#visit brahmputre river

                 ब्रह्मपुत्र नदी की सैर 



  मणिपुर से जब मै गोहाटी पहुंची तो सब कुछ बदला हुआ था। वहाँ  एयरपोर्ट से पलटन बाजार बहुत दूर था। एयरपोर्ट के आस -पास के इलाके में बहुत हरियाली थी। वहां से लगभग एक घंटे बाद असम सरकार की बस में बैठ कर पलटन बाजार पहुंचे इस बस का किराया केवल नब्बे रूपये था दूरी के हिसाब से वाजिब था। वरना  हमे कई गुना ज्यादा पैसे देने पड़ते। हमें सरकार का प्रबंध बहुत अच्छा लगा।
       आबादी में पहुंचते ही हरियाली गायब हो गई। हर तरफ जाम  दिखाई देने लगा।यहाँ पहुंचने के बाद असमी  चेहरे पहचानने मुश्किल लगने लगे। यहाँ की भीड़ में रंग का गोरापन भी गायब हो गया। हम केवल भाषा से असमी  लोगो को पहचानने  में सक्षम हो पा रहे थे।यहाँ की आबादी में सभी तरह के लोग दिखाई दे रहे थे। जबकि मणिपुर में गैर मणिपुरी बहुत ही कम दिखाई देते है। 
         मुझे ब्रह्मपुत्र नदी देखने का बहुत मन था। मैने कभी इस नदी को नहीं देखा था। जब मुझे पता चला ये नदी हमारे बाई तरफ बह  रही है। तब मै  रोमांचित हो उठी। सड़क के साथ -साथ इस नदी के बृहद आकार की  मैंने कल्पना नहीं की थी।  इस नदी और सड़क के बीच  में रेलिंग लगाई गई थी। उसके किनारे पर घूमने और खेलने के लिए पार्क बने हुए थे। नदी के किनारे पर बैठने की अच्छी व्यवस्था थी। उसके साथ ही खाने -पीने की अनेक जगह बनी हुई थी। अपनी हैसियत के मुताबिक आप जिंदगी के मजे ले सकते थे। कई जगह नदी के दर्शन करने की मुफ्त व्यवस्था थी तो कई जगह नदी के  दर्शन करने के लिए पैसे भी देने पड़ते थे।
        ये नदी बहुत बड़ी है। इस नदी को पार करने के लिए फेरी चलती है जिसके लिए कम से कम किराया पांच रूपये है। जो मुझे ज्यादा प्रतीत नहीं हुआ। हमारा होटल भी नदी के किनारे था। जहाँ से मुझे इस नदी को देखना बहुत अच्छा लग रहा था।
     फेरी की सवारी मैने  बहुत बार की हुई है। इसका मुझे चाव नहीं था। मेने इससे पहले कभी क्रूज की सवारी नहीं की थी। मैने  अपना शौक पूरा करने का इरादा बनाया। क्रूज में एक घंटे के सफर की कीमत साढ़े  तीन सौ रुपए थी। आप अंदाजा लगा सकते है कहाँ पांच रूपये और कहाँ साढ़े  तीन सौ रूपये।  लेकिन शौक के सामने कंजूसी ने दम  तोड़ दिया।
          शाम के समय अस्त होते हुए सूर्य के  समय को हमने चुना। क्रूज के अंदर कुर्सी और मेज बिछी हुई थी हमने अपनी सहूलियत के हिसाब से छोटी मेज चुनी क्योंकि हम केवल दो जने थे। वहां पर परिवार के हिसाब से बड़ी टेबल भी थी। उसमे आप छोटी और बड़ी दोनों तरह की पार्टी कर सकते थे। वहां पूरा रेस्टोरेंट और बार खुला हुआ था। लेकिन उसमे बैठ  कर खाने -पीने  के हिसाब से बिल ज्यादा रखा हुआ था। उसके बिल देखकर मैने खाने -पीने का इरादा स्थगित कर दिया।
