#water collection or recreation site

               जल का संग्रह या मिलन स्थल 

 कुछ ऐतिहासिक जगह आधुनिक शहरो की बड़ी -बड़ी इमारतों के बीच छिप गयी है। उनका उपयोग और उनका बैभव  नहीं रहा। कुछ भूले भटके यादगार लम्हे उन विरासतों को याद करने के लिए मजबूर कर देते  है। फिल्म" पीके" के बाद उग्रसेन की बाबड़ी की तरफ लोगो का ध्यान गया। तभी से मेरे मन में उसे देखने की इच्छा बलबती हो रही थी।
       पिछले दिनों मुझे इस बाबड़ी को देखने का मौका मिला। में उस समय के लोगो की जिजीविषा को दाद देना चाहती हूँ। जिन्होंने बिना आधुनिक साधनो के पांच मजिली इमारत जमीन को खोद कर बना दी। पानी के लिए कुए पहले देखे है। उनकी निर्माण कला मुग्ध नहीं करती उन्हें देख कर लगता है इन्हे हमारी बुनियादी जरूरत पूरी करने के लिए बनाया  गया है लेकिन बाबड़ी का बहुउपयोगी होना मानव की रचनात्मकता को दाद  दिला जाता है।
      गर्मी की अति होने पर लोगो को यहाँ ठंडक की तलाश में आकर पनाह लेना और यहाँ पर अनेक मनोरंजक कार्यक्रम को देखकर उत्साह से भर देना मुख्य मकसद रहा होगा।  ये उस समय के थियेटर जैसे जगह रही होगी। यहाँ पर छोटे समूहों में बैठने के झरोखे जैसी जगह बनाई गयी है। जिसमे सामूहिकता और अकेलेपन दोनों का एहसास साथ -साथ हो जाता है।
          आधुनिक समय में यहाँ  जाकर ऐसा लगा मानो लोग पिकनिक मनाने के मकसद से आये है। बहुत सारे लोग दिखाई दे रहे थे उनका जोश देखते ही बनता था। लेकिन प्राचीन समय में इसे जिस मकसद से बनाया गया था। उसका औचित्य खत्म हो गया है क्योंकि यहाँ नीचे तल तक पहुंचने पर भी पानी के दर्शन नहीं होते बल्कि बिलकुल नीचे लोगे ने इसमें बोतले और कूड़ा डाल  दिया है।
       यहाँ  पर एक जोड़ा शादी से पहले की फोटो खिचवाने आया हुआ था।
       सब कुछ अच्छा होने के बाबजूद मन में हल्की सी खलिस महसूस हो रही थी। वहाँ पर सफाई का समुचित इंतजाम नहीं था। क्योंकि इसकी देखरेख पर पैसा कौन खर्च करेगा। पहले समय में अमीर लोग इसकी जिम्मेदारी उठाते थे लेकिन अब अमीरो के पास गर्मी से बचने के अनेक साधन है। मनोरंजन के लिए भी उन्हें ऐसी जगह पर आने की जरूरत नहीं है। मुझे लगता है ऐसी धरोहरों को बचाने  के लिए सरकार को सामने आकर पर्यत्न  करने चाहिए। तभी ये विरासत बच सकती है। 

