#DANGEROUS ROAD TRAVELS TO PAHALGAM

            खतरनाक रास्तो का सफर पहलगाम 

  कश्मीर में पहलगाम की यात्रा का भी आकर्षण रहता है। फिल्मो में पहलगाम के बारे में अधिकतर जिक्र होता था। जिसके कारण यहाँ आने की   चाहत थी। लगभग श्रीनगर से सौ  किलोमीटर की दूरी  तय करके हम पहलगाम पहुँचे  . वहाँ  पर खच्चरों वालो ने हमें घेर लिया। सब हमें फायदों और नुक़्सानो के बारे में बताने लगे। उन्होंने हमें सरकार का लगाया हुआ कीमतों वाला बोर्ड भी दिखाया। लेकिन उसके बाबजूद हमने भाव -ताव  करके सही पैसे लगवा लिए।
       उन्होंने हमें कई सारी  जगह दिखाने  के बारे में बताया। जिसे सुनकर लगा यहाँ  अनेक विविधताएँ  दिखाई देंगी लेकिन जब हमने वहाँ  जाकर देखा तो निराशा हाथ लगी। उन्होंने हरी  -भरी जगहों के ही अलग -अलग नाम रख कर हमे बरगलाने की कोशिश की। लेकिन हम डल  लेक में पहले ही इस तरह की धोखाधड़ी के शिकार हो चुके थे। इसलिए हमने सबसे कम पेसो वाला पैकेज लिया था। यहाँ आकर हमे कोई खास मजा नहीं आया। बल्कि यदि उन्होंने हमें इसके अनेक नाम नहीं बताये होते तो शायद हम इतने पैसो  के लिए तैयार नहीं होते।
       उन्होंने कई पॉइंट तो ऐसे दिखाए जैसे यहाँ राजा ने शिकार किया था।
      २ यहाँ से कश्मीर वेली  दिखाई  देती है।
      3 मिनी स्विट्जर्लेंड है। यह एक समतल जगह थी। जिसके अंदर एक बहुत बड़ा गुब्बारा था जिसमे बच्चे बैठ  कर मनोरंजन कर रहे थे। यह एक पार्क जैसा था जिसके चारो तरफ घुड़सवारी करने का रास्ता बना हुआ था। इस जगह को देखकर अच्छा लगा। इसमें बहुत सारे  सामान बेचने वाले घूम रहे थे।
       पहलगाम में घूमने का रास्ता बहुत खतरनाक है। आपने वैष्णोदेवी पर खच्चरों की सवारी की होगी लेकिन वहाँ  पर रास्ते  सही तरह से बने होने के कारण डर  नहीं लगता। पहलगाम में कोई सही रास्ता नहीं बना हुआ है जिसके कारण हर समय डर  लगता है कि गिर जायेंगे। एक बार भी आस -पास के माहौल को देखने की इच्छा नहीं हुई बल्कि हर समय लगता रहा सही सलामत वापिस पहुंच जाये। बारिश के कारण बहुत ज्यादा फिसलन के कारण खच्चरों के पैर फिसल रहे थे। पेड़ो की जड़े  मिट्टी  से बाहर निकल आयी थी। खच्चरों के रास्ते  में गहरे गड्डे बन गए थे। .जिसमे खच्चरों वाले के भी घुटनो तक पैर धंस जाते थे। उसके खतरनाक रास्ते  पर चलते हुए लग रहा था यदि इस भीगे हुए रास्ते  पर गिर कर कपड़े गंदे हो गए तो हमारे पास बदलने के लिए भी कुछ नहीं है। चोटों  का डर साथ ही  भयभीत कर रहा था।
       मेरे साथ खच्चर वाला था जिससे वह मुझे अगाह करता जाता था कि कब आगे झुकना है या कब पीछे होना है। लेकिन मेरे दो साथियो के साथ कोई नहीं था जिसके कारण उनकी जान हलक तक आ जाती थी।
        पहलगाम में यात्रा करने का सबसे सही तरीका चलकर जाना है। उनके अनगढ़  रास्तो पर खच्चरों से भी सुविधा नहीं होती है।
       रास्तो में मेमने लेकर बहुत सारे लोग बैठे होते है। जो जबरदस्ती हमारे घोड़े पर मेमने  लादकर  फोटो खिचवाने के लिए विवश करते है। उन्होंने इसे जबरदस्ती का व्यापार  बना दिया है। जिससे मन में कोफ़्त होती है।
       लगभग सौ  किलोमीटर की दुरी तय करके पहलगाम में हमें मजा नहीं आया।  सारा सफर धड़कने बढ़ाने वाला था। 

