फेरी का सफर
मै पोर्टबलेअर से हैवलॉक द्वीप के लिए फेरी से यात्रा करने निकली। उसके लिए मुझे टिकट खरीदनी पड़ी। उसकी लाइन बहुत लम्बी थी। उसके लिए हमें करोना टेस्ट की रिपोर्ट और ID प्रूफ भी देना पड़ा। वहां हमसे ज्यादा हर स्थान पर ID प्रूफ और करोना टेस्ट रिपोर्ट की जरूरत पड़ी। आप भी इन जगहों पर जाने का इरादा रखते है तो ID प्रूफ की बहुत सारी फोटोस्टेट लेकर जाना। पैसो के आलावा इनका होना बहुत जरूरी था। हम सोच रहे थे करोना काल में लोग घर से नहीं निकल रहे होंगे। लेकिन इस लाइन में हमें टिकेट के लिए दो घंटे लग गए।आप ही सोचिये यहां कितनी भीड़ होगी।
यहाँ जाने पर सभी के चेहरे पर मास्क लगाना जरूरी था। लेकिन तब तक कोई भी करोना मरीज इस द्वीप पर नहीं था एयरपोर्ट पर पता चलते ही उसे वापिस भेज दिया जाता था । इसलिए हम आजादी से घूम सके। होटल आदि स्थानों पर भी अच्छी तरह से सेनिटाइज़ किया जा रहा था।
पोर्टब्लेयर की सैर करने के बाद हम द्वीपों की सैर करने निकले। वहां एक द्वीप से दूसरे द्वीप पर जाने के लिए फेरी की जरूरत पड़ती है
फेरी में घुसते हुए हमें एक थैली दी गई। मुझे बहुत हैरानी हुई ये ऐसा क्यों कर रहे है। उसका मतलब मुझे बाद में समझ आया। जब फेरी चलनी शुरू हुई तभी अधिकतर लोग कमरे से बाहर निकल गए। उन्हें देखकर शुरू में मुझे जलन हो रही थी। इन्हे जल्दी टिकट मिल गयी सब खिड़की के साथ बैठ गए। और हमे बीच की सीट पर बैठना पड़ रहा है। फेरी के चलते ही आधी सीट खाली हो चुकी थी।
बाद में पता चला सबको उलटी हो रही है। मुझे उलटी की कोई परेशानी नहीं है। लेकिन सबको उलटी करते देखकर मेरा भी जी घबराने लगा। हर तरफ बंद कमरे में गंध फ़ैल गयी थी। मै भी बंद कमरे से निकल कर बाहर खुले में आ गयी। जो लोग कमरे से गायब हुए थे वे भी मुझे बाहर खड़े हुए मिले।
लेकिन इसके बाद वाले सफर में मैने किसी को थैली देते नहीं देखा। इस तादात में लोगो को उलटी करते भी नहीं देखा।
मेने अनेक बार फेरी का सफर किया है लेकिन मेरी कभी तबियत खराब नहीं हुई लेकिन बंद फेरी के कारण मेरा जी मिचलाने लगा था। आप भी इसके लिए तैयार रहना।