#krismas or hinduo ki puja me 8 anter

              क्रिसमस और हिन्दुओ की पूजा में 8  अंतर 

  सभी धर्म हमें ईश्वर से मिलाने में सहायक है। इनके द्वारा हम अध्यात्म से जुड़ जाते है। हमें आत्मिक शांति का अहसास होता है। हिन्दू धर्म काफी पुराना धर्म है। लेकिन हिन्दू धर्म संसार में 4  स्थान पर पहुँच गया है। जबकि ईसाई  धर्म 1 स्थान पर आ गया है। आज में इसके और हिन्दू धर्म के बारे में अपने विचार आपके सामने रखने जा रही हूँ।
  1. हिन्दू धर्म में त्यौहारो  पर अधिकतर व्रत रख कर आत्मशुद्धि की जाती है। पाचनसंस्थान को आराम देने की कोशिश की जाती है।  जबकि इसाई धर्म में किसमस पर  पुरे दिन खाया जाता है। केक की विविधता देखने और खाने लायक होती है। 
  2. हिन्दुओ के त्यौहारो पर शांति होती है जबकि क्रिसमस के दिन मेलेऔर ,नृत्य का आयोजन किया जाता है। 
  3. हिन्दुओ के त्यौहार अधिकतर घर में रहकर मनाये जाते है। जबकि ईसाइयो के त्योहारो को घर से बाहर मनाने का प्रचलन है।  इस दिन अधिकतर लोग मेलो और रिश्तेदारो के घर जाते है। 
  4. हिन्दुओ के त्यौहार के दिन पूजा की जाती है। जबकि क्रिसमस से एक दिन पहले ईसाई लोग चर्च में जाकर पूजा करके आते है। जिसे क्रिसमस इव के नाम से जाना जाता है। ये आधी रात के आस -पास घर पहुँचते है। 
  5. हिन्दुओ के त्योहारो में जो लोग माँसाहारी भी होते है। वे त्योहारो पर विशेष रूप से शाकाहारी भोजन ग्रहण करते है। यहाँ तक कि त्यौहारो पर प्याज और लहसन का भी निषेध होता है। जबकि ईसाई लोग इस दिन विशेष रूप से माँसाहारी भोजन ग्रहण करते है 
  6.  हिन्दुओ के त्यौहारो में देवी-देवताओ की पूजा होती है। जबकि क्रिश्मस पर क्रिसमस ट्री को विशेष रूप से घर में सजाया जाता है।उस पर उपहार लगा दिए जाते है।  
  7. हिन्दुओ के त्योहारो में भगवान से इच्छाओ की पूर्ति की प्रार्थना की जाती है। जबकि ईसाइयो में भगवान के रूप में अभिभावक बच्चो की इच्छाओ की पूर्ति कर देते है। उनके मनचाहे उपहार उनके सिरहाने रखकर उन्हें बताया जाता है। ये सब रात को सांताक्लोज रख कर गए है। काफी समय तक बच्चे इस भ्रम में रहते है। 
हिन्दुओ के त्योहारो में आध्यात्मिकता छायी रहती है। जबकि क्रिसमस के दिन अनेक खेलो का आयोजन किया जाता है। घरो में संगीत और नृत्य किये जाते है। 
       हम त्यौहारो पर ख़ुशी का अहसास करते है। इसके लिए काफी समय से तेयारिया करते है। पूरे दिन घर और बाहर आनन्द का माहौल रहता है। यही जीवंतता की पहचान है.
   यदि आप मेरे विचारो से सहमत है। तो अपने विचार मुझ तक भेजने की कृपा करे। 