#A WONDERFUL JOURNEY FROM SONMARG TO JOJILA POINT

           सोनमर्ग से जोजिला पॉइंट का अद्द्भुत सफर 


   कश्मीर का सफर बहुत सुहाना रहा क्योंकि वहाँ  पर गर्मी नहीं थी हमारे सामने हल्की -हल्की बूंदाबांदी होती रही। जिसके कारण यदि हम दिल्ली में होते तो कभी बाहर नहीं निकलते। लेकिन जब कुछ समय के लिए सपनो की दुनियाँ  देखने निकले तब कैसे होटल के कमरे में बंद रह सकते थे। हमें वहां काफी ठण्ड का अहसास हो रहा था।
      हमारे होटल में खुले स्थान पर खाने का इंतजाम किया जाता था। कश्मीर में जितने स्थान पर पक्का बना हुआ स्थान होता उससे कई गुना बड़ी जगह में हरियाली दिखाई देती थी जितनी जगह में यहाँ सीमित कमरे बने थे। उतनी जगह में दिल्ली में दस गुना ज्यादा कमरे बना कर दस गुणा  ज्यादा फायदा उठाया जाता।
        एकदम शांत और गंदगी विहीन जगह को देखकर लग रहा था मानो  किसी और दुनियाँ  में पहुँच  गए है। पहाड़ी इलाको में बारिश के बारे में अनुमान लगाना कठिन होता है। कभी धुप कभी छाँह  का चोली -दामन  का साथ रहता है। इसलिए इन स्थानों पर जाते वक्त पूरी तरह से तैयार होकर निकलना चाहिए। मौसम की लुका -छिपी चलती रहती है।
       धूप निकलने पर गर्म कपड़े असहनीय हो जाते है। यदि बारिश  हो जाये  तो केवल जैकेट की तरह के कपड़ो में ठण्ड रूकती है। स्वेटर जैसे कपड़े लगते ही नहीं शरीर पर कुछ है। ऐसे में जैकेट ऐसी होनी चाहिए जब गर्मी लगे तो उनकी बाजू निकाल कर आधी जैकेट बना सको।
      बारिश होने पर स्वेटर में पानी चला जायेगा जबकि जैकेट के ऊपर पानी पड़ा रहेगा जिसे आप तौलिये  से पोंछ  कर सूखा सकते हो। आपको गीलेपन का अहसास नहीं होगा। साथ ही ठण्ड से बचे रहोगे।
     सोनमर्ग जाते समय हमे सिंधु नदी के दर्शन हुए। इसका साफ -सुथरा पानी और उद्गम स्थल मन को लुभा रहा था। एक पतली सी धारा  किस तरह विशाल नदी का रूप लेती  है। इस नदी की खासियत है कि ये कश्मीर से ही पाकिस्तान चली जाती है।
        बारिश में ठंड से  भीगने  से हम लोग डरते है कही बीमार पड़  गए तो क्या होगा लेकिन कश्मीर में लोगो को हलकी बूंदाबांदी में बिना किसी छतरी आदि के रोजमर्रा के काम करते देखा। जबकि इतनी बारिश में हमारे अंदर भीगने का होंसला नहीं था।
