शांत समुद्री किनारे पर सोमनाथ तीर्थ
सोमनाथ गुजरात में समुद्र के किनारे बसा हुआ है। यहाँ की आबादी बहुत कम है। यहाँ पर छोटे पानी के जहाज बनते है। इस जगह पर रुके हुए पानी की गंध फैली रहती है। लकड़ी के बड़े -बड़े जहाज बनते दिखाई देते है।
इसे देखकर लगता है मोह्हमद गजनी ने इसे इतनी बार लूट कर इसकी भव्यता और गरिमा को कम करने की कितनी बार कोशिश की लेकिन यह आज भी सिर ऊँचा करके खड़ा है।
सोमनाथ भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है। इस जगह की भव्यता देखते ही बनती है। अदभूत वास्तुकला ,हरियाली और समुद्री किनारे को निहारना मन को भाता है। सोमनाथ मंदिर में जाते समय आपका मोबाईल ,बेल्ट और सभी तरह के बैग बाहर ही जमा करवा लिए जाते है। इसकी सुरक्षा का विशेष इंतजाम किया गया है।
मेने ठन्डे पेण्ट के बारे में सुना था लेकिन इसका प्रयोग केवल गुजरात में होते देखा। यदि आप किसी मंदिर में जाओ तब गर्म फर्श की तपन से बचने के लिए कुछ पट्टियां सी बिछा दी जाती है और कही उन्हें ठंडा रखने के लिए उनपर पानी का छिड़काव भी कर दिया जाता है लेकिन वे पट्टियां भी धुप से गर्म होती है। उनपर चलते हुए लगता है जैसे उबलते पानी में पैर चला गया है लेकिन ठन्डे पेंट की लाइनों पर चलते हुए तपिश महसूस नहीं हुई जबकि थोड़ा पैर इधर या उधर करते ही गर्मी का अहसास हो जाता था।
सोमनाथ मंदिर में पूरे दिन दर्शन सुलभ है ,यहाँ दिन में तीन समय भव्य आरती का आयोजन किया जाता है पुराने समय में आरती के समय देवदासी नृत्य प्रस्तुत करके इसकी भव्यता बढ़ाती थी। अब देवदासियों के आभाव में इसके प्रभाव में कोई कमी दिखाई नहीं देती।
इसमें आरती को भव्य रूप देने के लिए महंगे साउंड सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। शिवलिंग के चारो तरफ सुनहरी ( सोने के रंग ) सजाया हुआ मंदिर आँखों को चकाचोंध कर देता है। उसकी दिव्यता सोचने पर मजबूर कर देती है। हम इसी दुनिया में है या कही दुनिया बदल गयी है। आरती लाइन में लगकर देखी जा सकती है। लाइन में लगकर जब तक में उसे देख सकती थी देखी उसके बाद जब मुझे बाहर जाने के लिए कहा गया तो मै उसे देखने का प्रलोभन छुपा नहीं सकी। लाइन में से निकल जाने के बाद भी एक कोना ढूंढ कर पूरी आरती का रसास्वादन लेने से नहीं चुकी।
हम रात 7 बजे की आरती में शामिल हुए थे। बाहर निकलने पर अँधेरा छाया हुआ था लेकिन ठंडी हवा चल रही थी। मंदिर की भव्यता और ठंडक वहाँ से उठने नहीं दे रही थी।
यहाँ हर मंदिर में औरतो और मर्दो की अलग लाइन होती है। कुछ समय बाद मेरे साथी ने आकर पूछा लाइट और साउंड कार्यक्रम देखना है। मुझे उसे देखने की इच्छा प्रबल हो उठी।
मंदिर के पास ही बहुत सारी बैठने के लिए पत्थर की सीटे बनी हुई थी जिनपर एक साथ लगभग पांच सौ लोग बैठ सकते थे। मंदिर में नहीं लग रहा था इतने अधिक लोग आये है लेकिन इस कार्यक्रम के समय सारी सीट भर गयी थी। .
सोमनाथ में बहुत गर्मी रहती है लेकिन इस मंदिर में गर्मी का बिलकुल अहसास नहीं हुआ। इस मंदिर के चारो और गलियारा बना हुआ है जिसके ऊपर शेड बने हुए है जहां से समुद्र को निहारा जा सकता है। उसे देखते हुए कितना समय व्यतीत हो गया पता नहीं चला .
गलियारे में चलते हुए कब मुख्य द्वार आ गया अहसास नहीं हुआ। इस गलियारे में आगे चलकर शिवजी के सभी ज्योतिर्लिंगों से सम्बन्धित तस्वीरें बनी हुई है इसके आलावा विस्तार से लिखा हुआ है। इसे नया सोमनाथ कहा जाता है।
इसके पास ही पुराना सोमनाथ मंदिर बना हुआ है। वह केवल एक मंदिर का अहसास कराता है यहाँ पर मांगने के लिए अनेक पुजारी और भिखारी बैठे हुए है। उनका मांगने का तरीका मन में खीझ पैदा करता है।
सोमनाथ मंदिर से एक रास्ता समुद्र तक जाता है। इस रास्ते के दोनों ओर दुकाने बनी हुई है। यहां पर आप खरीदारी कर सकते हे। अनेक नारियल पानी की दुकाने खुली हुई है जहाँ बैठ कर नारियल पानी पीते हुए समुद्र का नजारा देख सकते है।
समुद्री किनारे पर कुछ लोग स्नान कर रहे थे तो कुछ हमारी तरह उन्हें देख कर लुत्फ उठा रहे थे। समुद्र में क्रीड़ा करने वाले कम थे लेकिन किनारे पर घोड़े और ऊँट की सवारी करने वाले बहुत थे।
ऊंट की सवारी के समय जब वह खड़ा होता है या बैठता है तो पूरी तरह झुक जाता है यदि कस कर पकड़ा न हो तो बहुत बुरी तरह मुँह के बल गिरने का डर रहता है। ऊंट बहुत ज्यादा हिलता है जिसके कारण उस पर पूरे समय ढंग से कस कर बैठना जरूरी होता है।
इस हिन्दू तीर्थ के समुद्री किनारे पर भिन्न समुदाय के लोगो को देखकर हैरानी हो रही थी। हम यहाँ बड़ी होली वाले दिन गए थे लेकिन शिवजी का तीर्थ होने के कारण होली का अहसास ही नहीं हुआ। हर तरफ शिवजी की छाया फैली दिखाई दे रही थी।
यहाँ के खाने में आपको दिल्ली का स्वाद मिल जाता है। दुकानदारों से कारण पूछने पर उन्होंने कहा -यहाँ केवल गुजराती ही नहीं पूरे भारत से लोग आते है। इसलिए हम हर तरह के यात्रियों के लिए खाना बनाते है। मेरा दक्षिण भारत से आये लोगो से भी सामना हुआ।
सोमनाथ बहुत छोटी जगह में बसा हुआ है। यहाँ एक दिन में सभी जगहो को देखा जा सकता है। यदि शांति की तलाश में आये तो बेहद शांत जगह है। इसके रेलवे स्टेशन पर केवल चार गाड़ियां शाम के समय आती है। बाकी समय रेलवे स्टेशन खाली और सुनसान रहता है। अधिकतर लोग बस से दूसरे शहरों में जाते है।
हर तरफ ऑटो घूमते दिखाई देते है। लगभग कुछ घंटो में सारे दर्शनीय स्थान देखे जा सकते है। लेकिन यहाँ के लोग बहुत मिलनसार है। उनमे चालाकी नहीं है। जो आज के समय में मन को मोह लेती है।


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