#hamare tyohar


                                   हमारे त्यौहार 

 हिन्दू,जैन  और आर्य  समाज त्यौहारो की मस्ती में झूम रहे  है। हम सभी में नया जोश भरा हुआ। ये दिन सभी के लिए विशेष महत्व रखते है। अक्टूबर का पूरा महीना त्यौहारो से भरा हुआ है। पूरब, पश्चिम ,उत्तर ,दक्षिण सभी उत्साह में दिखाई दे रहे है। हर तरफ रंगीनी दिखाई दे रही है। 

     ये त्यौहार बुराई पर अच्छाई के प्रतीक है। दुर्गा ने महिषासुर का वध किया ,राम ने रावण का संहार किया।,छोटी दीवाली को कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का संहार किया। 
     दशहरा के दिन राम ने रावण को मारा  था। उसके कारण आपने रावण दहन देखा होगा।
 लेकिन विजयादशमी पर  महिसासुर का संहार करने वाली दुर्गा के बारे में अधिक नही जाना होगा। जब सभी देवता महिषासुर के सामने हार गए तब उसकी ताकत का सामना करने के लिए उन्होंने उन्होंने अपने सभी श्रेष्ठ गुणों को इकट्ठा करके दुर्गा देवी का निर्माण किया। वह मानवीय और देवी गुणों का सर्वश्रेष्ठ रूप है। उसको देख कर महिषासुर जान नही सका इतनी कोमलांगी और सुंदर नारी उसकी मौत का कारण बन सकती है। यह नारी की सर्वश्र्रेष्ठ कृति के साथ नारी के गुणों का बखान करने में सक्षम है। यदि नारी को उचित जगह मिले तो वह मर्दो की बराबरी कर सकती है। 
      धनतेरस का नाम आप सुनते आ रहे है।देवो और दैत्यों के  समुद्र मंथन के बाद उसमे से चौदह रत्न निकले थे। उसमे धनवंतरी जी निकले जो आयुर्वेद के ज्ञाता थे। उनके ज्ञान से आयुर्वेद नामक चिकित्सा पद्धति का आरम्भ हुआ जिसने बर्षो तक लोगो की जान बचाई। उन्हें सम्मान देने के लिए धनतेरस मनाई जाती है। 
      आप हमेशा से राम के अयोध्या पहुचने पर दीवाली मनाने का वर्णन सुनते आ रहे है। लेकिन दीवाली की सुबह हनुमान जी की पूजा होती है। शाम  लक्ष्मी और गणेश की पूजा देख कर मुझे बचपन में बहुत हैरानी होती थी। लेकिन गणेश जी को शिवजी ने सभी देवताओ से पहले पूजा का वरदान दिया था। वरना कोई पूजा पूर्ण नही मानी  जाएगी। इसलिए इस दिन गणेश जी की मूर्ति विशेष रूप से पूजी जाती है। 
        बड़ी दीवाली पर लक्ष्मी जी की पूजा होती है लेकिन विष्णु जो उनके पति है उनकी पूजा नही की जाती। इसका कारण भी समुद्र -मंथन से जुड़ा है। इसी मंथन के फलस्वरूप सर्वगुण संपन्न और  अद्वितीय, सुंदरी, धन की देवी  लक्ष्मी समुद्र से निकली थी। विष्णु जी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। लक्ष्मी के हर रूप को साधारण मानव भी पाना चाहता है। इस लिए वे लक्ष्मी जी की पूजा करके उनका आह्वान करते है। 