      सोनमर्ग का हमने बहुत नाम सुना था। लेकिन वहां जाने पर केवल पहाड़ो पर सिर्फ हरियाली दिखाई दी। इतनी बारिश में हमारी इच्छा हरियाली देखते हुए बारिश में  भीगने की नहीं हुई।
       सोनमर्ग से जोजिला पास के लिए टेक्सी जाती है। जोजिला पॉइंट लद्दाख में आता  है। वहां से पूरा सफर दुर्गम  पहाड़ी चढाई का  है। जहाँ  का सफर करते हुए अच्छे -अच्छो  की हिम्मत भी पस्त  हो जाती है।  इतने  पतले  रास्तो पर एक समय में एक गाड़ी निकल पाती  है। जिसके कारण अधिकतर जाम  का सामना करना पड़ता है।
     इन रास्तो पर चलते हुए हमने कारगिल युद्ध में फतह की गई चोटियों के दर्शन किये। इन चोटियों को फतह करने के लिए कितने सैनिको  ने अपनी जान गवाइ  थी। यदि इन्हे फतह नहीं किया जाता तो लद्दाख पाकिस्तान का हिस्सा बन जाता क्योंकि इन दुर्गम पहाड़ियों के बीच  अन्य रास्ता बनाना बहुत मुश्किल है। क्योंकि इन चोटियों से इस एक मात्र रास्ते पर बमबारी करके  कब्जा किया जा सकता  है। बिना खाने -पीने  और अस्त्र -शस्त्रों के हमारे सैनिक कितने दिन सीमाओं की निगरानी कर पाते। इसलिए हमें कारगिल युद्ध में मारे  गए शहीदों की क़ुरबानी नहीं भूलनी चाहिए।
          जोजिला पॉइंट पर रहने की जगह नहीं है। बल्कि यहाँ गर्मी में लोग बर्फ के दर्शन करने और बर्फ के खेल खेलने  आते  है।हर तरफ बर्फ की सफेदी फैली हुई थी। हमने बारिश के बीच  सफेदी के दर्शन किये थे। इस कारण खुला आसमान नहीं था वरना इसकी चकाचौंध में आँखे खोलनी मुश्किल हो जाती।
        यहाँ पर जितने बर्फ के खेल थे  उनकी शुरू  में    जितनी कीमत बोली जाती है उससे चौथाई कीमत में तैयार हो जाते है। इसलिए भावताव करना बहुत जरूरी है। वे हम पर्यटकों को अमीर  समझने के कारण बहुत बड़ा -चढ़ा कर कीमते बोलते है। हम कितना भी मना  करे पीछा नहीं छोड़ते। सारे  खेल खेलने के लिए मजबूर कर देते है।
     जोजिला पॉइंट पर रुकने की जगह नहीं है बल्कि सब कुछ आधे अधूरे टेंट में बना हुआ होता है। शौचालय, चाय -नाश्ते के लिए स्थान सब इन खुले हुए टेंटो में होने के कारण बहुत असुविधा होती है। यहाँ रोजगार चलाने  वाले अपना समान रोज गाड़ियों में भरकर लाते और ले जाते है। कोई रात  के समय नहीं रुकता।  शाम के चार बजे तक सब खत्म जाता है।  हमने भी वापसी की यात्रा आरम्भ कर दी। 

