#destiny of shashikala


                           शशिकला की महत्वाकांक्षा 

भाग्य की बिडम्बना कहे या  अति  सुख और ताकत की चाह जिसने शशिकला जैसी औरत को आज जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया। जो पोएस गार्डन जैसी जगह की कर्ता -धर्ता थी। जिसके एक इशारे पर इंसान की किस्मत बदल जाती थी जिसने सत्ता सुख के गलियारे के लिए बहुत कुछ बदल डाला। उसकी अति महत्वाकांक्षा उसे इस कदर तबाह कर देगी किसी ने सोचा नही था। 

       सबसे पहले वह बेटे की शादी के समय सभी की निगाहों में आयी थी। उसने बेटे की शादी शाही अंदाज में की थी तभी सुभ्र्मनियम स्वामी ने कोर्ट केस दायर किया उसके कारण  जयललिता और चार अन्य पर आय से  अधिक  सम्पत्ति का मामला दायर किया गया। उनपर आय से 541 गुना ज्यादा संपत्ति रखने का मामला दर्ज हुआ।
        हमारी अदालते कितनी धीरे फैसला सुनाती है शशिकला का मुकदमा इसका उदाहरण है। इसका फैसला आने में 25 साल लग गए। मुख्य अभियुक्त जयललिता इस दरम्यान दुनिया से विदा हो गयी। 
      मुख्यमंत्री जयललिता पर आरोप लगने पर उन्होंने गहने पहनने बंद कर दिए। उन्होंने  शशिकला के बेटे को दत्तक पुत्र मानने से इंकार कर दिया।जयललिता का पूरा जीवन इस आरोप ने बदल डाला। 
      शशिकला मुख्यमंत्री की खास रही थी। जयललिता जीवन में उस पर सबसे अधिक भरोसा करती थी लेकिन कुछ समय पहले उन्हें शशिकला पर जहर देने के शक के कारण कड़वाहट आ गयी उन्होंने पोएस गार्डन में शशिकला और उसके परिवार के आने पर पाबन्दी लगा दी। काफी समय बाद केवल शशिकला के प्रति मनमुटाव खत्म हुए। सिर्फ वही जयललिता से मिल सकती थी अन्य कोई परिवार का सदस्य पोएस गार्डन में नही आ सकता था। 
       जयललिता के  अंतिम समय में सारे कार्य शशिकला के हाथो होने और अस्पताल में केवल शशिकला को उससे मिलने की अनुमति होना उसकी ताकत का परिचायक है पनीरसेल्वम को पार्टी की सदस्यता से निकाल देना। पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने में योगदान देना। उसकी महत्ता साबित करता है। 
      आज वह छोटे से कमरे में ,दरी पर सोती है। साधारण खाना खाती  है। उसको राजनीतिक कैदी के सामान सहूलियत नही दी गयी। उसे साधारण केदी के सामान रखा गया है। सुविधाएं मांगने पर भी नही दी गयी। 
       इनकी हालत देख कर मुझे गयासुद्दीन तुगलक की याद  आ गयी। वह दिल्ली का बादशाह बनकर आ रहा था। एक साधु ने उसे कहा -अभी दिल्ली दुरस्त।उसने उस साधु का मजाक बनाया लेकिन  दिल्ली के बाहर उसके स्वागत का भव्य  इंतजाम किया गया था.लेकिन वही उसकी मौत  हो गयी। उसकी जगह उसके बेटे को बादशाह बनाया गया। 
       भाग्य से बढ़कर कोई नही हो सकता इसकी मिसाल शशिकला का जीवन है एक साधारण इंसान किस तरह फर्श से अर्श पर पहुचकर। एक झटके में किस तरह अर्श से फर्श पर पहुचता है। अब लगता है भगवान के सामने इंसान की बिसात नही। जयललिता को सभी सुविधाएं होने के बाबजूद एक साँस फालतू लेने की इजाजत नही मिल सकी। लोगो की दुआए भी काम नही आ सकी।    


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