#panoramic edges of the lake kancheria and sabarmati river

      काँकरिया  झील और साबरमती  का मनोरम किनारा 




   अहमदाबाद में बहुत ज्यादा गर्मी का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में लोग ठंडी जगह पर समय  बि- ताना  पसंद करते है। मोदी जी के समय में अहमदाबाद में दो स्त्थान बहुत ज्यादा अच्छे बनाये गए है।
       उसमे एक साबरमती रिवर फ्रंट जिसकी देश विदेश में धूम है।  किसी नदी के किनारे इस तरह का पिकनिक स्पॉट इससे पहले कभी नहीं देखा था। यह पहला नदी का किनारा है जिसके दोनों तरफ सीमेंटेड पक्का किनारा है। कई सारी  बैठने की व्यवस्था की गई है। पेड़ -भी लगाए गए है। जिसकी छाया और ताजी  हवा सकून  देती है.
       दूसरा कांकरिया झील। इन्हे  पिकनिक स्पॉट के तौर  पर विकसित किया गया है।
        कांकरिया नाम सुनकर मेरा वहाँ  जाने का मन नहीं था। क्योंकि इसका मतलब मेरी समझ से बाहर था। फिर भी बेमन से यहाँ  गयी। अंदर जाने के लिए छह रूपये की टिकट लगती है। अंदर जाते ही मेरी आंखे खुली रह गयी। यहाँ  पर मन को लुभाने वाले सारे  तरीके  इस्तेमाल किये गए थे। बच्चो से लेकर बड़ो को अच्छे लगने वाले सारे  झूले लगे हुए थे।
        यहाँ टॉय  ट्रेन के द्वारा पूरी झील  को हर तरफ से देखा जा सकता है मुझे बहुत दुःख था क्योंकि  मै  अपने पैरो  से पूरी झील के चककर  नहीं लगा सकी  क्योंकि यह झील बहुत बड़ी जगह मै  फैली है।  मुझे लग रहा था इस ट्रेन में बच्चे बैठते है  .लेकिन मेने बड़ो को भी इसमें बैठे देखा था। यदि आपको वहाँ जाने का मौका मिले तब इस ट्रेन में सफर जरूर करना। इसे तभी हर कोने से देख सकोगे।
          हरियाली और झील की ठंडी हवा  हमे वहाँ बैठे रहने के लिए मजबूर कर रही थी। पेड़ो की छाव के नीचे  बेंचे बनाई गई है। जिसके कारण भरी दोपहरी में भी बैठा जा सकता है।  अनेको स्थानों पर बैठने का इंतजाम किया गया है। बेंचेस या घास जहाँ  मन चाहे बैठा जा सकता है।
           कांकरिया झील के चारो तरफ खाने -पीने  के सामान की बहुतायत है। पूरे भारत का सामान यहाँ उपलब्ध है। यहाँ की लोकल चीजों जैसे  आइसक्रीम का स्वाद भी बहुत अच्छा है। कांकरिया झील में वोटिंग भी की जाती है।   रात  के समय रौशनी की विशेष व्यवस्था की जाती है।
       मैने पहली बार मुस्लिम समुदाय के लोगो को पिकनिक मानते हुए शाम के समय इतनी अधिक संख्या में इससे पहले कही  नहीं देखा था।
 यहाँ के मुस्लिम लोग पिछड़े हुए कम लग रहे थे वरना  जब शाम के समय खाना बनाने का समय होता है  मुस्लिम औरते  पिकनिक स्पॉट पर बच्चो के साथ घूमती हुई कभी किसी अन्य शहर में दिखाई नहीं दी। मुझे हमेशा लगता था। मुस्लिम समुदाय के लोग औरतो  को केवल घर की जिम्मेदारी तक सीमित  रखते है। उन्हें मौज -मस्ती भरा  जीवन जीने का अधिकार नहीं होता।
       मेने केवल गुजरात में बहुत सारी जगहों पर सफेद दागो  वाले लोगो को पिकनिक स्पॉट पर घूमते देखा। जबकि दिल्ली जैसी जगहों पर इस तरह के बहुत कम  लोग दिखाई देते है। उनका आत्मविश्वास देखने लायक था।
      कांकरिया झील के एक द्वार से चिड़ियाघर में भी प्रवेश किया जा सकता है। यहाँ जाने के चार द्वार है। आप अपनी  इच्छा मुताबिक किसी भी जगह से अंदर जा सकते है। हर स्थान पर आपको अपनी इच्छानुसार सारी  सुविधाएं मिल जाएँगी।
       कांकरिया झील का नाम इस जगह पर बहुतायत से पाए जाने वाले कंकर के कारण पड़ा था। अब आपको कांकरिया नाम सुनकर हताशा नहीं होगी जैसी मुझे हुई थी इसलिए आप इस जगह के लिए कई सारे  घंटे बचा कर रखना।  आपको यहाँ  आने के बाद घर जाने की जल्दी नहीं होगी। यहाँ  पर कम बजट के लोग भी  ख़ुशी हासिल कर सकते है।


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