      इंद्र की पूजा न करने के कारण मथुरा वासियो को कृष्ण ने उनके प्रकोप से बचाया। इंद्र को मेघो का राजा कहते है। उनके कारण कृषिप्रधान भारत का जीवन चक्र चलता है। वर्षा की कमी किसानों के लिए तबाही का कारण बन जाती है। वही अतिवृष्टि उन्हें बर्बाद कर जाती है। कृष्ण ने मथुरावासियों को इंद्र के द्वारा लाई अतिवृष्टि से बचाने के लिए उन्हें गोवेर्धन पर्वत पर पहुचने के लिए कहा। आपने गोवेर्धन पर्वत को ऊँगली पर धारण करने की कथा देखि सुनी होगी लेकिन मेरे ख्याल में उन्होंने ऊँची जगह पर लोगो को पहुँचा कर किसी गुफा में शरण दिलवाकर उन्हें बाढ़ के प्रकोप से बचाया होगा। हमें  गोवेर्धन पर्वत  जाने पर ऊँचा पत्थरो का पहाड़ दिखाई देता है। हजारो साल पहले वहाँ काफी ऊँचा स्थान रहा होगा। इस प्रसंग से हमें कृष्ण की सूझ -बुझ और लोकहित की भावना दिखाई देती है। वह निरपेक्ष भाव से सबके हित  में लगे रहते थे। 
      कृष्ण को हम भगवान के अवतार के रूप में जानते है। हमारे कई त्यौहार जन्मास्टमी ,गोवेर्धन पूजा ,नर्कचौदस(छोटी दीवाली ) श्री कृष्ण से जुड़े हुए है। उन्हें हम महामानव के रूप में देख सकते है। उन्हें जीवन के हर रूप में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कृष्ण को  माँ के गर्भ में आने से मरणोपरांत तक  सारा जीवन कठिनाइयों का सामना करते हुए बीता दिया।उनकी मृत्यु भी कुल में एकता बनाने में असफल होने पर,दुःख में डूब कर, शिकारी के तीर लगने से हुई। कहा जाता है वह शिकारी भी उनके परिवार का सदस्य था।  कृष्ण साधरण इंसान को असाधारण प्रयास करने की प्रेरणा देते है। 
     जैनियो के तीर्थंकर  महावीर जी ने इसी दिन निर्वाण लिया था। दयानद सरस्वती आर्य समाज के प्रणेता भी इस दिन से जुड़े हुए है। इसलिए जैनियो और आर्य समाज के धर्मावलंबी भी इस दिन को विशेष महत्व देते है। 
        भैया दूज का महत्व आप सब जानते है। लेकिन भाईदूज की कहानी शायद आपको नामालूम हो। इसे यम द्वितीया  कहा जाता है। मथुरा में यमुना नदी में  इस दिन सगे  भाई -बहन साथ डुबकी लगाए तो उनकी अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। उनमे प्रगाढ़ प्रेम हमेशा बना रहता है। यम (यमराज  माने मौत के देवता ) और यमी दोनों भाई बहन की कहानी इस दिन से जुडी हुई है।उन्होंने इस दिन यमुना में डुबकी लगा कर लोगो के अंदर अकाल  मौत के भय को ख़त्म किया था। अपनी मौत के सामने बस नही चलता लेकिन अकाल मौत संसार में कोई नही मरना चाहता। 
          बिहारी लोगो का त्यौहार छठ पूजा भी आने वाली है यह पर्व 3 दिन तक भूखे -प्यासे रह कर किया जाता है। यह पूजा सूर्य की उपासना से जुडी है यह सबसे प्राचीन महाभारत काल से मनाई जाती है। प्राचीन काल में हम इंसानो की कम और प्रकृति की पूजा अधिक करते थे। सूर्य पुजा  और गोवेर्धन पूजा हमें प्रकृति के महत्व को समझाती है। ये त्यौहार हमारे जीवन को मजबूत बनने की प्रेऱणा भर कर हर्षोउल्लास से भर देते है। 
       

