#INDIAN PARTY VS MONEY AND WASTE OF FOOD

         भारतीय दावते पैसे और खाने की बर्बादी 

     भारत में दावत का आयोजन करना बहुत महंगा हो गया है। पहले समय में सुख में अपने घनिष्ठ प्रियजनों को भोज दिया जाता था लेकिन अब उसका स्वरूप अति विशाल हो गया है। प्राचीन समय में बेटी को और उसके ससूराल वालो को खुश रखने के लिए दहेज और दावत का इंतजाम किया जाता था लेकिन आज उसका बृहद रूप सामने आता है। जहाँ पहले 50 और 100 लोगो के  भोज तक सिमित था अब वह हजारो ओर लाखो तक पहुंच चूका है। लोगो ने अभी सीमा निश्चित नहीं की है लोगो की संख्या कहा जाकर रुकेगी कहना मुश्किल है।
      लोग अपनी अमीरी दिखाने के चककर में पुरानी सीमाएं तोड़ते जाते है। जो शादिया पहले कुछ हजारो में तय हो जाती थी वह लाखो से खिसकती हुई करोड़ो रुपयों तक पहुंच चुकी है। ये अंतहीन क्रम कहाँ जाकर रुकेगा कहना मुश्किल है।
     मेने अपने अमीर साथियो से शादी समारोह में होने वाले खर्चो की चर्चा की तो उसका जबाब सुनकर स्तब्ध रह गयी। उसके अनुसार ऐसे मौको पर ही तो दिखाने का मौका  मिलता  है। ऐसे समय में कंजूसी नहीं करनी चाहिए बल्कि दिल खोलकर खर्चना चाहिए। उनकी दरियादिली गरीबो को सारी जिंदगी पैसा जमा करने पर मजबूर कर देती है। भारतीय इस एक दिन की दाद की खातिर सारा जीवन अपनी इच्छाओ को मारता रहता है। इस दिन सारे जिंदगी की पूंजी लुटाने के बाबजूद आधे लोगो को खुश नहीं कर पाता। इस दिन सारी जमा -पूँजी खर्च  करने के बाद अपने को लुटा हुआ महसूस करता है।
      गरीबो के खाने में पूरी सब्जी और मीठा खाने को देकर इतिश्री समझ ली जाती थी अब दावत में अनगिनत खाद्य पदार्थ होते है। मध्यम वर्ग की शादियों में 100 खाद्य पदार्थ होना आम  बात हो गयी है। एक साधारण इंसान आमतौर पर 100 चम्मच खाना एक समय में नहीं खा सकता है। लेकिन मुफ्त का माल समझ कर हर चीज को खाने के लालच में प्लेट भर लेता है। उस खाने में बहुत अधिक घी और मसालो का इस्तेमाल होने के कारण उस खाने को कुछ चम्मच खाने के बाद उससे खाया नहीं जाता। उस भरी प्लेट को झूठन में फेंक देता है।
      भारत एक गरीब देश है यहाँ की जनता को दो वक्त भरपेट खाना नसीब नहीं होता है। उस देश में 40 % खाने की बर्बादी हो जाती हे। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बंगलौर में जितने खाने की बर्बादी होती है उससे ढाई करोड़ लोगो का एक समय का पेट भर सकता है।ये सिर्फ एक शहर की बर्बादी है यदि पूरे भारत का आंकड़ा सुनोगे  तो यकीं करना मुश्किल हो जायेगा। इस देश में यदि खाने की बर्बादी रोक दी जाये तो किसी को भूखा न सोना पड़ेगा। किसी को आत्महत्या करने की जरूरत महसूस नहीं होगी। किसी के लिए उसकी बेटियाँ बोझ नहीं बनेगी।
      ये दिखावा अभी रुका नहीं है अमीर लोगो की शादियों मे कॉन्टिनेंटल ,थाई ,चायनीज़ आदि विविधता भरी हुई है। यदि आपको खाने की बर्बादी वाली जगह पर अगले दिन जाने का मौका मिलेगा तो जी घबराने लगता है। जो खाना रात के समय हमे ललचा  रहा था वही बिखरा हुआ ,बदबू मारता  खाना इस समय उलटी का कारण बन रहा है।
      आप एक बार इस बर्बादी पर विचार अवश्य करे। यदि इसे रोका जाये तो केसा रहेगा। 

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