#with the new year took place in bangalore,indecent incident girl

     बेंगलुरु में लड़की के साथ नए बर्ष पर हुई  अशोभनीय घटना 

  नए साल पर बेंगलुरु में एक लड़की से छेड़छाड़ की घटना का जिक्र मेने समाचार में पड़ा और देखा। मुझे वह घटना इतनी बड़ी नही लगी। उसके बारे में कुछ ज्यादा नही बताया जा रहा था। मेने भी होने वाली छिटपुट घटनाओ के समान समझा। क्योंकि कही भी इसके बारे में सही तरीके से उल्लेख नही किया गया था। मेने भी ज्यादा तवज्जो नही दी लेकिन आए दिन इसके बारे में प्रसिद्ध लोग गलत ठहरा रहे थे तब मेने गहराई में जाने की सोची।
      इसके बारे में जानकर मेरे होश उड़ गए। हम मुस्लिम   देशो के  अमानवीय लोगो की तरह नारी के साथ व्यवहार करने लगे है। उनके लिए नारी  मन लुभाने का साधन मात्र है।
       नारी के शरीर को खेल की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इस .खेल  का नाम" ताहरूस "है। इसमें किसी भी विदेशी या आधुनिक लड़की पर कहर बरपा दिया जाता है। किसी भी अकेली लड़की को पकड़ कर भीड़ उसके कपड़े उतारने या फाड़ने में लग जाती है। इसके लिए तीन घेरे बना दिए जाते है।
     पहला घेरा लड़की को पकड़ कर उसके सभी के सामने कपड़े फाड् कर उसका बलात्कार करने की कोशिश कर  रहा होता है। 
      दूसरे घेरे के लोग मूक दर्शक बन कर इस कार्य को देख रहे होते है।
    तीसरे घेरे  के लोग बाहर के लोगो को अंदर आने से रोक रहे होते है।
     सोच के हैरानी होती है। भारत जैसे देश में जहाँ औरत को देवी समझा जाता है। उस देश में नारी का शरीर खेल की बिसात बन गया है। भीड़ उसका मजा लेने के लिए तैयार है। भारत में मर्दानगी का मतलब औरत की रक्षा करने में समझा जाता है। जबकि मुस्लिम देशो में मर्द वही है जो औरत की मजबूरियों का फायदा उठाये।
     भारत में मुस्लिमो की बहुलता के कारण सारे  मुस्लिम बच्चो के नाम अरब देशो से ढूंढ कर लाते है भारत को अपना देश मानने की जगह मुस्लिम देशो को तवज्जो देते है। मेने मुस्लिम नेता ओवेसी की वार्ता सुनी बहुत हैरानी हुई। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को अपना प्रधानमंत्री मानने से मना कर दिया।
     महबूबा मुफ़्ती ने बुरहान बानी को आतंकवादी बोलने की जगह चुप्पी लगा ली। 
जामा मस्जिद के बुखारी ने अपने बेटे की दस्तारबंदी के समय भारत के प्रधानमंत्री को निमन्त्रण नही दिया जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाजशरीफ को बुलाया गया। ये भारतीयों का सरेआम अपमान करना है।भारत में  मुस्लिम खुद को महफूज नही समझते उनके बयान उनके शब्दो की पोल खोलते है। जबकि किसी भी अन्य मुस्लिम देश में इस तरह अपने शासक का अपमान करने की कोई जुर्रत करके दिखाए।  किसी अन्य देश में रहने के लिए जाते भी नही।
     अरब देशो में विदेशी ओरतो के साथ ताहरूस का खेल खेला जाता है। जबकि बेंगलुरु में भारत की मासूम लड़की को निशाना बनाया गया। एक हाड़मांस की लड़की के साथ हैवानियत करते किसी को शर्म नही आयी। इसकी सच्चाई किसी संचार तन्त्र ने दिखाने की कोशिश नही की। मुझे संचार तंत्र की दोगली नीति पर गुस्सा आ रहा है। जिसने एक लड़की के दर्द को छुपाने की कोशिश की है। यदि इन आदतों पर पाबन्दी नही लगी तो भारत में हर चौराहे पर ताहरूस जैसे खेलो के द्वारा औरतो की मर्यादा भंग की जाएगी।
      विदेशो रिपोर्टर लॉरेन लोगन की साथ मिश्र में यह घटना 25 मिनट तक हुई उसे सुरक्षा बलो ने आकर बचाया लेकिन जो औरते इस घटना से बच नही पाती क्या इसके बाद जिंदगी में इससे उबर पाती है। क्योंकि लॉरेन आज भी इस सदमे से उबर नही सकी। उसके माध्यम से ताहरूस के बारे में अन्य देशो को जानकारी हुई।      यदि ये खेल इतना सम्मानजनक होता तो क्या मुस्लिम देश इसे छुपाते। कभी नही। इस खेल को भारत के मुसलमान जीवित करने की कोशिश कर रहे है। यह अशोभनीय है 

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