#ajmer (rajsthan) me desert safari

      राजस्थान में  डेजर्ट सफारी कई स्थानों पर होती है। लेकिन मुझे पहली बार अजमेर के पास पुष्कर में इसका मौका मिला। जिसके द्वारा मुझे महसूस हुआ ये कैसी दुनियां है जहां के तापमान में बहुत अंतर है।
       में  दिल्ली से जिस समय अजमेर गई थी। उस समय दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी पड़  रही थी। हम डेज़र्ड सफारी के नाम से डर  रहे थे। इतनी सर्दी में  साऱी  रात खुले आसमान के नीचे कैसे बिताएंगे। यहाँ हम दिल्ली में कमरे बंद करके रजाई में दुबक के कंपकंपा रहे है। कंपकंपी दूर करने के लिए कुछ जलाना पड़  रहा है। मैने  अपनी शंका दुसरो को बताई उन्होंने मुझे बताया अजमेर में खुशनुमा मौसम है। लेकिन मुझे यकीन  नहीं हो रहा था।
        जिस दिन मुझे   शताब्दी ट्रैन  से जाना था उस सुबह मेने अपने सबसे गर्म कपड़े निकाले जिससे इस सर्दी का मुकाबला कर सकूं। ट्रैन में बैठने के बहुत देर तक हमें ठण्ड लगती रही। जब हम अजमेर के पास पहुंचने लगे ,तब हमें गर्मी का अहसास होने लगा लेकिन मेने अपनी जैकेट नहीं उतारी। अन्य लोगो ने अपने गर्म कपड़े कम करने शुरू कर  दिये  थे।
       अजमेर में जिनसे मिलने गए थे। उस घर में सबने सूती कपड़े पहन रखे थे। गर्म कपड़ो का नामोनिशान नहीं था। हमें देखकर उन्हें बहुत हैरानी हो रही थी। यहां इतनी गर्मी होगी हमारी सोच से बाहर  था। .यहाँ घर में खूब धूप  आ रही थी। मुझे गर्म स्वेटर छोडो अपना गर्म सूट  भी फालतू लग रहा था।
       हम दूसरे दिन दोपहर के समय पुष्कर के लिए रवाना हुए। हमें गाड़ी में बहुत गर्मी लग रही थी।
         दिन बीतते ठण्ड का अहसास होने लगा। हमारा सफारी का इंतजाम एडवेंचर रिसोर्ट में था। वहां पहुंचते ही चाय का इंतजाम था। जब हम वहां की केंटीन में पहुंचे तब सभी को बहुत गर्मी लग रही थी। हमारे कपड़े एक एक करके कम   होते गए। दिल्ली के सभी लोगो का गर्मी के कारण बुरा हाल  था। बच्चे गर्मी के कारण रो रहे थे। जबकि हम सूती कपड़े ले कर नहीं गए थे।  चाय पीने के   बाद हमने अपने कमरों में आराम किया। आप लोगो से अनुरोध है आप अपने साथ साधारण गर्मी के कपड़े लेकर जरूर जाना।
              फिर शाम के समय चाय के साथ पकोड़ो का इंतजाम था। इतने सारे  लोगो के लिए टेंटनुमा केंटीन में समय लग रहा था। धीरे -धीरे सब को ठण्ड सताने लगी। सभी अपने कमरों में जाकर गर्म कपड़े पहन कर आये। यहाँ के पकोड़े अलग तरह के होते है। यहां सब्जियों को बहुत बारीक़ काट कर बनाया जाता है। देखकर पहचानना मुश्किल होता है। हम किसके पकोड़े खा रहे है।
       इसके बाद बोनफायर के पास पार्टी का इंतजाम था। सभी   रात  के हिसाब से कपड़े पहन कर तैयार हुए। वहां पर  राजस्थानी नृत्य का इंतजाम  था।उनका नृत्य लाजबाब था।  उनके नृत्य  ने हमे भी राजस्थानी रंग में रंग डाला हम उन्हें देखते -देखते कब उनके साथ नृत्य करने लगे पता ही नहीं चला ।  तीन घंटे तक उनका नृत्य देखते हुए खाने का समय हो गया।
        खाने में हमारे लिए राजस्थानी खाना दाल -बाटी चूरमा और दिल्ली वालो के हिसाब से रोटी सब्जी वाला खाना भी था। सभी खानो में राजस्थानी स्वाद पहचाना जा रहा था। खाने के बाद भी हम बोनफायर के पास आ गए और हंसी मजाक करते रहे  .सर्दी और गर्मी दोनों का अहसास हमें साथ -साथ हो रहा था। लगभग एक बजे  हम अपने कॉटेज में सोने आ गए।
       हमने वहां पतले कंबल देखे तो पहले ही और कंबल मंगवा लिए। जिन्होंने नहीं मंगवाए उनकी रात ठिठुरते हुए बीती।क्योंकि इतनी रात को किसे जगाकर कम्बल का इंतजाम किया जाये।  वहां पर कॉटेज और टेंट दोनों तरह के इंतजाम थे। टेंट वालो को ठण्ड ज्यादा लगी।
      सुबह बहुत ज्यादा ठण्ड लग रही थी। मानो हम फिर से दिल्ली पहुंच गए है। लेकिन जैसे ही सूरज निकला ठंडक दूर होती चली गई।
      सुबह तैयार होकर पूरी सब्जी का खाना खाकर, हम ऊंट की सवारी के लिए निकल पड़े। उन्होंने बहादुर लोगो के लिए  ऊंट के ऊपर बैठने का इंतजाम कर रखा था।  बाकी  आरामदायक जिंदगी जीने वालो के लिए गाड़ी का भी इंतजाम था। यहाँ की ऊंटगाड़ी वालो ने हमें बहुत दूर तक तसल्लीबक्श  घुमाया।
         एक स्थान पर राजस्थानी कपड़े पहन कर फोटो खिचवाने का इंतजाम था।हमारे कुछ साथियो ने राजस्थानी कपड़े पहन कर फोटो खिचवाये। यहाँ भी राजस्थानी गानो  पर नृत्य करने वालो ने दुबारा से हमारा मनोरंजन किया।
        रेगिस्तान में चलने वाली बाइक जैसी गाड़िया  थी। घोड़े का इंतजाम भी था। उस जगह पर राजस्थानी स्वाद वाली चीजे भी बिक रही थी। यहाँ आकर डेसर्ट सफारी का पूरा मजा आ गया।  

