एयर सर्जिकल स्ट्राइक
आज के हालत में मन आंदोलित हो उठा है। समझ नहीं आ रहा है ये खुश होने का समय है या दुःख मनाने का ? क्योंकि बरसो से भारत का हाथ जोड़कर विनय भाव से, पाकिस्तान सरकार से कहना "-हम आप के समर्थित आतंकवाद से परेशान है। हमारी हालत पर तरस खाकर ,इसे रोकने की कोशिश करो।" लेकिन उन्होंने हमारी दरख्वास्त को हमेशा रद्दी की टोकरी में डाला। उनके लिए हमारी याचना एक भिखारी की याचना थी। जिस पर ध्यान देना उन्होंने जरूरी नहीं समझा।जो कार्यवाही 26 फरवरी को की गई है। ऐसी कार्यवाही करने के बारे में मेने बहुत लोगो से सुना था। लेकिन सभी की इच्छा बरसो से मन में दबी रह गई.क्योंकि इस तरह की कार्यवाही के दुष्परिणाम के कारण कोई प्रधानमंत्री ये कदम उठाने से हिचकिचाता था। ये परवान अब चढ़ी है।
सभी के मन में हमेशा से डर था परमाणु बम की तबाही हमे गर्त में ले जा सकती है। यदि परमाणु बम के कारण भारत नेस्तनाबूत हो सकता है तो भारत के परमाणु बम केवल शोभा के लिए बनाये गए है। भारत के बहुत सारे केंद्र ऐसी जगह बनाये गए है जहाँ ये महफूज है। लेकिन छोटा सा पाकिस्तान क्या ऐसे वक्त में जर्जर हालात में, स्वयं को सलामत रख सकेगा?
भारत पाकिस्तान से आकार और जनसंख्या में बड़ा होने के बाबजूद संयम से काम लेता रहा था। जिसके कारण वहाँ के आका हमारी विनय का मखौल बनाने में अपनी शान समझते थे। सारे सबूतों को नकार दिया जाता था। जिन सबूतों को अंतर्राष्टीय सतर पर स्वीकारा जाता था। उन्हें नकारने में उन्हें जरा देर नहीं लगती थी। दाऊद इब्राहीम ,मसूद अजहर और हाफिज सईद के पाकिस्तान में होने के सबूत पेश किये। लेकिन उन्हें पाकिस्तान ने अपने यहाँ मौजूद होने से साफ इंकार कर दिया।
मसूद अजहर १९९९ में हवाई-जहाज अपहरण के बाद पाकिस्तानी सीमा की तरफ जाता दिखाई दिया था। उसके पाकिस्तान में रहने के कई सबूत पेश किये गए। उसी तरह हाफिज सईद जो कई आतंकवादी कामो में लिप्त रहा। उसे पाकिस्तान में मसीहा के समान सम्मान मिलता था. वह अंडरवर्ल्ड के गलत कामो से पैसा कमा कर पाकिस्तान में अच्छे कामो में लगा रहा था।
जिसके कारण आने वाले समय में उसके राजनीति में आने की चर्चा थी। भारतीय विरोध के फलस्वरूप उसे राजनीति में आने का अवसर नहीं मिला। वरना सोच के देखो ऐसे इंसान की सोच भारत में कितनी तबाही का कारण बनती।
इस समय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का समर्थन अधिकतर देश कर रहे है। सभी देश आतंकवाद से त्रस्त है। पाकिस्तान आतंकवाद का विद्यालय बन गया है। जहाँ भी आतंकवादी घटना होती है उसके तार पाकिस्तान से जुड़े होते है।
केवल चीन के कारण हाफिज सईद को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी साबित करने में रुकावट है वरना सभी इसके पक्ष में है। जबकि चीन में उइगर मुस्लिम आतंकवादियों की पनाहगाह भी पाकिस्तान को माना जाता रहा है। चीन ने उइगर समुदाय की गतिविधियों पर बहुत सारी पवंदिया लगाई हुई है। लेकिन उस देश ने बाहरी दख़लअंदाजियो को अनदेखा किया जाता है। लेकिन दूसरे देशो के कामो में टांग अड़ाना चीनियों की खासियत है।
म्यांमार में नक्सलवादियों पर किया गया हमला, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर सर्जिकल स्ट्राइक ने भारतीयों के हौसलों को बड़ा दिया है। आज हम अपने को दबे कुचले हुए महसूस नहीं कर रहे है।
भारत की अनुनय- विनय का समुचित असर होता नहीं देखकर हमे बहुत गुस्सा आता था। ऐसे समय में मुझे रामधारीसिंह दिनकर की पंक्तियाँ याद आती थी -
"क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन
विषरहित विनीत सरल हो "
अब तक मोदी जी ने पाकिस्तान को" सबसे अच्छा दोस्त देश का दर्जा" देकर देख लिया। हर समय दोस्ती का हाथ बढ़ाया। प्रधानमंत्री की शपथ लेते हुए,वहाँ के प्रधानमंत्री के अच्छे और बुरे समय में हमेशा साथ खड़े रहकर भारतीय विपक्षियों के तीर सहकर भी उन्होंने अच्छाइयों का साथ नहीं छोड़ा। लेकिन पाकिस्तान भारत की अच्छाइयों का महत्व नहीं समझ पाया। उसे अब डरा कर ही समझाना बाकी रह गया था। देखे इस उदंड देश पर इसका क्या असर होता है।