#yuvao ke sashktikaran or vikas

                  युवाओ के सशक्तिकरण और विकास 

   
   भारत में युवा शक्ति की बहुलता है। लेकिन उसकी उन्नति के लिए पर्याप्त उपाय नही किये जा सके है। जिसके कारण हमारे युवा भ्रमित हो कर गलत रस्ते पर जा  रहे है।  युवाओ के अनुसार-उनके आगे बढ़ने के उपायो की कमी है।
        भारतीय युवा भारत में ही नही बल्कि संसार में उन्नत स्थान पर पहुंच रहे है। अभी तक भारत की बढ़ती जनसँख्या को इसके लिए दोष दिया जाता रहा है। लेकिन पहली बार प्रधानमंत्री मोदी जी ने युवाओ को ताकत के रूप में देखा है। भारतीय 65 करोड़ युवा यदि मिलकर सही रस्ते पर कदम बढ़ाये तो उनके द्वारा भविष्य बदल सकता है। जैसे कश्मीर में यदि आतंकवादी पैदा होते है। तो वही आईएएस और आईपीएस जैसे युवा भी विपरीत परिस्थिति में अव्वल आकर दिखा रहे है। उनके अंदर देश को बदलने और आगे बढ़ाने का जज्बा है। यह जज्बा सभी में भर कर देश को मजबूत बनाया जा सकता है। 
  1.       हमारी शिक्षा व्यवस्था के अंदर बदलाब किया जाये। उसके लिए सभी को शिक्षा दिलाने की व्यवस्था की जाये। 
  2. निजी विद्यालयों में शिक्षा सही रूप में दी जाती है। लेकिन सरकारी विद्यालयों में कार्यभार, शिक्षा के अतिरिक्त अन्य कार्यो से सम्बंधित होने के कारण, अध्यापक अध्यापन से ज्यादा दूसरे कार्यो में लगे रहते है जिसके कारण, विद्याधियों पर पर्याप्त ध्यान नही दिया जा रहा। उनको दूसरे कार्यो से मुक्त करके केवल छात्रों की उन्नति के कामो में लगाया जाये।
  3. शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाया जाये। उनसे अभ्यास अधिक करवाया जाये जिससे जिस कार्य को कर रहे है। उसके प्रति विश्वास पैदा हो सके। जो बच्चे प्रौद्योगिकी के स्तर पर पढ़ने के बाबजूद प्रेक्टिकल कार्य करते हुए डरते है। वे शिक्षा पूरी होने के बाबजूद अपने भरोसे कोई कार्य नही कर सकते। उन्हें कोई संस्था रखते हुए डरती है।वे बाहर निकलने पर बेरोजगार के सामान होते है। एक नोकरी की तलाश में भटकते हुए। शिक्षा व्यवस्था पर गुस्सा निकालते हुए।  
  4. शिक्षा के कुछ स्तरों को उद्योग -धंधो से जोड़ा जाये जिससे युवाओ में कार्य से सम्बंधित विश्वास पैदा हो सके। 
  5. आज की शिक्षा युवाओ में आत्मविश्वास पैदा नही कर पा रही है। नोकरी न मिलने के लिए वे व्यवस्था को दोषी ठहराते है। जहाँ उनसे नोकरी के बदले में रिश्वत मांगी जाती है। रिश्वत रूपी भ्रस्टाचार पर कुठाराघात करके उनका मनोबल बढ़ाया जाये। 
  6. उनके अंदर आत्म  विश्वास पैदा किया जाये। ताकि उनमे अपना व्यवसाय खोलने की ललक  पैदा हो सके। 
  7. वे अपने साथ दुसरो को रोजगार दे सकते है। उन्हें सस्ते दामो में कर्ज दिया जाये। सरकारी व्यवधानों से तंग करने की अपेक्षा उन्हें अधिक से अधिक सहूलियत एक ही खिड़की से मिल सके। 
  8. मोदी जी ने स्टार्टअप योजना शुरू की है इससे हो सकता हे युवाओ में नया व्यवसाय खोलने की हिम्मत पैदा हो सके। 
9  गरीब तबके के लोगो को बैंको से आसानी से कर्ज नही मिल रहा। ये लोग डरते हुए बैंको में जाने की हिम्मत जुटाते है। लेकिन उनके साथ उचित व्यवहार नही होता। जिससे दुबारा जाने की हिम्मत नही जुटा पाते। 
10 उनमे स्किल विकास बढ़ाने के प्रयास किये जाये। रोजगार कोई बुरा नही होता यदि उसे कुशलता से किया जा सके।  युवाओ के अंदर नैतिकता और धैर्य की भावना पैदा की जाये ताकि गलत रास्ते पर चलकर पैसा कमाने के बारे में न सोचे।
11  उनके अंदर सहिष्णुता और सदभाव की भावना पैदा की जाये। उनके अंदर बढ़ती आक्रमकता दुसरो का संहार करके, जेल की सलाखों के पीछे धकेल कर, उसका और दुसरो का पूरा जीवन बर्बाद कर देती है।
 12 संचार साधनो से नई जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश की जाये। जैसे किसानों से सम्बंधित जानकारी अधिक से अधिक प्रसारित की जाने से गावो के युवा शहरो में भटकने के स्थान पर गांव में रहकर अपना और गाँव का विकास कर के उन्नत जीवन जी सके।
 १३ युवाओ के अंदर केवल अधिकारों के प्रति सजगता के साथ कर्तव्यों का पालन करने की भावना जागृत की जाये। मांगने के स्थान पर देने का जज्बा पैदा होने से सुंदर संसार बन जायेगा।
 १४ कुछ राज्यो में लेपटॉप ,साईकिल आदि  देकर उन्हें सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह अच्छा कदम है।
 15 गरीब बच्चो  को कई प्रकार की छात्रबृति देकर अनुगृहीत किया जाये।
        मुझे उम्मीद हे हमारा युवा इन उपाय के फलीभूत होने पर राष्ट्र की उन्नति में सहायक होगा।  