        वैसे हमने क्रूज में चढ़ने से पहले वहां के स्ट्रीट फ़ूड खा रखे थे। क्योकि हमें पांच बजे का समय बताया  गया था। हमने सोचा पांच बजे क्रूज चला जायगा। इसलिए हम साढ़े  चार बजे ही पहुंच गए.लेकिन टिकट देने वाले ने बताया क्रूज साढ़े  पांच बजे चलेगा।  अब हमें लगभग एक घंटा बिताना था इसलिए हम जैसे चटोरो के लिए स्ट्रीट फ़ूड से अच्छा समय पास करने का तरीका और क्या हो सकता था।  हमारे लिए वहां की भेलपुरी, समोसे और गोलगप्पो  का जायका लेना भी बहुत जरूरी था। उनके मसाले हमारे स्वाद से अलग थे।  इनके मजे लेते हुए कब हमारा पेट भर गया पता ही नहीं चला।
            उत्तर -पूरब में अँधेरा जल्दी हो जाता था।ढलते हुए सूर्य को नदी पर देखना मुझे रोमांचित कर रहा था समझ नहीं आ रहा था बाहर का नजारा देखू  या अंदर का।  हमारे क्रूज में बैठते ही डीजे और गायन के कार्यक्रम शुरू हो गए। बाहर बहुत बड़ी  और फैली हुई नदी, अंदर धीमी रौशनी में बजता हुआ गाने -बजाने और नाचने का माहौल खुशनुमा अहसास दिला रहा था।  बहुत सारे  दम्पति ऐसे माहौल में उत्साहित होकर नाचने लगे। बच्चे तो शुरू से आखिर तक नाचते ही रहे।  बच्चो को देखकर लग रहा था यदि मै  भी इनकी तरह नाच सकती तो कभी मुझे मोटापे की चिंता नहीं होती
         इन सब को देखते हुए कब अँधेरा उतर  आया कब मैने चांदनी रात का मजा लेना शुरू कर दिया पता ही नहीं चला चांदनी रात में आसमान का प्रतिबिम्ब पानी पर उत्तर आया था आस -पास की रौशनी, लग रहा था धरती पर नहीं बल्कि मै  आकाश में भृमण  कर रही हू। इस रहस्य्मयी दुनिया में कितना समय बीत गया पता ही नहीं चला। मै  हर पल को सहेजने में लगी रही। पता नहीं इस अद्भुत स्वर्ग में दुबारा आने का मौका कब मिलेगा। 
           मणिपुर में पिछले कई साल में कई बदलाव दिखाई दे रहे है!पहले मुझे इंफाल के एयरपोर्ट, विधानसभा, मुख्यमंत्री निवास तक की सड़कें टूटी दिखाई दी थी !मुझे देखकर हैरानी हो रही थी है लोग इन मुख्य सडको की देखभाल नहीं कर पा रहे है तो छोटी सडको का कितना बुरा हाल होगा! इस बार आने पर मुझे इन सड़कों की अच्छी हालत मिली है!लेकिन छोटी सड़कें अभी भी बदहाल है!           यहां की नालिया खुली हुई है! सीवर प्रणाली सही नहीं है! लेकिन नालियों को साफ करने की जिम्मेदारी बुलडोजर करता है !मैने पहली बार छोटी गलियों में नालियो की सफाई बुलडोजर से होती देखी!साथ ही यदि किसी घर का सामान उनकी चारदीवारी से बाहर दिखाई दे रहा है तो उसे भी बुलडोजर तोड़ने में गुरेज नहीं कर रहा था!       हमारे घर के सामने एक मकान बन रहा था !बुलडोजर के आने से पहले वहां लाउडस्पीकर से घोषणा करवाई गई ! मुझे भाषा तो समझ नहीं आ रही थी लेकिन उसके एकदम बाद चहल - पहल होती दिखाई दी! सबने अपने घर का सामान उठाना शुरू कर दिया! यहां तक निर्माणाधीन घर का भी सारा सामान अंदर रख लिया गया!      आरम्भ में मुझे बहुत हैरानी हो रही थी! कि लोगो ने घर के गेट भी बहुत सारी सड़क छोड़ कर अंदर बनाए थे! सड़कों पर सीढ़ियां या स्लोप नहीं थे!