आधुनिकता के बीच नोएडा का दलित स्मारक पार्क
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के द्वारा बनबाया हुआ दलित समारक पार्क देखने में बहुत अच्छा है। इसका बृहद स्वरूप मन को भाता है। इसके पांच द्वार बने है लेकिन अंदर जाने की इजाजत केवल पांचवे नंबर के द्वार से है। इसके अंदर जाने का शुल्क मात्र 15 रु है। जो इसकी भव्यता के सामने नगण्य है। इसमें प्रवेश करते ही बहुत सुंदर पक्का फर्श बना है। जिसपर बहुत सारे लोग घूम रहे थे। इस पर चलते हुए मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। चलते हुए थक जाने पर अनेक स्थानों पर स्टील की बेंचेस लगी हुई थी। जिनपर अनेक लोग बैठे हुए थे।एक समूह यहाँ पर पिकनिक मनाने आया हुआ था। वे लोग घर से बैठने का समान साथ लाये हुए थे। उनके पास घर से लाया हुआ खाने का समान था। उन्हें देखकर लग रहा था लगभग 30 लोगो की पार्टी करने की अच्छी जगह है। यहाँ पर खाने का सामान नहीं मिलता जबकि अनेक स्थानों पर केंटीन लिखा जरूर हुआ है। हम केंटीन ढूंढने के लिए 2 द्वार आगे तक गए लेकिन हमे निराशा हाथ लगी। बाहर भी खाने का सामान बेचने के लिए एक दो खोमचे वाले खड़े दिखाई दिए।
द्वार से हमे दोनों तरफ विशाल फव्वारे दिखाई दे रहे थे । जिसका बृहद आकर हमे अपनी तरफ खींच रहा था। लेकिन रास्ते में बने हुए विशाल हाथी वही रुकने पर मजबूर कर रहे थे। इनकी संख्या 20 है। ये द्वार के दोनों और हमारा स्वागत करते प्रतीत हो रहे थे। उनके बीच से चलते हुए हम फव्वारे तक पहुंचे। ये कांस्य का बना हुआ अपनी विशालता में अद्भुत था। यहाँ भी हाथी की सूंड में से पानी का निकलना मन को भा रहा था। शाम के समय अलग -अलग कोनो से फव्वारे पर पड़ने वाली रौशनी मन को लुभा रही थी। इसमें अनेक स्थानों से पानी निकलता है। जिसकी आम लोग कल्पना नहीं कर सकते। फव्वारे के पास से चारो और देखना अद्भुत लग रहा था। इसके चारो और से उतरने के लिए सीढिया बनी हुई है। हर तरफ से अलग ही नजारा दिखाई देता है।
यहाँ से उतरने के बाद हम हरीभरी जगह पर जाकर बैठ गए। यहाँ छुट्टी का मजा लेने के लिए अनेक परिवार अपने बच्चो के साथ आये हुए थे। यहाँ बच्चे अपने खिलोनो के साथ उछलते कूदते घूम रहे थे। बड़े लोग एक तरफ बैठ कर नज़ारे का लुत्फ़ उठा रहे थे। उन्हें देखकर लग रहा था बड़े शहरो के छोटे -छोटे घरो में घूमने , दौड़ने और भागने की जगह के अभाव में बच्चे आलसी होकर दूरदर्शन के सामने से उठते नहीं उन्हें यदि चुस्त बनाना है तो अभिभावकों को भी उनके साथ इन जगहों पर आना चाहिए तभी उनकी नटखटता का पता चलेगा।
इसके बीच में मायावती ,काशीराम और अम्बेडकर जी से जुडी हुई यादें महफूज की गयी है दीवारों पर उनसे सम्बन्धित अनेक चित्र उकेरे गए है। स्मारक के बीचोबीच इन तीनो की विशाल मूर्तियाँ लगी हुई है उन्हें देखकर लगता है मानो बोल उठेंगी। उन्हें देखकर लगता है भारत में मूर्तिकला, प्राचीनकाल में ही नहीं बल्कि आधुनिक काल में भी अपनी भव्यता बिखेरने में सक्षम है।
इसमें प्रकाश आने के लिए प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों का अद्भुत सामजस्य दिखाई देता है। सीधे तौर पर कृत्रिम रौशनी का प्रयोग नहीं किया गया बल्कि रौशनी बिखरती तो दिखाई देती है लेकिन स्त्रोत ढूंढना पड़ता है कि ये प्रकाश निकल कहाँ से रहा है।
हरियाली में बेकार में जाकर उसकी सुंदरता को बर्बादी से बचाने के लिए इसके चारो और पक्का गलियारा बनाया गया है इस पूरे बगीचे को बनाने के लिए बहुत सूंदर पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। ये पार्क बहुत बड़ा है इसे पूरा घूमने के लिए आधुनिक लोगो की सामर्थ्य पर शक होता है गाड़ियों के समय में अपने पैरो से विरले ही घूम सकेंगे। क्योंकि आधुनिक समय में लोगो का गाड़ियों के राज में पैदल चलना बहुत कम हो गया है।
यदि आधुनिक समय में बनने वाले अद्भुत पार्क का नजारा देखना चाहते हो तो नोएडा के दलित समारक पार्क में एक बार जरूर आना चाहिए क्योंकि दिल्ली में ऐसे पार्क बहुत कम है। जहाँ पुरे साल जन साधारण जा सके. यहाँ आने के लिए सुबह से शाम पांच बजे तक टिकट मिलती है। उसके बाद बंद हो जाती है। यानि केवल पांच बजे तक प्रवेश दिया जा सकता है।
बड़ी -बड़ी बिल्डिंगो के बीच बना मनोहर पार्क सुकून का अहसास कराता है। यहाँ प्रकृति से जुड़ने और खुले आसमान के नीचे आधुनिकता के बीच आराम के दो पल बीताने के लिए यहाँ जरूर आना चाहिए।

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