#durgarupini aj ki nari

                             दुर्गारुपिणी आज की नारी 

   
 आजकल देवी की पूजा हो रही है। जबकि भारत में बच्चीयो की संख्या बहुत कम हो गयी है। सरकार  के सारे प्रयास नाकाम हो रहे है। दिल्ली जैसे शहर में दिनोदिन लड़कियों की संख्या में इजाफा नही हो पा  रहा है। कन्या पूजन के लिए लडकिया नही मिल पाती। यदि लड़कियों की संख्या इसी तरह कम होती रही तो आने वाले समय में लड़को के लिए बहुए कहाँ से मिलेंगी। यदि बेटी नही होगी तो बहन ,भाभी ,माँ,बहु ,बुआ जैसे अनेको रिश्ते अपना अस्तित्व खो देंगे।  चीन और ताईवान जैसे देशो में लड़कियों की कमी के कारण वे दूसरे देशो से विवाह सम्बन्ध बनाने लगे है। सबसे पहले चीन में अल्ट्रासॉउन्ड मशीन का प्रयोग हुआ। उसके कारण चीन में 3 लड़को के ऊपर केवल 1 लड़की है। चीन में केवल अमीर लड़को की शादी सम्भव हो पाती है। 
        भारत में हरियाणा और पंजाब में लड़कियों की बहुत ज्यादा कमी हो गयी है। यहाँ भी लड़को को शादी करने के लिए दूसरे राज्यो से,गरीब  लडकिया खरीदनी पड़ती है। सभ्य घर की लड़की और खरीदी हुई लड़कियों में अंतर होता है। उनके संस्कार ,भाषा बिलकुल अलग होती है। सम्भ्रांत परिवार की ना होने ,परिवार से दूर होने का खामियाजा उन्हें सारी जिंदगी उठाना पड़ता है। उनके साथ मानवीय व्यवहार नही किया जाता। उनके साथ बुरा सलूक होने पर उनकी मदद के लिए कोई तैयार नही होता। वहाँ की सरकार ,कानून उनकी मदद नही कर पाता। ये सारे काम करने के बाद भी यौन गुलाम का जीवन जीती है। जिनका दर्द समझने वाला कोई नही होता। 
         हम सोचते है लड़कियों की संख्या कम होने से उनकी कीमत बढ़ जाएगी ऐसा नही हो सकता बल्कि उनके आभाव में अराजकता बढ़ जाएगी। लड़कियों के साथ अपहरण ,बलात्कार जैसी घटनाओ की तदाद बढ़ जाएगी। औरत की  जरूरत आदमी की मूल आवश्कताओ में से एक है। यदि सही ढंग से पूरी नही होगी तो वह इस जरूरत को गलत तरीके से पूरा करेगा। तब फिर से लड़कियों को पहरे में रखना शुरू कर दिया जायेगा जैसे आज से कई साल पहले तक औरत घर की चार दीवारी तक सीमित थी। उसकी शिक्षा,नोकरी के बारे में कोई सोचता भी नही था। उसका अस्तित्व न होने के सामान था। 
    मैने हरियाणा के एक इंसान से पूछा -"तुम्हारी कितनी संतान है।"
     उसने जबाब दिया -"चार। "
     मैने पूछा -"बेटी क़ितनी है। "
     उसने कहा -बेटी कोई, संतान नही होती। 
     फिर भी जबरदस्ती पूछने पर 
     उसने कहा -"दो."
     आज भी ग्रामीण इलाके में लड़कियों की गिनती संतान के रूप में की ही नही जाती। 
    में आपका ध्यान आज की पढ़ी लिखी नारी पर केंद्रित करना चाहती हूँ। आज की नारी पढ़ने के बाद अच्छी नोकरी करना पसंद करती है। वह शादी सही समय आने पर ही करती है अब उसका मूल लक्ष्य शादी नही रहा।  उसके बाद उसमे आत्मनिर्भरता आ जाती है। वह सबकी मदद करने के लिए सतत तैयार रहती है। मायका,ससुराल वह अपने गुणों से रोशन करना चाहती है। उसके गुणों की खुशबु अब घर तक सीमित नही रहना चाहती बल्कि वह दूर तक अपने गुणों का प्रसार करना चाहती है। 