कई घरों के अंदर दस गाडियां खड़ी करने की भी जगह थी!           इनके घरों में तुलसी के विरवे बीच चोक में बनाए गए थे जिनके चारो तरफ घूम कर पूजा की जा सकती है ! इन घरों में अलग से एक मंदिर की स्थापना की जाती है!इसके लिए एक कमरे के बराबर स्थान रखा जाता है! उसके पीछे परिक्रमा करने की जगह भी छोड़ी जाती है !        इन घरों में छोटे तालाब बनाए जाते है! जिसमें मछलियां और बतख पाली जाती है! इन्होंने तालाब बनाकर बारिश के पानी का सही उपयोग किया है! लेकिन सरकार कि तरफ से पानी सही रूप में नहीं दिया जाता इस कारण पानी के लिए हर हफ्ते टैंकर मंगवाया जाता है! पानी की बहुतायत होने पर भी सप्लाई का तरीका   सही नहीं है!बारिश बहुत होती है! आपको अनेक स्थानों पर पानी के तालाब मिल जाएंगे !लेकिन पीने और दैनिक जरूरतों के लिए पानी खरीदना पड़ता है!जो बहुत साफ नहीं होता !     यहां की छते ढलावदार टीन की बनाई जाती है !यदि इनके पानी को इकट्ठा कर लिया जाए तो इनके सालभर की जरूरत पूरी हो जाए!इन्हें पानी के संरक्षण का तरीका( waterharwesting) पता नहीं है !          यहां की हरियाली मन को मोह लेती है हर घर में सौ- डेढ़ सौ गज में हरियाली लगाई जाती है! हरियाली से हमारी आंखे तृप्त हो जाती है!         यहां अनेक पिकनिक की जगह है!शिलायपोंग,अंद्रो जैसी हरी भरी जगहों के बीच में झील से मजा दुगुना हो जाता है!बच्चो के लिए अनेक झूले  आदि भी बनाए गए है!     यहां की गाड़ियों के लिए प्रदूषण के नियंत्रण के लिए कोई कार्यवाही नहीं होती इसलिए गाड़ियों में से काला धुआं निकलता हुआ दिखाई देता है! इंफाल जैसी जगह पर प्रदूषण पता चलता है!       मेरे लिए यहां रोज ही बारिश हो रही है लेकिन यहां के लोग कह रहे है पहाड़ों पर बारिश नहीं है इसलिए खाने का सामान महंगा हो जाएगा! इम्फाल नहीं का पानी भी तली को छू रहा है!समझ नहीं आ रहा यहां की बारिश का पानी कहां जाता है!         हल्की सर्दी के बीच मणिपुर का मौसम बहुत सुहावना होता है ! धूप जब निकलती है तब उसकी तपिश असहनीय होती है!यहां के लोग अधिकतर छतरी लेकर चलते है !वह धूप और बरसात दोनों में जरूरी है!अभी भी बाहर बारिश हो रही है! https://madhupathak.blogspot.com/2019/09/waterharwesting.html

           मणिपुर में पिछले कई साल में कई बदलाव दिखाई दे रहे है!पहले मुझे इंफाल के एयरपोर्ट, विधानसभा, मुख्यमंत्री निवास तक की सड़कें टूटी दिखाई दी थी !मुझे देखकर हैरानी हो रही थी है लोग इन मुख्य सडको की देखभाल नहीं कर पा रहे है तो छोटी सडको का कितना बुरा हाल होगा! इस बार आने पर मुझे इन सड़कों की अच्छी हालत मिली है!लेकिन छोटी सड़कें अभी भी बदहाल है!           यहां की नालिया खुली हुई है! सीवर प्रणाली सही नहीं है! लेकिन नालियों को साफ करने की जिम्मेदारी बुलडोजर करता है !मैने पहली बार छोटी गलियों में नालियो की सफाई बुलडोजर से होती देखी!