#BETWEEN THE ANIMALS IN THE FOREST OF GIR

             गिर  के जंगलो में जानवरो के बीच 

           
   

    गुजरात जाकर उस  की शान बब्बर शेर को न देखो ऐसा कैसे  हो सकता। सोमनाथ से दो घंटे की दूरी  पर गिर के जंगल शुरू हो जाते है। सोमनाथ  केवल एक दिन में पूरा नगर  देखा जा सकता है। जब हमने  पूरा दिन शेष बचा पाया तब हम गिर के जंगलो में शेर की तलाश में निकल पड़े।
         हमें होटल वालो ने आने और जाने के लिए टेक्सी  मुहैया करा दी। टैक्सी में गुजरात की सड़के देखते -देखते मुझे कब  नींद आ गई पता नहीं चला ।गुजरात में फरवरी के महीने में पारा ४०  डिग्री को छू रहा था। इस कारण  गिर के जंगलो में पहुँचकर  ही मेरी आंख खुली। दोपहर में  कुछ समय के लिए गिर में पर्यटकों के आने पर विराम    है। सुबह और  दोपहर तीन बजे के आस -पास पर्यटकों को  जंगल में प्रवेश दिया जाता है। छुट्टी के दिन वहाँ बहुत सारे  लोग आये  हुए थे। उन्हें देखकर लगता था लोगो के लिए गर्मी और त्यौहार कोई मायने नहीं रखता बल्कि हर स्थिति में लोग मंगल मनाने  में लगे रहते है।
           जंगल में जहॉ हम पहुँचे वहाँ हरा -भरा जंगल था। उस जगह की विशेष देखभाल की जाती है। वहाँ जाकर पता चला। जंगल घूमने  के लिए  टैक्सी और बस से सफर किया जा सकता है। लेकिन टैक्सी की बुकिंग दो  महीने पहले करनी पड़ती है। हम टैक्सी से सफर नहीं कर सकते। पहले तो हमे बहुत दुःख हुआ लेकिन जब पता चला  बस के द्वारा हम जंगल की सैर  कर सकते है। हमारी जान में जान आयी।
      हमारे पहुंचने के कुछ समय बाद ही टिकट खिड़की खुल गई और हमे टिकट मिल गई। उस  टिकट की कीमत  केवल   150  रूपये थी जो हमारे बजट में आती थी। टिकट के मिलते ही घोषणा सुनाई दी कि  इस बस  के यात्री बैठ  जाये वरना उन्हें दूसरी बस में जाने का मौका नहीं दिया जायेगा। सब कुछ कम्प्यूटराइज्ड था। हम शीघ्रता से बस में बैठ गए।
     मन में जिज्ञासा और घबराहट दोनों का मिलाजुला मिश्रण था। मैने इससे पहले बहुत सारी फिल्मे देखी थी जिसमे जंगली जानवर आक्रमण करके लोगो को मौत के घाट उतार देते थे। मन में डर समाया हुआ था। हमे
मिनी बस में सफर करने के लिए कहा  गया।
         वह  बस साधारण थी उसकी खिड़कियाँ भी आम बसों के  समान खुली हुई थी।  मुख्य जंगल सूखा हुआ था वहाँ हरियाली नहीं थी लेकिन उन सूखे हुए जंगल में जानवर आराम फरमा रहे थे। हमें जंगल घूमते हुए गुड़खर ,नीलगाय ,हिरण,सियार आदि  अनेक जानवर दिखाई दिए। वे छाया की  तलाश में घूम रहे थे।
       हम जैसे यात्री जंगल में जानवरो को तलाश नहीं कर पाते। हमारा ड्राइवर जानवरो को देखकर गाड़ी रोक देता जिससे हमें जानवर होने का अहसास हो जाता। सभी यात्री जानवर की तलाश करने लगते। जैसे जानवर फिल्मो या चित्रों में दिखाई देते है। जंगल में जानवर इतने रंगबिरंगे और साफ -सुथरे नहीं होते बल्कि वे जंगल के रंग में ही मिल जाते है। जानकार लोग ही उन्हें सही ढंग से ढूंढ पाते  है।
      जानवरो के लिए बसे और इंसान देखना आम लग रहा था। उनमे बसों को देखकर किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं थी.
        बब्बरशेर  के बिलकुल पास ले जाकर ड्राइवर ने बस  रोक दी। उसने इस समय केवल शोर मचाने से मना किया। क्योंकि शेर को इतने पास देखकर सभी रोमांचित हो उठे थे। यदि वह हमें पहले से चेतावनी नहीं देता तो सभी एक दम जोश में भर कर उनके आराम में खलल डाल  देते।
        मेने इतने पास से शेर को देखने के बारे में सोचा नहीं था। एक पेड़ की छाया में दो शेर आराम फरमा रहे थे। मेने इससे पहले सुना था एक जंगल में दो शेर नहीं रह सकते लेकिन पहली बार एक साथ एक पेड़ की छाया तले दो शेरो को देखकर दंग  रह गई।
         उनके अयाल  भूरे और काले  रंग के थे। उन्हें देखकर समझ नहीं आ रहा था ये बूढ़े  है  या जवान। उनके बाल देखकर लग रहा था मानो  प्रौढ़ावस्था को पहुंचे हुए खिचड़ी बालो वाले शेर है उनके अंदर सारा जोश खत्म हो चूका है।  उनके साथ कोई शेरनी नहीं थी। वे केवल दो शेर थे।
      एक अलग स्थान पर आराम -फरमाती शेरनी दिखाई दी। उसके साथ कोई झुण्ड यानि बच्चे या अन्य शेरनियाँ नहीं थी।
       एक बहुत बड़ी चारदीवारी के बीच  में चीता  दिखाई दिया। इसे देखकर हमें और ज्यादा हैरानी हुई। क्योंकि शेर खुले में थे जबकि चीते को चारदीवारी के बीच  रखा गया था। चीता  एकाकी प्राणी है  वह  परिवार के साथ था  जबकि झुण्ड में रहने वाले प्राणियों को अकेले -अकेले देखा। जिंदगी के अजूबे बाहर निकल कर दिखाई देते है।
       इन  सब में डूबे  हुए हमें पता ही नहीं चला कैसे समय पूरा हो गया। इन दृश्यों को देखने से अभी मन नहीं भरा था। यहाँ आने का समय निश्चित है आप अधिक समय तक यहाँ नहीं ठहर सकते क्योंकि जंगल में रात  के समय अँधेरा हो जाता है। रौशनी का प्रबंध जानवरो के कारण नहीं किया गया है बल्कि जंगल में अँधेरा रहता है इसलिए प्राकृतिक रौशनी में जंगल की सैर  करवाई जाती है।
       जंगल से बाहर आने के रास्ते  में भी रौशनी का प्रबंध नहीं किया गया है। इसलिए जल्दी निकल कर यहां सैर  करना उचित रहेगा आपके रास्ते में किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। क्योंकि मुख्य सड़क तक आने के लिए कमसकम आपको आधे घंटे का सफर जंगली रास्ते से तय करना पड़ेगा।
       इतनी अधिक गर्मी में घूमते हुए हमें गर्मी का अहसास नहीं हुआ। लेकिन बस से   उतरते ही सभी लोग आइसक्रीम की दुकान पर जा खड़े हुए।
       गुजरात की सड़के बहुत छोड़ी और साफ -सुथरी है। उनपर सफर करना आराम -दायक होता है। 

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