#DIFFERENT MEANING OF MARRIAGE PART -3

                   शादी के मायने -भाग ३ 

     
   मूर्ति के जीवन में अरुणा की तरफ से खुशियों का आगाज हो चूका था। अब वह  उसकी तरफ से चिंतामुक्त हो चुकी थी.अब उसका ध्यान   उसके छोटे भाई वरुण की तरफ गया।  इतने समय में वह भी शादी के लायक हो चूका था। वरुण ज्यादा नहीं पढ़  सका था लेकिन एक दिन  उसके लिए MA पास लड़की का रिश्ता आ गया। वह लड़की देखने में सुंदर थी। उसके आलावा उसकी पढ़ाई  भी अच्छी थी। मूर्ति ने इस लड़की रीना से वरुण की शादी करने का फैसला कर लिया।
        एक दिन उसके घर में  रीना वधू  के रूप में आ गयी। उसके घर में मानो  उजाला फैल  गया। अब मूर्ति को लगने लगा उसके सारे दुःख दूर हो गए। भगवान ने उसकी सुन ली हर समय उसके मुँह पर भगवान् का नाम रहता।
       अरुणा के बच्चो को लेकर मूर्ति को परेशानी का सामना करना पड़ा था। लेकिन रीना की  एक साल के अंदर ही गोद  भर गयी। भगवान ने पोते  के रूप में उसके घर को रोशन कर दिया। उसके पैर जैसे धरती पर नहीं पड़ते थे। उसे भगवान् ने मनमांगी मुराद दे दी थी। उसके बच्चो के घर में भी तीन बेटे हो गए थे। उसे भगवान् से और क्या चाहिए था। 
        उसके जन्म के दो महीने बाद एक दम  ऐसी खबर मिली की रूह कांप  उठी। सुनते ही मेँ सदमे में आ गयी।  वरुण की दुर्घटना में मौत हो गयी। इसका यकीन करना मुश्किल हो रहा था। वरुण को पल -पल  छोटे से बड़ा होते देखा था। जिस उम्र में लड़को की शादी भी नहीं होती। उस उम्र में वरुण एक बेटे का पिता बन कर दुनिया को छोड़ कर चला भी गया था। 
       जब मै  मूर्ति से मिली तब उसने बताया -वरुण अपने दोस्त की शादी में गया था। जहाँ उसके दोस्तों के साथ लड़ाई हो गयी थी। जिसमे उन लड़को ने उसे जान से मार  डाला। .
       उन्होंने इसे दुर्घटना का रूप दे दिया। जिससे वे सब बच सके। मेने हर स्थान पर इस बारे में जिक्र किया लेकिन मेरी फरियाद कोई नहीं सुन रहा। वह  सब लड़के रसूखदार लोगो के बेटे है। उन्होंने पुलिसवालो को  पैसे खिला दिए है.इतना कहते ही उसके आंसू बहने लगे। वह सीधी सादी औरत  साड़ी के पल्लू से अपने आंसू पोंछने लगी। मेने भरसक उसे तसल्ली देने की कोशिश की लेकिन उसका दुःख इतना बड़ा था। कि मुझे अपने शब्द झूठे लगने लगे। 
      मूर्ति से मिलकर मुझे लगने लगा भगवान् इतना निर्दयी कैसे हो गया। इस जन्म में मुझे उसके बुरे काम याद  नहीं आते। जरूर उसने पिछले जन्म में बहुत सारे बुरे काम किये होंगे जिसका फल उसे इस जन्म में भुगतना पड़  रहा है। 
        मै  तो उसके किसी बुरे काम की दुहाई भी नहीं दे सकती क्योंकि मेने कभी उसे किसी को परेशान करते भी नहीं देखा था। उसके लिए भगवन ने इतना बुरा कैसे लिख दिया। उसकी कलम भी इतना दुःख लिखते हुए बिलकुल नहीं काम्पी।  . 
       भगवान  ने मुँह फेरा तो इंसानो ने भी उससे मुँह फेर लिया। मूर्ति ने जिससे दूसरी शादी की थी। उसने भी ऐसे समय में उसे छोड़ दिया। अब वह अपने एक बेटे के साथ रहने लगा। मूर्ति ने अपने दूसरे पति रमेश के बहुत हाथ -पैर जोड़े उसकी खुशामद करने  में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन रमेश का दिल नहीं पिघला। 
       रमेश अब बहुत बूढ़ा  हो चुका था।उसके लिए पत्नी की जरूरत ना के बराबर रह गयी थी उसकी सारी इन्द्रियाँ स्थिल हो चुकी थी।  उसके पहली पत्नी के पांचो बच्चो की शादी हो चुकी थी।रमेश की पहली पत्नी पांचो बच्चो को जन्म देने के बाद मर गयी थी। उस समय छोटा बेटा केवल दो साल का था। वह पांचो बच्चो को  अकेले नहीं पाल सकता था इसलिए उसने मूर्ति को अपने साथ रखा। 
      उसके लिए पत्नी अब जरूरत नहीं बल्कि मजबूरी बन चुकी थी। उसे अब केवल मूर्ति ही नहीं बल्कि उसे वरुण के बेटे और उसकी पत्नी की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ती।
        इससे बचने का आसान तरीका उसे मूर्ति का साथ छोड़ने में लगा। मूर्ति को समझ नहीं आ रहा था। उससे क्या खता हुई। ऐसे वक्त में रमेश ने उसका साथ क्यों छोड़ दिया। उसके रोने -गिड़गिड़ाने से भी रमेश का दिल नहीं पसीजा। अब रमेश और मूर्ति अलग रह रहे  है। 
    मूर्ति के पास केवल दो ही तरिके हे जिससे उसकी जीवन की नैया पार  हो सकती है। एक उसकी बहू को नौकरी मिल जाये। बहु ने MA  के आलावा कोई व्यवसायिक पढ़ाई नहीं की है। जिसके कारण उसकी नौकरी मिलने में परिशानी हो रही है।  
      दूसरा बहु रीना की किसी अन्य जगह शादी कर दे। उसने विवाहित जीवन का सुख केवल दो साल ही देखा था। उसका पूरा जीवन पड़ा है। रिश्तो का मकड़जाल तो उसने इतने समय में देख लिया है। 
     उसका किसी अच्छी जगह विवाह हो जाये। जिससे उसके जीवन में बदलाव आ सके। 