#narmada river flows between marble rocks

     संगमरमरी चट्टानों के बीच बहती नर्मदा नदी 

       

   जबलपुर में भेड़ाघाट बहुत सुंदर संगमरमरी  सौंदर्य का प्रतीक  है। मैने  भेड़ाघाट केवल तस्वीरों में देखा था। उसमे सुंदरता निखर कर आती थी। जैसे ताजमहल का सौंदर्य हमे अपनी  तरफ  आकर्षित करता है। लेकिन भेड़ाघाट की चट्टानें उतनी सुंदर नहीं दिखाई देती क्योंकि वह बिलकुल प्राकृतिक रूप में है। जिनपर पर्यावरण की गंदगी ने उसे बदरंग  कर दिया  है। जो संगमरमर हमे आसपास दिखाई देता है।  वह तराशा हुआ और घिसाई से चमकाया हुआ होता है। मेने उसी तरह के संगमरमर की कल्पना की थी। लेकिन जिस [प्रकार खदान से निकला हुआ हीरा  साधारण लोग पहचान नहीं पाते  वैसे ही यहां का संगमरमर होता है।
     जबलपुर में चट्टानों की विविधता दिखाई देती है। यहां आकर कुदरत को नमन करने का मन करता है। संगमरमर के अनेक रंग दिखाई देते है। संगमरमर अनेक रंग जैसे गुलाबी ,हरापन, स्लेटी और  अलग -अलग रंगो के मिश्रण से युक्त दिखाई देता है।
       पहले हमने ऊपर  से  कार के द्वारा इन चट्टानों का नजारा देखा। जिसे देखकर चकाचौंध  हो गए। इन चट्टानों के बीच  से बहती नर्मदा नदी का सौंदर्य मन को लुभा रहा था। कही गुलाबी संगमरमरी  चट्टानें हमें पहले साधारण लगी थी। लेकिन बाद में समझ आया ये भी संगमरमर है।
       भेड़ाघाट से नाव  के सफर के लिए हमें बहुत सारी  सीढिया  उतरनी पड़ी। सीढ़ियों के दोनों तरफ लोगो ने संगमरमर का सामान बेचने के लिए  रखा हुआ था इस तरह की चीजे पत्थर से बनाई जा सकती है। इसकी कल्पना भी नहीं की थी।
        हमने नाव  में बैठकर भेड़ाघाट की सैर की. उसका मजा बिलकुल अलग था। क्योंकि नीचे  से चट्टानों का बृहद आकर  प्राकृति  की विराटता के दर्शन करा रहा था। उसके सामने हम निमित्त मात्र है।  मुझे समझ नहीं आ रहा था इतनी बड़ी चट्टानों के बीच में बहुत सारे  छेद  कैसे हुए। ये इंसानी कारनामा नहीं हो सकता। ये छेद  नीचे से ऊपर तक दिखाई दे रहे थे।
     हमारा मल्लाह छोटी उम्र का और बातचीत में निपुण था। उसने अपनी मजेदार बातो से हमारे सफर को मनोरंजक बना दिया था। वह उन चट्टानों में कही कार ,पेड़, टैंक, बंदर, फटे   हुए कपड़ो में अभिनेत्रियों के कपड़े की कल्पना करवा रहा था। इन जगहों पर कहाँ किस फिल्म की शूटिंग हुई उसका वर्णन भी कर रहा था  उसकी मनोहारी बातो से हम हँसते -हँसते बेहाल हुए जा रहे थे। नाव  की सैर की टिकट 300  रूपये थी। लेकिन नाविक ने अपने मजाकिया लहजे के कारण सबसे 50  रूपये अलग से वसूल किये। लोगो ने उसके तरीके  से खुश होकर नानुकुर नहीं किया। फालतू पैसा वसूल करने के चककर  में उसने नाव को सही जगह से कुछ दूरी  पर उतारा।
       मेने दोपहर और शाम के समय भेड़ाघाट की सुंदरता निहारी थी। लेकिन चांदनी रात की कल्पना में डूबी रही। जब पूरा चाँद इन चट्टानों पर अपनी चांदनी बिखेरता होगा तब मन मदहोश हो जाता होगा।
       

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...