युगांधार यानि युग के अंधकार को दूर करने वाले कृष्ण
कृष्ण का जन्म जिस दिन हुआ था । उस दिन पर सभी लोग खुश होकर त्योहार के रूप मे मनाते है । कोई भी इंसान का जन्मदिन उसके कार्यों के करने के कारण निर्धारित होता है ।
कृष्ण का जन्म हमसे भी ज्यादा दुखदायी हालत मे हुआ था । सोच के देखो जिसके माता -पिता जेल मे बंद हो । जिसके सात भाई -बहनों को जन्म होते ही मार दिया गया हो । उसके भी बचने के उपाय न हो ।खराब मौसम के होते हुए उसे रातों -रात जेल से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुचाया गया ।
उसके बाद नन्हे से कृष्ण को मारने के अनेक बार उपाय किए गए । आप सोच कर देखिए एक दुधमुहा बच्चा अपनी रखा करने मे कितना समर्थ हो सकता है । लेकिन उन्हे जींदा रहने के लिए हर पल संघर्ष करना पदा । वह हमेशा अपने संबंधियों के कारण खतरे मे रहे ।
अंत तक उनका जीवन सुरक्षित नहीं था । अंत मे एक शिकारी के द्वारा उनका वध हो गया । कहा जाता है -वह शिकारी भी उनका पुत्र था । जिसका आभास कृष्ण और उस शिकारी को नहीं था ।
हम हमेशा अपने जीवन को दुखदाई समझते है । भगवान और दुनियाँ को कोसते रहते है । लेकिन हम जींदा है । तो हमे बचाने वाले कोई हमारे संबंधी अवश्य रहे है । वरना हम इस काबिल नहीं थे कि अपनी कोशिशों से जींदा रह सके ।
उनका जन्म भी साधारण घर मे हुआ था । लेकिन युग को एक नया रूप देने के कारण उन्हे कई नामों से पुकारा जाता है । उसमे से उनका एक नाम युगांधार था । जिसका मतलब संसार के अंधकार को दूर करने वाला । आप सोच के देखो जिस युग मे कृष्ण का जन्म हुआ था । उसमे रिश्ते नातो का जो रूप उन्होंने देखा था । उसके अनुसार इंसान का दिल टूटना लाजमी था । लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी हमेशा संसार को अच्छे रूप मे चलाने के लिए कोशिश करते रहे ।
भले ही उन्हे महाभारत जेसे युद्ध का सामना करना पदा । अंत मे संसार को अंधकार मे से निकालने मे सफल हो सके । इसलिए उन्हे आज हम भगवान के रूप मे पूजते है ।
भगवान के रूप मे वही इंसान पूजा जाता है जो हालत को बदलने की क्षमता रखता है न कि हालत के सामने टूट जाता है । जो हालात के सामने टूट जाता है समय उनको भूला देता है । युगों तक उन्हे ही याद किया जाता है । जो हमे प्रेरणा दे सकते है । जोश भर सकते है । जिसके कारण हम हारने से नहीं डरते है ।

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