सोनमर्ग से जोजिला पॉइंट का अद्द्भुत सफर
कश्मीर का सफर बहुत सुहाना रहा क्योंकि वहाँ पर गर्मी नहीं थी हमारे सामने हल्की -हल्की बूंदाबांदी होती रही। जिसके कारण यदि हम दिल्ली में होते तो कभी बाहर नहीं निकलते। लेकिन जब कुछ समय के लिए सपनो की दुनियाँ देखने निकले तब कैसे होटल के कमरे में बंद रह सकते थे। हमें वहां काफी ठण्ड का अहसास हो रहा था।
हमारे होटल में खुले स्थान पर खाने का इंतजाम किया जाता था। कश्मीर में जितने स्थान पर पक्का बना हुआ स्थान होता उससे कई गुना बड़ी जगह में हरियाली दिखाई देती थी जितनी जगह में यहाँ सीमित कमरे बने थे। उतनी जगह में दिल्ली में दस गुना ज्यादा कमरे बना कर दस गुणा ज्यादा फायदा उठाया जाता।
एकदम शांत और गंदगी विहीन जगह को देखकर लग रहा था मानो किसी और दुनियाँ में पहुँच गए है। पहाड़ी इलाको में बारिश के बारे में अनुमान लगाना कठिन होता है। कभी धुप कभी छाँह का चोली -दामन का साथ रहता है। इसलिए इन स्थानों पर जाते वक्त पूरी तरह से तैयार होकर निकलना चाहिए। मौसम की लुका -छिपी चलती रहती है।
धूप निकलने पर गर्म कपड़े असहनीय हो जाते है। यदि बारिश हो जाये तो केवल जैकेट की तरह के कपड़ो में ठण्ड रूकती है। स्वेटर जैसे कपड़े लगते ही नहीं शरीर पर कुछ है। ऐसे में जैकेट ऐसी होनी चाहिए जब गर्मी लगे तो उनकी बाजू निकाल कर आधी जैकेट बना सको।
बारिश होने पर स्वेटर में पानी चला जायेगा जबकि जैकेट के ऊपर पानी पड़ा रहेगा जिसे आप तौलिये से पोंछ कर सूखा सकते हो। आपको गीलेपन का अहसास नहीं होगा। साथ ही ठण्ड से बचे रहोगे।
सोनमर्ग जाते समय हमे सिंधु नदी के दर्शन हुए। इसका साफ -सुथरा पानी और उद्गम स्थल मन को लुभा रहा था। एक पतली सी धारा किस तरह विशाल नदी का रूप लेती है। इस नदी की खासियत है कि ये कश्मीर से ही पाकिस्तान चली जाती है।
बारिश में ठंड से भीगने से हम लोग डरते है कही बीमार पड़ गए तो क्या होगा लेकिन कश्मीर में लोगो को हलकी बूंदाबांदी में बिना किसी छतरी आदि के रोजमर्रा के काम करते देखा। जबकि इतनी बारिश में हमारे अंदर भीगने का होंसला नहीं था।
सोनमर्ग का हमने बहुत नाम सुना था। लेकिन वहां जाने पर केवल पहाड़ो पर सिर्फ हरियाली दिखाई दी। इतनी बारिश में हमारी इच्छा हरियाली देखते हुए बारिश में भीगने की नहीं हुई।
सोनमर्ग से जोजिला पास के लिए टेक्सी जाती है। जोजिला पॉइंट लद्दाख में आता है। वहां से पूरा सफर दुर्गम पहाड़ी चढाई का है। जहाँ का सफर करते हुए अच्छे -अच्छो की हिम्मत भी पस्त हो जाती है। इतने पतले रास्तो पर एक समय में एक गाड़ी निकल पाती है। जिसके कारण अधिकतर जाम का सामना करना पड़ता है।
इन रास्तो पर चलते हुए हमने कारगिल युद्ध में फतह की गई चोटियों के दर्शन किये। इन चोटियों को फतह करने के लिए कितने सैनिको ने अपनी जान गवाइ थी। यदि इन्हे फतह नहीं किया जाता तो लद्दाख पाकिस्तान का हिस्सा बन जाता क्योंकि इन दुर्गम पहाड़ियों के बीच अन्य रास्ता बनाना बहुत मुश्किल है। क्योंकि इन चोटियों से इस एक मात्र रास्ते पर बमबारी करके कब्जा किया जा सकता है। बिना खाने -पीने और अस्त्र -शस्त्रों के हमारे सैनिक कितने दिन सीमाओं की निगरानी कर पाते। इसलिए हमें कारगिल युद्ध में मारे गए शहीदों की क़ुरबानी नहीं भूलनी चाहिए।
जोजिला पॉइंट पर रहने की जगह नहीं है। बल्कि यहाँ गर्मी में लोग बर्फ के दर्शन करने और बर्फ के खेल खेलने आते है।हर तरफ बर्फ की सफेदी फैली हुई थी। हमने बारिश के बीच सफेदी के दर्शन किये थे। इस कारण खुला आसमान नहीं था वरना इसकी चकाचौंध में आँखे खोलनी मुश्किल हो जाती।
यहाँ पर जितने बर्फ के खेल थे उनकी शुरू में जितनी कीमत बोली जाती है उससे चौथाई कीमत में तैयार हो जाते है। इसलिए भावताव करना बहुत जरूरी है। वे हम पर्यटकों को अमीर समझने के कारण बहुत बड़ा -चढ़ा कर कीमते बोलते है। हम कितना भी मना करे पीछा नहीं छोड़ते। सारे खेल खेलने के लिए मजबूर कर देते है।
जोजिला पॉइंट पर रुकने की जगह नहीं है बल्कि सब कुछ आधे अधूरे टेंट में बना हुआ होता है। शौचालय, चाय -नाश्ते के लिए स्थान सब इन खुले हुए टेंटो में होने के कारण बहुत असुविधा होती है। यहाँ रोजगार चलाने वाले अपना समान रोज गाड़ियों में भरकर लाते और ले जाते है। कोई रात के समय नहीं रुकता। शाम के चार बजे तक सब खत्म जाता है। हमने भी वापसी की यात्रा आरम्भ कर दी।



Great post.
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