#HAPHAZARD FORM OF CHILD MARRIAGE

                    बालविवाह का वीभत्स रूप  


 बालविवाह के कारण कुछ लोगो की जिंदगी बुरी तरह बर्बाद हो जाती है। उसका उदाहरण मेरे पड़ोस में रहने वाले रूपम की जिंदगी है। गुस्से और नासमझी के   कारण उसने छोटी उम्र में सब कुछ खो दिया। बाकी  जीवन प्रायश्चित स्वरूप बीत  गई।
         मेरे पड़ोस में  रहने वाले विनोद के   लिए बहुत सुंदर लड़की का रिश्ता आया। जब घर  के लोग लड़की देखने गए उन्हें वह  लड़की बहुत पसंद आयी।  उन्हें छोटी बहन जो उस समय केवल 15  साल की थी।  वह भी पसंद आ गयी। उन्होंने लड़की वालो से उसका रिश्ता भी छोटे भाई रूपम के लिए मांग लिया। उस समय रूपम की उम्र मुश्किल से 18  साल की थी। उन लोगो ने रूपम से पसंद -नापसंद पूछना जरूरी नहीं समझा।
        विनोद की शादी, समय आने पर धूमधाम से हुई सारे  रीति -रिवाज पूरे  किये गए। विनोद शादी की ख़ुशी से सराबोर था। लेकिन रूपम आखिरी समय तक अपनी शादी का विरोध करता रहा। लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। वह   गुस्से में  किसी तरह के रीति -रिवाज  करवाने के लिए तैयार नहीं हुआ। सिर्फ सारे  रस्मो -रिवाज विनोद के हुए।
        मैंने  शादी के समय रूपम की हठधर्मी देखी  थी। जिसे देखकर लग रहा था कि  शादी के समय हमारे समाज में लड़के की भी कोई नहीं सुनता।
      सगा  भाई होने के कारण रूपम शादी में शामिल हुआ।  उसका बस चलता तो बाराती बनकर भी नहीं जाता। उसका बेबस और मुरझाया चेहरा मुझे द्रवित कर रहा था। उसकी बेबसी मुझे बेचैन कर रही थी।
      अगले दिन विनोद की बहू  आयी तब मैने  देखा रूपम की बहू रश्मि   भी उसके साथ है। उसकी मुँह दिखाई करने गई तब उसकी सुंदरता देखकर अवाक् रह गई। वह बड़ी से भी ज्यादा सुंदर थी।
           दोनों बहने चार दिन ससुराल में रहकर  मायके चली गई। उन्होने  एक महीने बाद बड़ी बहन रमा  को भेज दिया छोटी बहनरश्मि  को नहीं भेजा  . उन्होंने उसका गौना  कुछ साल बाद करने के लिए कहा। रूपम के परिवार वालो ने इसका विरोध नहीं किया। क्योंकि उन दोनों की उम्र छोटी थी।
        चार दिन साथ रहने के  परिणामस्वरूप  रश्मि गर्भवती हो गई।  जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी जबकि विनोद की पत्नी रमा  के गर्भवती होने के कोई आसार  नहीं थे।
      नासमझ रूपम का सभी अनेक तरह से मजाक बनाने  लगे। उस मजाक से वह खिसियाया रहता। उसका गुस्सा सातवे आसमान में चढ़ा रहता। रश्मि शादी के बाद  केवल दो बार ससुराल आयी थी। उसके बाद बच्चे होने के समय उसका ससुराल में पदार्पण हुआ।
       नौ  महीने के बाद रश्मि ने एक सुंदर और स्वस्थ बेटे  को जन्म दिया।हर तरफ खुशियाँ  मनाई जा रही थी। जिस घर में एक साल के अंदर दोहरी ख़ुशी आ गई हो उसकी खुशियों का क्या ठिकाना।
        रूपम के दोस्त उसकी खिल्ली उड़ा  रहे थे। जिसका सामना नासमझ रूपम नहीं कर पा  रहा था। वह हर समय गुस्से में भरा रहता।उसकी झल्लाहट से सब बेपरवाह थे। 19  साल के रूपम को बेटे का जन्म कोई ख़ुशी नहीं दे रहा  था । उसकी पढ़ाई  भी पूरी नहीं हो सकी थी। उस पर रोजगार मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी। अब तक घर के बड़े उसका खर्चा उठा रहे थे। उसपर रूपम का अब पूरा परिवार हो गया था। उसकी खीझ और तिलमिलाहट उसके चेहरे से साफ झलकती थी। खुशियों के माहौल में रूपम की बेबसी को समझने का किसी ने प्रयास नहीं किया।
      रूपम अपना गुस्सा किसपर निकालता। कोई उसे समझ नहीं पा रहा था।जब  रात  में  रूपम अपने कमरे में गया तब उसका रश्मि से झगड़ा हो गया। वह गुस्से में भरा हुआ था। विरोधस्वरूप कमजोर और लाचार रश्मि के शब्द उसे सहन नहीं हुए।
      रूपम को अपनी मर्दाना ताकत का अंदाजा नहीं था। उसने गुस्से में उसकी गर्दन पर अपने हाथ रख दिए उसकी गिरफ्त कब बढ़ती चली गई उसे इसका अंदाजा नहीं हुआ। कुछ ही समय में रश्मि की  निर्जीव देह उसकी बाहों  में झूल गई तब उसके होश फाख्ता हो गए। उसे रश्मि के धरती से कुच  कर जाने का कोई अंदाजा नहीं था।
        रूपम हड़बड़ाता और  घबराया हुआ  अपने कमरे से बाहर आया। उसने चिल्ला कर सबको इकट्ठा कर लिया। उसके सोचने -समझने की शक्ति खत्म हो गई थी। उसे समझ नहीं आ रहा था ये क्या हो गया। इसकी उसने उम्मीद नहीं की थी।
      परिवार के सभी बड़े इकट्ठे हुए ऐसे माहौल का सामना कैसे किया जाये किसी को समझ नहीं आ रहा था। रश्मि के मायके वालो को मृत्यु का समाचार देने कौन  जाये। किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी।
       रश्मि की बड़ी बहन रमा  उस  के शब  के पास बैठी बिलख रही थी। जिस बहन के साथ खेल -कूद कर बड़ी हुई उसकी मौत का सदमा उसकी बर्दास्त के बाहर था।रश्मि का बेटा  भूख के मारे  चिल्ला रहा था। उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। चिल्ला -चिल्ला कर एक हफ्ते का अरूप बेदम हुआ जा रहा था।
      इसका अगला भाग जल्दी आएगा।
       


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