#mulaym singh or akhilesh yadav 10 caused discord between

                 बाप और बेटे के बीच कलह के10 कारण 

  •         मुलायमसिंह और अखिलेश यादव के बीच का विवाद जग जाहिर हो गया है। विवाद आज का नही था बल्कि इसकी चिंगारी काफी समय से सुलग रही थी। लेकिन समाज के सामने अब दिखाई दे रही है। ये राजनीतिक झगडे के साथ पारिवारिक झगड़ा भी है। 
  • ये झगड़ा राम और भरत के सिहासन से सम्बंधित भी कहा जा सकता है। इसमें केकयी का चरित्र एक तरह से साधना गुप्ता की महत्वाकांक्षा निभा रही है। जबकि उसका बेटा  प्रतीक को राजसिंहासन की दरकार नही है। बल्कि उसकी पत्नी अपर्णा को विधायक की टिकट के लिए मारामारी हो रही है। 
  •       साधना गुप्ता( मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी) उसके दफ्तर में क्लर्क का काम करती थी। उसकी ऊपर उठने की आकांक्षा ने ही मुलायम की पत्नी के जीवित रहते ही उसकी उपपत्नी बनना स्वीकार करके अपने पति से तलाक लिया। अपनी सुखी विवाहित जीवन को तिलांजलि देने में   देर नही की।   
  •       कुछ समय पहले टिविंकल यादव और साधना गुप्ता के झगड़े के कारण अखिलेश यादव पिता के घर से अलग रहने लगे। गृहप्रवेश के समय माँ साधना गुप्ता नही आयी। 
  • तीन भाइयो मुलायम ,शिवपाल और रामगोपाल यादव के द्वारा खड़ी की गई समाजवादी पार्टी दोफाड़ हो गयी है। शिवपाल भाई के साथ और रामगोपाल यादव भतीजे के साथ खड़े दिखाई दे रहे है।  
  • अखिलेश ने पिता के खिलाफ कोई बयान नही दिया है। जबकि पिता मुलायम सिंह अपना आक्रामक रूप समय -समय पर दिखाते आ रहे है। 
  • हमारे समाज में कहावत है (यदि माँ दूसरी आ जाती है तो पिता तीसरा हो जाता है )मुलायम का व्यवहार हमे इस बारे में सोचने पर मजबूर कर रहा है। 
  • अधिकतर विधायक अखिलेश  के साथ है। जबकि मुलायम के साथ 17 विधायक भी नही है। उसके बाबजूद उनका गुस्सा शांत नही हो रहा है। 
  • मुलायम सिंह ने बेटे को रबर स्टेम्प की तरह इस्तेमाल करने की सोची थी। जबकि इतने समय तक मुख्यमंत्री बने रहने के कारण उन्हें राजनीति करनी आ गयी है। उनकी अपनी सोच विकसित होने के कारण उन्होंने जब अपनी मर्जी से उम्मीदवारों का चुनाव किया तो उनके पिता को गवारा नही हुआ। 
  • ये बागी तेवर उसने अपनी शादी के समय भी दिखाए थे.
समाजवादी पार्टी के विखराव के कारण उन्हें फरवरी में होने वाले चुनाव में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन उनमे समझौता होता दिखाई नही दे रहा। रोज इक नया शगूफा सामने आ जाता है। उनकी राजनितिक महत्वकांशा और ताकत की लड़ाई उन्हें झुकने नही दे रही है।  
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