साथ ही यदि किसी घर का सामान उनकी चारदीवारी से बाहर दिखाई दे रहा है तो उसे भी बुलडोजर तोड़ने में गुरेज नहीं कर रहा था!       हमारे घर के सामने एक मकान बन रहा था !बुलडोजर के आने से पहले वहां लाउडस्पीकर से घोषणा करवाई गई ! मुझे भाषा तो समझ नहीं आ रही थी लेकिन उसके एकदम बाद चहल - पहल होती दिखाई दी! सबने अपने घर का सामान उठाना शुरू कर दिया! यहां तक निर्माणाधीन घर का भी सारा सामान अंदर रख लिया गया!      आरम्भ में मुझे बहुत हैरानी हो रही थी! कि लोगो ने घर के गेट भी बहुत सारी सड़क छोड़ कर अंदर बनाए थे! सड़कों पर सीढ़ियां या स्लोप नहीं थे!कई घरों के अंदर दस गाडियां खड़ी करने की भी जगह थी!           इनके घरों में तुलसी के विरवे बीच चोक में बनाए गए थे जिनके चारो तरफ घूम कर पूजा की जा सकती है ! इन घरों में अलग से एक मंदिर की स्थापना की जाती है!इसके लिए एक कमरे के बराबर स्थान रखा जाता है! उसके पीछे परिक्रमा करने की जगह भी छोड़ी जाती है !        इन घरों में छोटे तालाब बनाए जाते है! जिसमें मछलियां और बतख पाली जाती है! इन्होंने तालाब बनाकर बारिश के पानी का सही उपयोग किया है! लेकिन सरकार कि तरफ से पानी सही रूप में नहीं दिया जाता इस कारण पानी के लिए हर हफ्ते टैंकर मंगवाया जाता है! पानी की बहुतायत होने पर भी सप्लाई का तरीका   सही नहीं है!बारिश बहुत होती है! आपको अनेक स्थानों पर पानी के तालाब मिल जाएंगे !लेकिन पीने और दैनिक जरूरतों के लिए पानी खरीदना पड़ता है!जो बहुत साफ नहीं होता !     यहां की छते ढलावदार टीन की बनाई जाती है !यदि इनके पानी को इकट्ठा कर लिया जाए तो इनके सालभर की जरूरत पूरी हो जाए!इन्हें पानी के संरक्षण का तरीका( waterharwesting) पता नहीं है !          यहां की हरियाली मन को मोह लेती है हर घर में सौ- डेढ़ सौ गज में हरियाली लगाई जाती है! हरियाली से हमारी आंखे तृप्त हो जाती है!         यहां अनेक पिकनिक की जगह है!शिलायपोंग,अंद्रो जैसी हरी भरी जगहों के बीच में झील से मजा दुगुना हो जाता है!बच्चो के लिए अनेक झूले  आदि भी बनाए गए है!     यहां की गाड़ियों के लिए प्रदूषण के नियंत्रण के लिए कोई कार्यवाही नहीं होती इसलिए गाड़ियों में से काला धुआं निकलता हुआ दिखाई देता है! इंफाल जैसी जगह पर प्रदूषण पता चलता है!       मेरे लिए यहां रोज ही बारिश हो रही है लेकिन यहां के लोग कह रहे है पहाड़ों पर बारिश नहीं है इसलिए खाने का सामान महंगा हो जाएगा! इम्फाल नहीं का पानी भी तली को छू रहा है!समझ नहीं आ रहा यहां की बारिश का पानी कहां जाता है!         हल्की सर्दी के बीच मणिपुर का मौसम बहुत सुहावना होता है ! धूप जब निकलती है तब उसकी तपिश असहनीय होती है!यहां के लोग अधिकतर छतरी लेकर चलते है !वह धूप और बरसात दोनों में जरूरी है!अभी भी बाहर बारिश हो रही है!

आज का मनीपुर

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...