभी के दुःख का कारण बन कर चले जाते है। उसकी बेमकसद जिंदगी का कारण बाल विवाह तो नहीं था।
रश्मि और रूपम का बेटा होने का अहसास अरूप को कभी नहीं हो सका। रश्मि के मृत होने के कारण और रूपम के जीते जी लापरवाह और नशेड़ी होने के कारण अरूप कभी समझ ही नहीं सकेगा पिता का मतलब क्या होता है।
बाल विवाह का इतना भयानक रूप मैने इससे पहले कभी नहीं देखा था। अरूप को देखकर मन तड़प उठता है। बेचारे अरूप को किस गुनाह की सजा मिली थी।

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