#shadi ke mayne part-2

                     शादी के मायने भाग -2 

   
    मूर्ति ने पति के सभी बच्चो की शादी में जी  -जान से काम किया। उसे देखकर बाहर वालो को एहसास तक नहीं होता था कि  वह उनकी सौतेली माँ है। इस बीच  उसकी बेटी अरुणा भी शादी लायक हो गयी। उसकी उसने 12वी   पास करने के बाद रिश्ता ढूँढना शुरू कर दिया। अरुणा की बीसबें  साल में उसने शादी कर दी। 
      उसकी शादी के समय मूर्ति बहुत खुश नजर आ रही थी। उसके चेहरे पर पुरानी  रौनक विराजमान थी। उसके साथ दरवाजे पर स्वागत करने के लिए उसका पति साथ नहीं खड़ा दिखाई दिया। उसके बच्चे भी आवभगत करते दिखाई नहीं दे रहे थे। चारो तरफ देखने पर भी उसका पति और बच्चे कही दिखाई नहीं दे रहे थे। 
       ऐसे समय में मूर्ति मुझे बहुत अकेली लग रही थी। वह उतने ही जोश में काम कर रही थी जितने जोश में वह हमेशा होती थी। उसे देखकर एहसास हो रहा था।वह  कही न कही  अंदर से टूट रही थी। उसने पति के बच्चो के लिए बहुत किया लेकिन उसका पति ऐसे समय में नकली मुखौटा लगाने के लिए भी तैयार नहीं था। उस आदमी को देखकर लग रहा था उसे इन बच्चो की परवाह नहीं थी बल्कि अपनी पहली पत्नी के बच्चो की जिम्मेदारी पूरी करने के लिए ही मूर्ति के साथ रहा। 
      अधिकतर औरते दूसरे के बच्चो को अपना लेती है। लेकिन दूसरे पति के लिए किसी और के बच्चो को अपना सकना कितना मुश्किल होता हे इसका अहसास यहाँ हुआ।
      कोई साथ न दे तब भी काम पूरा हो जाता है। मूर्ति को ऐसे समय में अरुणा के पिता की बहुत याद  आ रही थी। क्योंकि उसे ऐसे समय में वह अपने साथ खड़े दिखाई देते। जबकि इस समय सिर्फ शादी की खाना-पूर्ति होती दिखाई दे रही थी।  अपने पन के आभाव में अरुणा ससुराल चली गई। 
      अरुणा अपने ससुराल में मन लगाने लगी। उसका घर में सभी उसका ध्यान रखते थे।माँ की क्षत्रछाया से दूर  वहां के माहौल में रमने की भरसक कोशिश कर रही थी। क्योंकि मायका भी इतना भारी  नहीं था जहाँ परेशानी होने पर उसकी जिम्मेदारी उठाने के लिए कोई तैयार हो।   माँ का ख्याल उसे हमेशा सताता रहता। उसे इसकी खलिश हमेशा से थी। उसके अपने  पिता उसे इतनी छोटी उम्र में छोड़ कर क्यों चले गए। कई बार उसे भगवान  पर भी गुस्सा आता था क्यों उससे उनका पिता उन्होंने छीन लिया। 
      अरुणा अपने ससुर में पिता का रूप तलाशने लगी। .उसके ससुर अच्छे थे। उन्होंने उसकी भावनाओ को समझा। उनके अंदर भी पिता का रूप हिलोरे लेने लगा।लेकिन पिता और ससुर के प्यार में अंतर् होता है। पिता का प्यार सीमाहीन हो सकता है। लेकिन ससुर और बहू को मर्यादाओ का पालन करना पड़ता है। कही उस सम्बन्ध का मतलब कोई गलत न समझने लगे। 
     इस तरह उसकी शादी के चार साल बीत  गए लेकिन उसकी अब तक गोद नहीं भरी थी। इसे लेकर मूर्ति और अरुणा दोनों चिंतित रहने लगी। क्योंकि अब सभी उनसे बच्चो के बारे में बात पूछने लगे थे। उन्हें अरुणा में कमी दिखाई दे रही  थी।  सभी को लड़की में दोष ढूंढने में समय नहीं लगता। लेकिन लड़के हमेशा इस चिंता से परे  होते है। 
       अरुणा की डॉ से  जाँच -पड़ताल होने लगी। उसे अनेक डॉ को दिखाया गया। एक साल के अंदर ही सुखद परिणाम दिखाई देने लगे  पांचवे साल में अरुणा के घर में दो जुड़वाँ  बच्चो ने जन्म लिया।  उसके घर में बच्चो की कमी एक साथ पूरी हो गई। अब अरुणा का परिवार पूरा हो गया था। उसके घर में लड़का और लड़की दोनों ही एक साथ आ गए थे। 
    बाकी -अगली बार 

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