      नारी अबला नही रही बल्कि सबल बन चुकी है। आपने नितीश कटारा कांड के बारे में सुना होगा। उसकी दर्दनाक मौत का गम पिता सहन नही कर सके। जल्दी दुनिया से कूच कर गए। उनकी माँ नीलम कटारा ने इतने ख़राब हालात का सामना करते हुए, सभी ताकतवर और सरमायेदार  गुनहगारो का सामना 14 साल तक करके उन्हें आजन्म करावास करवा के दम  लिया। नीलम कटारा की सारी जिंदगी सुखो का वरदान रही थी बुढ़ापे में बेटे का दुःख उन्हें तोड़ नही सका बल्कि उनकी मजबूती ने दुसरो में लड़ने की हिम्मत दे दी। 
      जो औरत घर को सुचारू रूप से चला सकती है। हर एक की सभी जरूरत पूरी कर सकती है। उसके एवज में किसी से कुछ नही मांगती बल्कि वही घर की धुरी होती है। इसके बाबजूद उसे सम्मान का हकदार नही समझा जाता। जब नारी के पास अधिकार मिल जाते है तब वह दुर्गा के समान असंभव कार्य भी कर दिखाती  हे। 
   वह शहर से दूर रह कर बेख़ौफ़ नोकरी करने से  डरती नही है। बड़े शहरो में आपको बहुत सारी लडकिया अपने दम पर काम करती दिखाई दे जाएँगी। उनके लिए घूमने  जाने के लिए किसी पुरुष साथी की जरूरत  नही होती बल्कि हर तरह की गाड़ियों में आपको किसी भी समय लडकिया दिखाई दे जाएँगी। 
      कुछ समय पहले मैने एक लड़कियों के घर में जिसमे कोई मर्द नही था। किसी लड़के को गलत व्यवहार करते देखा। उन चारो लड़कियों ने उसकी भरी सड़क पर पिटाई कर दी। पहले तो उस लड़के को पीटते देखकर मै हैरान रह गयी। बाद में उसके कृत्य पर बहुत हंसी आयी। 
      ये लडकिया किसी रिश्ते के लिए बोझ नही है। बल्कि हर रिश्ते के लिए  जरूरत बन गयी है। अभिभावक कर्मठ लड़की में अपना भविष्य देखने लगे है।2.  भाई अपनी काबिल बहन से मिलवाने में गौरव का अनुभव करते है।3  ससुराल वाले बहुओ को सम्मान देने लगे है। सभ्य लडकिया कुल की मर्यादा बढ़ाती है। जैसे काबिल लड़के के गुण सुनाइ देते है वैसे ही काबिल लड़कियों की तारीफ होने लगी है। ओलम्पिक में इस बार सारे मैडल केवल नारी शक्ति ने प्राप्त किये। 
   बहुत सारी जगहों  पर नारियो को आरक्षण दिया गया है। जैसे पंचायत में 33 % ने गाँवो की हालत बदल दी है।१  सूखे गाँवो में तालाब खुदवाये। 2 सूखती नदी को जिन्दा कर दिया।3  शराबीयो को रोकने के लिए शराबबंदी आंदोलन चलवाया।4  एक सरपंच ने शिक्षा के महत्व को समझ कर अपनी जमीन पर विद्यालय खुलवाया और शिक्षक का प्रबंध किया।5  सड़क बनवाई उनपर बिजली का प्रबंध करवाया।  पिंक गैंग  की सम्पत राय जैसी ग्रामीण और अशिक्षित  नारी जब हालत को बदल सकती है। तो शिक्षित नारी को आगे बढ़ने का मौका दे कर देखो यदि उसके जज्बे को उड़ान भरने का मौका मिले तो एक दिन वह इंदिरा गाँधी ,सुषमा स्वराज जैसी लौह नारी बन कर दिखा देंगी। इंदिरा गाँधी को प्रधानमंत्री, एक अबला कमजोर नारी समझ कर बनाया गया था। लेकिन उन्होंने उस ज़माने के धुरंधरो के सामने अपनी काबिलियत का सिक्का जमा कर, उन्हें राजनीती से अलग दूसरा रास्ता दिखा दिया। जिन्होंने उसे अपने हाथ की कठपुतली बनाना चाहा था। 
      नारी पर भरोसा रखने के सुखद परिणाम देखने में मिल रहे है। आज कानून और माहौल नारी  के साथ  है इस का फायदा हमें दूरगामी परिणाम दिखायेगा। नारी हमेशा से मेहनती ,अवगुणों से दूर रही है। वह एक साथ कई काम करने में सक्षम है।  उसकी भावुकता अब उसकी कमजोरी नही बल्कि उसकी ताकत के रूप में देखि जानी चाहिए। 
      