#shadi ke mayne part-2

                     शादी के मायने भाग -2 

   
    मूर्ति ने पति के सभी बच्चो की शादी में जी  -जान से काम किया। उसे देखकर बाहर वालो को एहसास तक नहीं होता था कि  वह उनकी सौतेली माँ है। इस बीच  उसकी बेटी अरुणा भी शादी लायक हो गयी। उसकी उसने 12वी   पास करने के बाद रिश्ता ढूँढना शुरू कर दिया। अरुणा की बीसबें  साल में उसने शादी कर दी। 
      उसकी शादी के समय मूर्ति बहुत खुश नजर आ रही थी। उसके चेहरे पर पुरानी  रौनक विराजमान थी। उसके साथ दरवाजे पर स्वागत करने के लिए उसका पति साथ नहीं खड़ा दिखाई दिया। उसके बच्चे भी आवभगत करते दिखाई नहीं दे रहे थे। चारो तरफ देखने पर भी उसका पति और बच्चे कही दिखाई नहीं दे रहे थे। 
       ऐसे समय में मूर्ति मुझे बहुत अकेली लग रही थी। वह उतने ही जोश में काम कर रही थी जितने जोश में वह हमेशा होती थी। उसे देखकर एहसास हो रहा था।वह  कही न कही  अंदर से टूट रही थी। उसने पति के बच्चो के लिए बहुत किया लेकिन उसका पति ऐसे समय में नकली मुखौटा लगाने के लिए भी तैयार नहीं था। उस आदमी को देखकर लग रहा था उसे इन बच्चो की परवाह नहीं थी बल्कि अपनी पहली पत्नी के बच्चो की जिम्मेदारी पूरी करने के लिए ही मूर्ति के साथ रहा। 
      अधिकतर औरते दूसरे के बच्चो को अपना लेती है। लेकिन दूसरे पति के लिए किसी और के बच्चो को अपना सकना कितना मुश्किल होता हे इसका अहसास यहाँ हुआ।
      कोई साथ न दे तब भी काम पूरा हो जाता है। मूर्ति को ऐसे समय में अरुणा के पिता की बहुत याद  आ रही थी। क्योंकि उसे ऐसे समय में वह अपने साथ खड़े दिखाई देते। जबकि इस समय सिर्फ शादी की खाना-पूर्ति होती दिखाई दे रही थी।  अपने पन के आभाव में अरुणा ससुराल चली गई। 
      अरुणा अपने ससुराल में मन लगाने लगी। उसका घर में सभी उसका ध्यान रखते थे।माँ की क्षत्रछाया से दूर  वहां के माहौल में रमने की भरसक कोशिश कर रही थी। क्योंकि मायका भी इतना भारी  नहीं था जहाँ परेशानी होने पर उसकी जिम्मेदारी उठाने के लिए कोई तैयार हो।   माँ का ख्याल उसे हमेशा सताता रहता। उसे इसकी खलिश हमेशा से थी। उसके अपने  पिता उसे इतनी छोटी उम्र में छोड़ कर क्यों चले गए। कई बार उसे भगवान  पर भी गुस्सा आता था क्यों उससे उनका पिता उन्होंने छीन लिया। 
      अरुणा अपने ससुर में पिता का रूप तलाशने लगी। .उसके ससुर अच्छे थे। उन्होंने उसकी भावनाओ को समझा। उनके अंदर भी पिता का रूप हिलोरे लेने लगा।लेकिन पिता और ससुर के प्यार में अंतर् होता है। पिता का प्यार सीमाहीन हो सकता है। लेकिन ससुर और बहू को मर्यादाओ का पालन करना पड़ता है। कही उस सम्बन्ध का मतलब कोई गलत न समझने लगे। 
     इस तरह उसकी शादी के चार साल बीत  गए लेकिन उसकी अब तक गोद नहीं भरी थी। इसे लेकर मूर्ति और अरुणा दोनों चिंतित रहने लगी। क्योंकि अब सभी उनसे बच्चो के बारे में बात पूछने लगे थे। उन्हें अरुणा में कमी दिखाई दे रही  थी।  सभी को लड़की में दोष ढूंढने में समय नहीं लगता। लेकिन लड़के हमेशा इस चिंता से परे  होते है। 
       अरुणा की डॉ से  जाँच -पड़ताल होने लगी। उसे अनेक डॉ को दिखाया गया। एक साल के अंदर ही सुखद परिणाम दिखाई देने लगे  पांचवे साल में अरुणा के घर में दो जुड़वाँ  बच्चो ने जन्म लिया।  उसके घर में बच्चो की कमी एक साथ पूरी हो गई। अब अरुणा का परिवार पूरा हो गया था। उसके घर में लड़का और लड़की दोनों ही एक साथ आ गए थे। 
    बाकी -अगली बार 

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...