#HAPHAZARD FORM OF CHILD MARRIAGE PART 3

              #बाल विवाह  वीभत्स रूप भाग 3 

   रूपम अब पहले से बहुत बदल गया था। उससे बचपना रूठ  गया था। वह पश्चाताप  की आग में सुलग रहा था। लेकिन उसका पश्चाताप रश्मि को जिन्दा नहीं कर सकता था । उसकी रातो की नींद उड़ चुकी थी। जागते -सोते हर समय रश्मि उसके ख्यालो में बनी रहती थी। उससे छुटकारा पाना चाहता था।
        उसके घर -वालो ने उसे जेल से बाहर तो निकलवा लिया था। उसके लिए उनकी सारी  जमा -पूंजी स्वाहा हो गयी थी। पुत्र -मोह के कारण उन्होंने बाहर निकलवाने के सारे  उपाय कर डाले  थे लेकिन उनके अंदर रूपम के प्रति मोह नहीं रहा था। उसकी भौतिक जरूरते सभी पूरी की जा रही थी लेकिन उसके मन की उथल -पुथल से सभी अनभिज्ञ थे। सब अपराध बोध के कारण चुप थे। लेकिन उनके अंदर रूपम के प्रति गुस्सा उबल रहा था। जिसके कारण कोई उसके मन के दर्द को समझ नहीं पा रहा था।
           रूपम अपने दर्द को कम करने के लिए गलत लोगो की संगत में पड़  गया। उनके कारण वह नशेड़ी हो गया। कुछ समय में उसके चेहरे की सारी रौनक खत्म हो गयी। उसका गोरा रंग मद्धिम हो गया। उसकी सारी  सुंदरता खत्म हो गई। उसे देखकर उसकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल था।
         वह अपने बेटे अरूप को कभी पिता का प्यार नहीं दे सका। संयुक्त परिवार में जैसे बच्चे पलते है  वैसे ही वह बड़ा होने लगा।
        रूपम ने औरत  का सुख भोग लिया था। जो भले ही कम समय रहा हो लेकिन अब उसे इसकी ललक सताती थी। लेकिन उसके कारनामे के कारण उसकी शादी के बारे में परिवार का कोई सदस्य सोचना  भी नहीं चाहता था।
         कोई शादी के लिए रिश्ता आ भी नहीं रहा था। जबकि ऐसे में कई लड़के जिनकी पत्नी विधाता के  क्रोध के कारण दुनिया से चली गई थी उनकी दूसरी शादी भी हो गई थी। ऐसे में उसे रश्मि की बहुत याद आती थी।
         वह राह में जाती हुई हर लड़की को एकटक देखता रहता था। मानो आँखों ही आखो में पी  जाना चाहता हो। लेकिन इस व्यवहार के कारण उसपर लफंगा का लेबल और लगने लगा था। उसकी आदिम भूख हर समय बेचैन  किये रहती थी। गरीब  औरतो और लड़कियों को फंसाने  की कोशिश भी करता हुआ देखा गया था। लेकिन उसके जाल में कोई नहीं फंसी।
        उससे किसी को हमदर्दी नहीं रही थी। वह अंदर ही अंदर घुट रहा था। देखते ही देखते उसकी शादी को बीस साल बीत  गए। इतने समय में उसका बेटा  अरूप भी 19  साल का हो गया था। लेकिन कोई भी उसकी शादी के बारे में सोचना नहीं चाहता था। सब उसकी पढ़ाई  के बारे में सोच रहे थे। अरूप कुछ समय से गलत संगति में पड़ने लगा था। उसे किसी की सख्ती की जरूरत थी। जिसका इस घर में आभाव था।
      अरूप के प्रति सभी जिम्मेदारी समझते थे। लेकिन उसका भविष्य क्या होगा अभी कहा नहीं जा सकता।
   रूपम नशेड़ी होने के कारण दिन -दुनिया से बेखबर रहता था। उसकी दुनिया कल्पना लोक तक सीमित  थी क्योंकि यह दुनिया उसे रास नहीं आयी थी। उसका सारा सुख खो गया था। नशे के कारण उसकी बीमारियों से लड़ने की क्षमता खत्म हो गई थी।
     एक दिन उसे बुखार आया। जब तक उसकी बीमारी के प्रति लोग सजग होते वह दुनिया से कूच  कर गया।       उसके बारे में सोच कर दुःख होता हे। उसकी जिंदगी के मायने क्या थे। उसके जीवित रहने का मकसद क्या था। कुछ लोग बेमकसद दुनिया में रह कर सभी के दुःख का कारण बन कर चले जाते है। उसकी बेमकसद जिंदगी का कारण बाल विवाह तो नहीं था।
     रश्मि और रूपम का बेटा  होने का अहसास अरूप को कभी नहीं हो सका। रश्मि के मृत होने के कारण और रूपम के  जीते जी लापरवाह और नशेड़ी  होने के कारण  अरूप कभी समझ ही नहीं सकेगा पिता का मतलब क्या होता है।
       बाल विवाह का इतना भयानक रूप मैने  इससे पहले कभी नहीं देखा था। अरूप को देखकर मन तड़प उठता है। बेचारे अरूप को किस गुनाह की सजा मिली थी। 

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...