#kejrival or sabut

                         केजरीवाल और सबूत 

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 में उरी हमले पर नेताओ की एकता पर खुश हो रही थी कि इन्होंने एकदम इसके विरुद्ध कुछ नही कहा। लेकिन मेरी प्रसन्नता यकायक छिनभिन्न हो गयी। जबसे मैने अपने दिग्गज नेताओ के द्वारा सबूत मांगने के बारे में जाना। उनकी बयानबाजी और प्रेस को सम्बोधन करने से मेरा दिल क्षतिग्रस्त हो गया।
        दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पाकिस्तान के  हीरो बन गए है। सारे संचारतंत्र में उनकी फोटो और बयान मुख्य रूप से छापे जा रहे है। पाकिस्तानी  रिपोर्टर मैहर तरार के बयान "घर को जला  दिया घर के चिराग ने." मेरे मन को आहत कर दिया है। आप सरकार के मुख्यमंत्री के बयान पर बाकि विधायक लीपापोती करके उसे सही साबित करने में लगे है।
       कांग्रेस के दिग्गज नेता  संजय निरुपम ,दिग्विजय सिंह, रणदीप सुरजेवाला , पी चिदम्बरम सबूत मांग रहे है। प्रेस बुला रहे है। लेकिन सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी की चुप्पी से उनके प्रवक्ता पल्ला झाड़ कर खुद को अलग साबित करने में लगे है। कभी भी सुप्रीम कमान की इजाजत के बिना इन नेताओ में इतना होंसला नही आ सकता। कही ना कही इन्हें बढ़ावा देने वाले ऊपर बैठे लोग है। ये दोतरफा नीति अपना रहे है। 
        इनके लिए भारत की सुरक्षा मायने नही रखती बल्कि सिर्फ अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए देश को ख़त्म कर देने में भी पीछे नही हटेंगे। इससे पहले कभी किसी पार्टी ने सेना के अभियान के सबूत इस तरह मांगने की खबर नही पढ़ी।
      हमारी सेना के १९ सेनिको की शहादत इनके लिए झूठ है। उनके शब देखकर यकीं नही हो रहा। यदि सबूत की वीडियो रील दिखाई जाये तभी उन्हें यकीन आएगा।
        आपको जानकर हैरानी होगी जब आप  के एक सांसद ने संसद भवन की वीडियो बना कर चैनल को सोंप दी थी। उस वीडियो की आलोचना होने पर ( संसद की सुरक्षा को लीक ) केजरीवाल जी ने अपने नेताओ को फंसाने का षड्यंत्र करार दिया था।
       १३ दिसम्बर को संसद  पर हमला होने का वाकया भुला दिया गया था। यदि सांसद आतंकवादियो की गिरफ्त में आ जाते तो पूरे भारत का क्या होता जिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें बचाते हुए अपनी जान गवाई। उसका ख्याल नही आया। उस के बाद पूरे संसद भवन की सुरक्षा के इंतेजाम बदल दिए गए थे।
       हमारे सुरक्षा तंत्र में सेंध लगाने में  आतंकवादी हमेशा तैयार रहते है। यदि इस कार्यवाही की वीडियो दिखा दी जाये तो सभी को उन सेनिको के हथियार ,काम करने के तरीके ,नाम ,शक्ल, रणनीति का पता चल जायेगा। जिसका नुकसान देश को और उन सेनिको को  उठाना पड़ेगा। 
       कहा जाता है "मारने वाले का हाथ पकड़ा जा सकता है लेकिन झूठे की जबान नही पकड़ी जा सकती। "भारत बरसो से पाकिस्तान को सबूत सौपता आया है। उसने उसे हमेशा झुठला दिया। भारत ने पाकिस्तान समेत 22 देशो को सर्जिकल ऑपरेशन के सबूत सौपे उन्होंने इन सभी को सच्चा माना। लेकिन पाकिस्तानी झूठ के लिए भारतीय विरोधी पार्टियों के नेताओ को क्या कहे। वे पाकिस्तान के हाथ पक्के कर रहे है।
      रशिया ,अमरीका ,ब्रिटेन,फ़्रांस जैसे देशो के सेटेलाइट भारतीय सर्जिकल ऑपरेशन  को पकड़ने  में सक्षम है। नई तकनीको के माध्यम से झूठ फटाफट पकड़ा जा सकता है। उन्होंने इस कार्यवाही की आलोचना नही की तो भारतीय नेताओ को यकीं क्यों नही आ रहा।
     सर्जिकल ऑपरेशन के बाद  पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाजशरीफ की रक्षा सचिव की बैठक बुलाना ,सेना के जनरल को सचेत रहने को कहना,सारी सीमाओ पर चौकसी बढ़ा देना इस बात के सबूत है।
       युद्ध की कार्यवाही हमेशा से गुप्त रखी जाती रही है। सेना के भेद लेने के लिए जासूस छोड़े जाते है। सरकारे यदि इस तरह अपने भेद खोलने लगे तो देश को परतंत्र होते देर नही लगेगी।
      नेताओ द्वारा सबूत मांगना किसी एक पार्टी पर शंका जाहिर करना नही है बल्कि हम अपने देश के सेनिको का मनोबल गिरा रहे है। जो हमारी सुरक्षा के लिए घर -बार छोड़ कर  दिन रात  सीमाओ पर जाग  कर रखवाली कर रहे है तभी हम घरो में चैन की नींद सो रहे है।

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...