#jayra wasim (heroine dangle) and separatist element of horror

 दंगल की नायिका जायरा वसिम और अलगाववादी तत्वों की दहशत                                                              समाज के उठते सवालो के सामने डिगने से स्वयं को रोकना  बहुत हिम्मत का काम है। जिस देश  में लड़कियों की संख्या कम है। बल्कि पुरुष और स्त्री अनुपात खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। उस देश  में सरकार को बेटी बचाओ अभियान चलाकर लड़कियों की संख्या बढ़ाने की कोशिश करनी पड़ रही है  आमिर खान की  फिल्म  देश और सरकार को, लड़कियों  को बचाने  की  मुहिम को आगे बढ़ाने में सहायक  होगी।
दंगल फिल्म देखकर बहुत मजा आया। उसमे सभी चरित्रों का किरदार मन को छू रहा था। उस फिल्म में बाप की हिम्मत और सख्तमिजाजी, उसके जज्बे को कामयाब होते देखने की बेताबी दिखा रही थी।

       इस फिल्म में बाप का बेटा न होने का दुःख मन को झकझोरता है। लड़कियों पर की गयी सख्ती हमें हंसने का मसाला देती  है। मध्यांतर तक फिल्म में समाज और बाप के द्वारा किये गए उपाय और लड़कियों की बेबसी हमें पल -पल हंसाती  है। 
        कई दिन से जायरा बसीम (दंगल की नायिका ) खबरों में छायी हुई है। इस फिल्म की सफलता और उसके अभिनय ने उसे प्रसिद्ध कर दिया है। उसकी ख़ुशी वह अभी पूरी तरह महसूस नही कर पायी थी कि उसे अलगाववादी ताकतों ने धमकाना शुरू कर दिया जिसके कारण उसने अपनी फोटो और अपने वक्तव्य सोशल मीडिया से हटाते हुए माफ़ी मांगनी पड़ी । 
       जायरा का माफ़ी मांगना हमें सोचने पर मजबूर कर रहा है। एक तरफ भारत में रहते हुए हर धर्म की लड़कियां तरक्की के पायदान चढ़ रही है। वही भारत के कश्मीर राज्य की लड़की का फिल्म में काम करना इतना  बड़ा कसूर  हो गया कि अलगाववादी तत्वों को सामने आना पड़ा। कश्मीर भारत का हिस्सा न लग कर मुस्लिम देश लगने लगा है।
      कश्मीर की मुख्यमंत्री  महबूबा मुफ़्ती से मिलने के बाद उसे ट्वीट करके कहना पड़ रहा है "मेने अच्छा काम नही किया हे.मुझे माफ़ कर दो। सारी केंद्र ,राज्य सरकार ,बॉलीबुड के कलाकार और भारतीय जनता उसके साथ होते हुए उसका माफीनामा हमें सोचने पर मजबूर करता है हमारे देश की शासनव्यवस्था इतनी लचर हो गयी है।                                    .
      जायरा को दूसरी मलाला न बना दिया जाये। उसे जिन्दा रहने के लिए यूरोपीयन देश की शरण लेनी पड़े। भारत में 18 % मुस्लिम, भारतीय नेता और कानूनों को नही मानते हमारे संविधान में अल्पसंख्यक का दर्जा 10  % आबादी होने पर मिलता है लेकिन वोट बैंक की राजनीति 18 % को भी सारी रियायते दिलवा कर खुद को पंगु बना रही है 
          केवल 50 % हिन्दुओ को सभी कानून मानने के लिए बेबस किया जाता है। कोई मुस्लिम 1000  साल पहले बनाये गए कानून को तोड़ नही सकता। भारतीय कोर्ट के 3 तलाक के कानून को कोर्ट के द्वारा रदद् करने की अनुमति मुस्लिम नेता नही देना चाहते। जबकि अन्य मुस्लिम देशो में शाब्दिक तलाक की अनुमति नही है। भारतीय मुस्लिम सिर्फ अपने शरीयत के कानूनों को मानते है.
        जायरा के पिता  और सारे नेताओ को एकजुट होना पड़ेगा वरना जायरा जैसी मासूम लड़की को दीवारों के पीछे पनाह लेनी पड़ेगी। उसे अपनी पहचान छिपा कर जीने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
      कोई भी विपक्षी दल इस बारे में बोलने की हिम्मत नही जूटा  रहा। यदि मुस्लिम ही मुस्लिम को सताये तो जायज ठहराया क्यों जा रहा है। सारे मुस्लिम देश अपनी कट्टरता के कारण तबाह हो रहे है। उनके नागरिको को  अपने देश को छोड़ कर दूसरे देशो में शरण लेनी पड़ रही है। मुस्लिम धर्म  आतंकवाद का प्रतीक बनता जा रहा है। कोई देश उन्हें पनाह देने के लिए तैयार नही है। भारत का भी यदि यही हाल हो गया तो  ---------
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#with the new year took place in bangalore,indecent incident girl

