#MONSTER POLICE WONDERS

                          धन्य ! पुलिस का चमत्कार 

   
  आज के आधुनिक युग में इतनी सीधी लड़की मिलना बहुत कठिन है। रेशमा हर समय पति के इशारो पर चलने की कोशिश  करती।  जरा सी गलती पर उसका पति आपे  से बाहर हो जाता। 
    बेचारी रेशमा हर समय डरी सहमी रहती थी। उसका पति राकेश उसके सीधे-पन  के कारण उसपर और ज्यादा हावी होता जा रहा था। उसकी फरियाद की सुनवाई कही नहीं हो पा  रही थी। 
      उसका कोमल मन धीरे - मुरझाता जा रहा था। उसकी आँखों के आंसू खुद ही सूख जाते   थे। उसका पति बेलगाम हो गया था। जो भी बीच  में आकर उसे समझाने की कोशिश करता उसे ही अपमानित करता था।
       राकेश घर में छोटा था। सभी उससे उम्र में बड़े थे. सभी उससे इज्जत की उम्मीद करते थे।  जरा सा उसके खिलाफ बोलते ही वह सारी मर्यादाये तोड़ देता था। सामने वाले के लिए अपनी इज्जत बचाना मुश्किल हो जाता था। सभी परिवार के लोग इज्जतदार होने के कारण उसका सामना करने से बचते थे। सभी को अपनी इज्जत प्यारी थी। ऐसे उज्जड इंसान का सामना करना सभी के लिए बहुत मुश्किल हो गया था। लेकिन सभी की चुप्पी के कारण राकेश का व्यवहार सारी सीमायें  तोड़ता जा रहा था। 
       इस बीच रेशमा  दो प्यारे बच्चो की माँ बन गयी थी। लेकिन राकेश ने किसी तरह परिवार की जिम्मेदारी  नहीं निबाही. सारा   समय परिवार को डराने का काम किया। सीधी -साधी रेशमा बाहर की दुनियाँ का सामना करने से डरने लगी।
       परिवार के खर्चे के लिए उसे अपने ससुर के सामने हाथ -फैलाने पड़ते। लाचार ,बेबस और बूढ़ा बाप इस उम्र में बहू के हाथ में कुछ पैसे रख देता लेकिन वह उसकी जरूरत से बहुत कम होते थे। लेकिन पति से कुछ माँगने  से रेशमा हमेशा डरती  रहती थी। उनके घर में हर समय खौफ का साया मंडराता रहता। 
      छोटी उम्र में उसके बेटे ने परिवार की जिम्मेदारी सँभालने की कोशिश करनी शुरू कर दी। लेकिन पढ़ाई के साथ वह इतना नहीं कमा पाता था कि घर का गुजारा भली -भांति हो सके। लेकिन राकेश ने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के बारे में सोचना कभी शुरू नहीं किया। 
       रेशमा की जबान खोलते ही राकेश के हाथ चालू हो जाते थे। कई बार रेशमा को राकेश के हाथो से उसके बच्चे बचाते। बेचारी अपने बच्चो को मदद के लिए पुकारती। 
     कई बार राकेश रेशमा को इतनी बेदर्दी से मारता कि उसका इलाज कराने डॉक्टर  के पास ले जाना पड़ता।राकेश में इंसानियत खत्म होती जा रही थी। वह सभी को अपमानित करने और दुःख देने में अपनी शान समझने लगा था। 
      बाहरी लोग रेशमा के दुःख में   द्रवित होकर रह जाते लेकिन उसका दुःख दूर नहीं कर पा  रहे थे। रेशमा की शादी सम्मानित परिवार में हुई थी लेकिन उज्जड इंसान के सामने सब हार गए थे। 
    एक बार रेशमा का बेटा अपने बाप के अत्याचारों से दुःखी होकर बाबा से  कहने लगा "-बाबा आपने ऐसा बेटा क्यों पैदा किया था"  . उसका मर्माहत हृदय अपनी भावनाओ को संभाल नहीं सका। 
    उसके ऐसे उद्गार सुनकर हमारी हँसी छूट गयी। क्योंकि जब बेटा पैदा होता है कोई ये नहीं सोचता कि उसके कारण दुःख मिलेगा। सभी जश्न मानते है। जैसे संसार की सारी खुशियाँ उसके कारण चरणों में आ पड़ेगी। अभिभावकों के  जीवन में हर तरफ सुख ही सुख होंगे। बेचारे बाबा के पास इन शब्दों का जबाब नहीं था।वह एकदम अवाक् रह गए।  
       ज्यादतियों की अति होने पर रेशमा अपने बच्चो को लेकर मायके चली गयी। उसके मायके वालो ने पुलिस में उसकी शिकायत करवा दी। अब सम्मन आने पर राकेश रेशमा से  माफ़ी  मांगने के लिए तैयार हो गया। लेकिन इस समय रेशमा और उसके मायके वालो का मन भर गया था। वे राकेश को सबक सीखने के लिए तत्पर थे। राकेश की कही सुनवाई नहीं थी। जिस रेशमा को राकेश अपनी सम्पत्ति समझता था अब उससे मिलना भी दुश्वार हो गया था। रेशमा के मायके वाले भी सख्त हो गए थे। उन्होंने राकेश को घर में घुसने की भी इजाजत नहीं दी।           वह सभी से सिफारिश करने लगा। सभी राकेश के व्यवहार के कारण उसके खिलाफ थे। सभी को उसके परिवार से हमदर्दी थी। लेकिन अपनी सीमाओं के कारण कोई उसे सबक नहीं सीखा पा रहा था।किसी ने  राकेश का साथ नहीं दिया।  
       राकेश की गुहार पर उसके पिता उसके साथ पुलिस स्टेशन चलने के लिए तैयार हो गए। राकेश घर में सबसे छोटा था। उसके पिता इस समय अस्सी साल से ऊपर हो गए थे। उनकी उम्र का ख्याल करके पुलिस वालो ने उनसे मिलना गवारा किया। पुलिस वाले उनसे प्रभावित हुए उन्हें उनपर दया दिखायी। 
       जबकि राकेश को अंदर भी नहीं आने दिया गया। पुलिस के सामने राकेश की सारी दबंगाई रखी रह गयी। वह उनके सामने हाथ जोड़ता रहा। 
       उसने पुलिस की सारी शर्ते मान ली। तब जाकर उसे परिवार से मिलने की इजाजत मिली। 
      अब रेशमा फिर से घर में आकर  रहने लगी। राकेश के व्यवहार में परिवर्तन आ गया था।
    एक दिन हम रेशमा के घर गए। हम रसोई में उसके साथ काम कर रहे थे। राकेश ने कमरे में से कुछ कहना शुरू किया जो रेशमा को पसंद नहीं आया। उसने राकेश को समझाने की कोशिश की लेकिन राकेश अपनी बात पर अड़ गया। रेशमा को बहुत  गुस्सा आया वह रसोई में गई और दो लीटर पानी की बोतल उठा लाई और उससे राकेश को पीटने लगी। उसका रौद्र रूप देखकर हम हैरान रह गए। 
      राकेश कह रहा था -"अब मै अपने घर में बात  भी नहीं कर  सकता। तुम बिना हाथ चलाये भी तो बात कर सकती हो ।"
     हम यह दृश्य देख कर अचम्भित होकर रह गए।  मुँह से अचानक निकला -"
"धन्य पुलिस तेरी माया। 
जिसको कोई सुधार नहीं पाया
 उसको तूने सुधारा।" 


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