#jaylalita


                                     दृढ़ प्रतिज्ञ जयललिता 

   आज मुझे  मुख्यमंत्री जयललिता की  मौत का सदमा लगा  है।  उसका जुझारू व्यक्तित्ब लोगो को देवी का अवतार मानने पर मजबूर करता है। एक दो साल की बच्ची के पिता की मौत ,उनके प्रतिष्ठित परिवार के द्वारा नकार दिया जाना। उनका नानके और मौसी के हाथो पालन -पोषण होना।

       माँ के करीबी होने की इच्छा रखने पर माँ के साथ ना  रह सकना। किसी सदमे से कम नही होता। रात को माँ की साड़ी पकड़ कर सोना।,ताकि माँ के जाने का उसे पता चल जाये। लेकिन माँ का साड़ी बदल कर चले जाना। सुबह माँ के नही मिलने पर उस बच्ची का दर्द मुझे झकझोर देता है। उस माँ की तड़प सोचने पर मजबूर कर देती है। वह पैसे की खातिर, अपनी छोटी सी बच्ची को किस तरह दिल पर पत्थर रख कर जाने पर मजबूर होती होगी। जिस बच्ची ने पिता का प्यार न जाना ,केवल माँ के आँचल की छाह  मिली। वह भी स्थाई नही थी वह अनजाने चेहरो के बीज अपनापन ढूंढती रह जाती होगी। 
      उसे बड़े होने पर भी इस बात का अहसास नही था कि उनके पास पैसे की कमी है। उसे हमेशा लगता था वह अमीर घराने से ताल्लुक रखती है। अमीर घराना उसका दादा का परिवार था। उनका सम्बन्ध राज घराने से था जिसके कारण उनके नाम के आगे" जय "लगाया गया। लेकिन उसके ठाठ -बाट उसके नसीब में नही थे। 
     वह पढ़ने में बहुत अच्छी होने  कारण बहुत पढ़ना चाहती थी लेकिन 1३  साल की उम्र में उसे जबरदस्ती फिल्मो में काम करवाया गया। तब उसे माँ की मजबूरी समझ में आयी। यहाँ उसकी किस्मत चल पड़ी उसकी हर फिल्म हिट होती उसने अपने कॅरियर में १४० फिल्मे की। उसमे 28 फिल्मे" म  ग रामचंद्रन" के साथ की जो उनसे 31 साल बड़े थे। उन्होंने तमिल, तेलगु ,मलयालम ,कन्नड़ ,हिंदी और अंग्रेजी भाषाओ में काम किया। उनकी दो हिंदी फिल्मे मनमौजी और इज्जत बनी। लेकिन हिंदी फिल्मो में इतनी सफलता प्राप्त नही हुई।उन्होंने उस समय के सभी लोकप्रिय अभिनेताओ के साथ काम किया। वे अपने समय में सबसे अधिक पैसे लेने वाली अभिनेत्री थी।  
          उनके जीवन की आरंभिक अवस्था पर माँ का प्रभाव रहा। बाकि जीवन पर रामचंद्रन का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। आरम्भ में उनका जीवन रामचंद्रन के प्रभाव तले पनपा। परोक्ष रूप में उनको रामचंद्रन के साथ रहने का फायदा भी हुआ। उन्ही के सौजन्य से वह राजनीति में आयी। उनके बीच काफी मतभेद भी रहे। एक समय ऐसा आया जब रामचंद्रन उन्हें पार्टी से निकालने के लिए तैयार हो गए थे लेकिन एक दिन पहले ही उनकी मौत हो गयी। 
        रामचंद्रन की मौत के समय उनके परिवार वाले उनसे नाराज थे। जिसके कारण उन्हें उनकी मौत की सही जानकारी नही दी गयी। जिस दरवाजे से अंदर जाने की कोशिश करती उस दरवाजे को उसके सामने बंद कर दिया जाता। जब वह घर के अंदर पहुँच सकी। तब तक  रामचंद्रन के पार्थिव शरीर को अन्य दरवाजे से बाहर ले जाया जा चुका था। लेकिन उनके दृढ़ निश्चय ने उन्हें उनके पार्थिव शरीर तक पहुँचाया। जहाँ उनके विरोधी उन्हें अनेक तरह से प्रताड़ित कर रहे थे जिससे वह चली जाये। कोई उन्हें चुटकी काटता ,कोई जानबूझ कर पैर कुचल  देता लेकिन वह अपनी अदम्य जिजीविषा के कारण दो दिनों तक लगातार बैठी रही। उनकी शव यात्रा के समय वह साथ न चल सके। उस समय उन्हें धक्का तक देने में गुरेज नही किया गया। आप खुद सोच के देखिये जिस इंसान को उन्होंने अपना सब कुछ समझा ,उसकी अंतिम यात्रा के समय उसे इस तरह दुत्कारा जाना उसके हृदय को किस तरह लहूलुहान कर रहा होगा। 