     बेंगलुरु में लड़की के साथ नए बर्ष पर हुई  अशोभनीय घटना 

  नए साल पर बेंगलुरु में एक लड़की से छेड़छाड़ की घटना का जिक्र मेने समाचार में पड़ा और देखा। मुझे वह घटना इतनी बड़ी नही लगी। उसके बारे में कुछ ज्यादा नही बताया जा रहा था। मेने भी होने वाली छिटपुट घटनाओ के समान समझा। क्योंकि कही भी इसके बारे में सही तरीके से उल्लेख नही किया गया था। मेने भी ज्यादा तवज्जो नही दी लेकिन आए दिन इसके बारे में प्रसिद्ध लोग गलत ठहरा रहे थे तब मेने गहराई में जाने की सोची।
      इसके बारे में जानकर मेरे होश उड़ गए। हम मुस्लिम   देशो के  अमानवीय लोगो की तरह नारी के साथ व्यवहार करने लगे है। उनके लिए नारी  मन लुभाने का साधन मात्र है।
       नारी के शरीर को खेल की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इस .खेल  का नाम" ताहरूस "है। इसमें किसी भी विदेशी या आधुनिक लड़की पर कहर बरपा दिया जाता है। किसी भी अकेली लड़की को पकड़ कर भीड़ उसके कपड़े उतारने या फाड़ने में लग जाती है। इसके लिए तीन घेरे बना दिए जाते है।
     पहला घेरा लड़की को पकड़ कर उसके सभी के सामने कपड़े फाड् कर उसका बलात्कार करने की कोशिश कर  रहा होता है। 
      दूसरे घेरे के लोग मूक दर्शक बन कर इस कार्य को देख रहे होते है।
    तीसरे घेरे  के लोग बाहर के लोगो को अंदर आने से रोक रहे होते है।
     सोच के हैरानी होती है। भारत जैसे देश में जहाँ औरत को देवी समझा जाता है। उस देश में नारी का शरीर खेल की बिसात बन गया है। भीड़ उसका मजा लेने के लिए तैयार है। भारत में मर्दानगी का मतलब औरत की रक्षा करने में समझा जाता है। जबकि मुस्लिम देशो में मर्द वही है जो औरत की मजबूरियों का फायदा उठाये।
     भारत में मुस्लिमो की बहुलता के कारण सारे  मुस्लिम बच्चो के नाम अरब देशो से ढूंढ कर लाते है भारत को अपना देश मानने की जगह मुस्लिम देशो को तवज्जो देते है। मेने मुस्लिम नेता ओवेसी की वार्ता सुनी बहुत हैरानी हुई। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को अपना प्रधानमंत्री मानने से मना कर दिया।
     महबूबा मुफ़्ती ने बुरहान बानी को आतंकवादी बोलने की जगह चुप्पी लगा ली। 
जामा मस्जिद के बुखारी ने अपने बेटे की दस्तारबंदी के समय भारत के प्रधानमंत्री को निमन्त्रण नही दिया जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाजशरीफ को बुलाया गया। ये भारतीयों का सरेआम अपमान करना है।भारत में  मुस्लिम खुद को महफूज नही समझते उनके बयान उनके शब्दो की पोल खोलते है। जबकि किसी भी अन्य मुस्लिम देश में इस तरह अपने शासक का अपमान करने की कोई जुर्रत करके दिखाए।  किसी अन्य देश में रहने के लिए जाते भी नही।
     अरब देशो में विदेशी ओरतो के साथ ताहरूस का खेल खेला जाता है। जबकि बेंगलुरु में भारत की मासूम लड़की को निशाना बनाया गया। एक हाड़मांस की लड़की के साथ हैवानियत करते किसी को शर्म नही आयी। इसकी सच्चाई किसी संचार तन्त्र ने दिखाने की कोशिश नही की। मुझे संचार तंत्र की दोगली नीति पर गुस्सा आ रहा है। जिसने एक लड़की के दर्द को छुपाने की कोशिश की है। यदि इन आदतों पर पाबन्दी नही लगी तो भारत में हर चौराहे पर ताहरूस जैसे खेलो के द्वारा औरतो की मर्यादा भंग की जाएगी।
      विदेशो रिपोर्टर लॉरेन लोगन की साथ मिश्र में यह घटना 25 मिनट तक हुई उसे सुरक्षा बलो ने आकर बचाया लेकिन जो औरते इस घटना से बच नही पाती क्या इसके बाद जिंदगी में इससे उबर पाती है। क्योंकि लॉरेन आज भी इस सदमे से उबर नही सकी। उसके माध्यम से ताहरूस के बारे में अन्य देशो को जानकारी हुई।      यदि ये खेल इतना सम्मानजनक होता तो क्या मुस्लिम देश इसे छुपाते। कभी नही। इस खेल को भारत के मुसलमान जीवित करने की कोशिश कर रहे है। यह अशोभनीय है 

