जल का संग्रह या मिलन स्थल
पिछले दिनों मुझे इस बाबड़ी को देखने का मौका मिला। में उस समय के लोगो की जिजीविषा को दाद देना चाहती हूँ। जिन्होंने बिना आधुनिक साधनो के पांच मजिली इमारत जमीन को खोद कर बना दी। पानी के लिए कुए पहले देखे है। उनकी निर्माण कला मुग्ध नहीं करती उन्हें देख कर लगता है इन्हे हमारी बुनियादी जरूरत पूरी करने के लिए बनाया गया है लेकिन बाबड़ी का बहुउपयोगी होना मानव की रचनात्मकता को दाद दिला जाता है।
गर्मी की अति होने पर लोगो को यहाँ ठंडक की तलाश में आकर पनाह लेना और यहाँ पर अनेक मनोरंजक कार्यक्रम को देखकर उत्साह से भर देना मुख्य मकसद रहा होगा। ये उस समय के थियेटर जैसे जगह रही होगी। यहाँ पर छोटे समूहों में बैठने के झरोखे जैसी जगह बनाई गयी है। जिसमे सामूहिकता और अकेलेपन दोनों का एहसास साथ -साथ हो जाता है।
आधुनिक समय में यहाँ जाकर ऐसा लगा मानो लोग पिकनिक मनाने के मकसद से आये है। बहुत सारे लोग दिखाई दे रहे थे उनका जोश देखते ही बनता था। लेकिन प्राचीन समय में इसे जिस मकसद से बनाया गया था। उसका औचित्य खत्म हो गया है क्योंकि यहाँ नीचे तल तक पहुंचने पर भी पानी के दर्शन नहीं होते बल्कि बिलकुल नीचे लोगे ने इसमें बोतले और कूड़ा डाल दिया है।
यहाँ पर एक जोड़ा शादी से पहले की फोटो खिचवाने आया हुआ था।
सब कुछ अच्छा होने के बाबजूद मन में हल्की सी खलिस महसूस हो रही थी। वहाँ पर सफाई का समुचित इंतजाम नहीं था। क्योंकि इसकी देखरेख पर पैसा कौन खर्च करेगा। पहले समय में अमीर लोग इसकी जिम्मेदारी उठाते थे लेकिन अब अमीरो के पास गर्मी से बचने के अनेक साधन है। मनोरंजन के लिए भी उन्हें ऐसी जगह पर आने की जरूरत नहीं है। मुझे लगता है ऐसी धरोहरों को बचाने के लिए सरकार को सामने आकर पर्यत्न करने चाहिए। तभी ये विरासत बच सकती है।

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