        उन्होंने जीवन में आये सारे अवरोधों को पार किया और रामचंद्रन की राजनीतिक उत्तराधिकारी बन कर अपने सारे प्रतिद्वंदियों को एक तरफ करके तमिल नाडु की मुख्यमंत्री बन कर दिखा दिया।  उन्होंने बेतन के रूप में 1 रुपया लेने की बात की। पहली महिला मुख्यमंत्री जो इस पद पर 6  बार चुनी गयी। लोग उन्हें देवी के सामान पूजते थे। उनके पैर दंडवत छूते थे। उन्होंने कभी इसका विरोध भी नही किया। वह गरीबो की मसीहा बन कर उनके दुःख -दर्द को दूर करने की कोशिश करती थी। उन्हें गरीबो के लिए बहुत सारी योजनाए बनाई जिसके कारण लोग उनके मुरीद बन गए। उन्होंने गरीबो के सारे दर्द दूर करने के लिए जी जान लगा दी। 
       उन्होंने अपने जीवन में बहुत अपमान सहा लेकिन प्रतिशोध लेने से भी कभी पीछे नही हटी। करुणानिधि और उनके सम्बन्ध राजनीतिक प्रतिशोध का ज्वलंत उदाहरण है दोनों हर तरह से अपने प्रतिद्वंदियों को सलाखों के पीछे भेजते रहे। 
         उन्होंने सारी जिंदगी भोगविलास में बिताई उनके घर जब छापा पड़ा तब 28 किलो सोना ,बहुत अधिक  चांदी  ,750 जूते ,कई हजार साड़िया मिली। उन्होंने शशिकला के बेटे की शादी में 100 करोड़ रूपये  लगाए जिसके कारण उनकी देवी की छवि टूट गयी। उसका खामियाजा उन्हें चुनाव में हार के रूप में चुकाना पडा । इसके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। बाद में उन्होंने सुधाकरन को दत्तक पुत्र मानने से भी इंकार कर दिया। 
      बाद में उन्होंने महंगी साड़ी और जेवर रहित रहने का प्रण किया 14 साल तक उन्होंने अपने शरीर पर कोई गहना धारण नही किया। सन 2011 में अपने सहयोगी के अनुरोध पर गहने पहनने शुरू किये। 
     वह नारी कॉन्ट्रेक्टर ,मंसूर अली पटौदी और शम्मी कपूर को पसंद करती थी। 
     तमिलनाडु में जाति व्यवस्था पर बहुत सख्ती से पालन किया जाता हे. दलितो की हालत दयनीय थी। उन्होंने स्वयं उच्च कुलीन ब्राह्मण होते हुए, उनके उत्थान के लिए कई उपाय किये। वह तमिलनाडु के सभी वर्गो के उत्थान के लिए जीवन भर लगी रही। 
       उनको समझने वाला ,उनके अकेलेपन का साथी कभी उन्हें मयस्सर नही हुआ। थोड़ा बहुत उन्हें समझने वाली केवल शशिकला, उनकी सहेली थी। उनके बीच भी जहर देने  की घटना ने मनमुटाव ला दिया। इतनी उचाईयो पर पहुँचने वाले किस तरह डरे, सहमे और अकेलेपन के शिकार होते है। जयललिता का जीवन इसका  जीवन्त  उदाहरण है। उनके किये कामो के कारण उनके चाहने वालो के आँसू रोके नही रुक रहे है। उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ देखकर यकीन करना मुश्किल हो रहा था वह किस तरह लोगो के मन में समायी हुई थी। चारो और जनसैलाव दिखाई दे रहा था। 
       

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...