#mulaym singh or akhilesh yadav 10 caused discord between

                 बाप और बेटे के बीच कलह के10 कारण 

  •         मुलायमसिंह और अखिलेश यादव के बीच का विवाद जग जाहिर हो गया है। विवाद आज का नही था बल्कि इसकी चिंगारी काफी समय से सुलग रही थी। लेकिन समाज के सामने अब दिखाई दे रही है। ये राजनीतिक झगडे के साथ पारिवारिक झगड़ा भी है। 
  • ये झगड़ा राम और भरत के सिहासन से सम्बंधित भी कहा जा सकता है। इसमें केकयी का चरित्र एक तरह से साधना गुप्ता की महत्वाकांक्षा निभा रही है। जबकि उसका बेटा  प्रतीक को राजसिंहासन की दरकार नही है। बल्कि उसकी पत्नी अपर्णा को विधायक की टिकट के लिए मारामारी हो रही है। 
  •       साधना गुप्ता( मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी) उसके दफ्तर में क्लर्क का काम करती थी। उसकी ऊपर उठने की आकांक्षा ने ही मुलायम की पत्नी के जीवित रहते ही उसकी उपपत्नी बनना स्वीकार करके अपने पति से तलाक लिया। अपनी सुखी विवाहित जीवन को तिलांजलि देने में   देर नही की।   
  •       कुछ समय पहले टिविंकल यादव और साधना गुप्ता के झगड़े के कारण अखिलेश यादव पिता के घर से अलग रहने लगे। गृहप्रवेश के समय माँ साधना गुप्ता नही आयी। 
  • तीन भाइयो मुलायम ,शिवपाल और रामगोपाल यादव के द्वारा खड़ी की गई समाजवादी पार्टी दोफाड़ हो गयी है। शिवपाल भाई के साथ और रामगोपाल यादव भतीजे के साथ खड़े दिखाई दे रहे है।  
  • अखिलेश ने पिता के खिलाफ कोई बयान नही दिया है। जबकि पिता मुलायम सिंह अपना आक्रामक रूप समय -समय पर दिखाते आ रहे है। 
  • हमारे समाज में कहावत है (यदि माँ दूसरी आ जाती है तो पिता तीसरा हो जाता है )मुलायम का व्यवहार हमे इस बारे में सोचने पर मजबूर कर रहा है। 
  • अधिकतर विधायक अखिलेश  के साथ है। जबकि मुलायम के साथ 17 विधायक भी नही है। उसके बाबजूद उनका गुस्सा शांत नही हो रहा है। 
  • मुलायम सिंह ने बेटे को रबर स्टेम्प की तरह इस्तेमाल करने की सोची थी। जबकि इतने समय तक मुख्यमंत्री बने रहने के कारण उन्हें राजनीति करनी आ गयी है। उनकी अपनी सोच विकसित होने के कारण उन्होंने जब अपनी मर्जी से उम्मीदवारों का चुनाव किया तो उनके पिता को गवारा नही हुआ। 
  • ये बागी तेवर उसने अपनी शादी के समय भी दिखाए थे.
समाजवादी पार्टी के विखराव के कारण उन्हें फरवरी में होने वाले चुनाव में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन उनमे समझौता होता दिखाई नही दे रहा। रोज इक नया शगूफा सामने आ जाता है। उनकी राजनितिक महत्वकांशा और ताकत की लड़ाई उन्हें झुकने नही दे रही है।  
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  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...