#unknown city cheat woman

                 अनजान नगरी चालबाज औरत 

  सामान्य जिंदगी जीते हुए कई अनजाने लोग हमारी जिंदगी में आकर हमे झकझोर जाते है। हमें जिंदगी के बारे में दुबारा से सोचने पर मजबूर कर देते है। जिंदगी की कश्मकश को बढ़ाने के लिए इतने खराब लोग भी दुनिया में जन्म लेते है जो अपनी भलाई करने के चक्कर  में दुसरो की दुनिया बर्बाद करने से गुरेज नहीं करते। कुछ लोग हमारी जिंदगी में कोई महत्व नहीं रखते उनका कुछ समय का साथ हमारी जिंदगी को नर्क के समान बनाने  के लिए काफी होता है। वे हमें जार -जार रोने पर मजबूर कर देते है।
       ऐसा अनुभव मुझे पिछले दिनों इम्फाल में हुआ। उस औरत के कारण मेरे काफी दिन बर्बाद हो गए। जब हमारा  इम्फाल जाने का कार्यक्रम बना तो हमने  किसी से  एक कमरा किराये के लिए उपलब्ध कराने की बात की। यही से हमारा संघर्ष शुरू हो गया। हमे इम्फाल में कई महीने रहना था। इम्फाल में हमारी जान -पहचान का कोई इंसान नहीं था। इसलिए हमे मदद की गुहार लगानी पड़ी।
     हमने दो दिनों के लिए दिल्ली से पहले ही होटल बुक करवा लिया था। दूसरे दिन उस औरत (मैना )  से मिलने पर उसने कहा-" आप इतने महगे होटल में रुक कर पैसे बर्बाद मत करो मेने तुम्हारे लिए एक कमरा देख लिया है। आप  होटल में रुक कर परेशान हो जाओगे।" हमे उसकी हमदर्दी भरी बातो से सुकून मिला।
       उसे अपनी  दुकान पर जाना था।इस   बीच  हमारी मैना से  मुश्किल से आधे घंटे बात हुई थी। हमने उसकी बाते  सिर्फ सुनकर  हाँ में हाँ मिलाई  थी। उस  पर अपने विचार लादने की कोई कोशिश नहीं की थी। क्योंकि उस जगह नौकरी लगने के कारण बेटी को छोड़ने आये  थे। बच्चो के मामले में हर इंसान कमजोर होता है। अपनी लड़ाई जोशो -खरोश के साथ लड़ी जा सकती है। लेकिन बेटी के मामले में हम सुरक्षित माहौल तैयार करने में लग जाते है।
      मैना  की बाते  सुनते हुए कब आधा घंटा बीत गया अहसास नहीं हुआ। उसकी बातो में आकर हम अपने होटल से सामान ले आये। मैना  अपनी दुकान सँभालने के लिए चली गयी।
       जब हम किराये के मकान में पहुंचे तब  उस घर में एक औरत  और उसकी बेटी (राधा ) भी रुकी हुई थी। वह भी अपनी बेटी को छोड़ने के लिए आयी थी। राधा की माँ से मेरी कुछ समय बात हुई। वह भी मेरी तरह अनजान शहर में बेटी को छोड़ने के कारण डरी  हुई थी। पहली बार बेटी को अपने से दूर रखने का ख्याल ही हर माँ को परेशान कर देता हे। में उसकी हालत  अच्छी  तरह समझ रही थी क्योंकि हम दोनों का दर्द समान था।
      शाम को मकान दिलवाने वाली औरत (मैना ) ने आते ही कहा-" आप 'दोनों के परिवार को ये कमरा खाली करना है। मकान मालकिन आप लोगो को कमरा नहीं देना चाहती हे। मै  राधा के परिवार को अपने घर में रख लूंगी। आप अपना इंतजाम किसी और जगह कर लो।   " हमे इसका कारण समझ में नहीं आया लेकिन उसके कहे अनुसार हमने चलने में भलाई समझी। और दो घंटे के अंदर हम फिर से होटल के कमरे में आ गए।
       इसके बाद हमने मैना  से कोई बात नहीं की। हम काफी समय से होटल में रुकते आये  थे। इस कारण हम होटल के माहौल में रहने से परेशानी महसूस नहीं कर रहे थे। जब हम घर से बाहर निकलते है तब पैसो को लेकर परेशान भी नहीं होते।
        दो दिन बाद हम बेटी के अफसर से मिले "- हमने मैना  के इस व्यवहार का कारण पूछा। "
         हम जबाब सुनकर दंग  रह गए। " हमसे कहा गया हमने उनकी मकान मालकिन से बुरा व्यवहार किया है। उस घर में हमने बहुत सारी कमियाँ बताई है। जिस कारण मालकिन हमे मकान देना नहीं चाहती। "
     मालकिन नौकरी करती थी। वह शाम को घर आयी थी। मुझे तो मालकिन के बारे में पता ही नहीं चला था। तब मेने  उससे  बात कब की।  उसे कब कमियों के बारे में बताया मै  आज तक सोच रही हूँ।
       उस जैसी चालाक  औरत से मेरा वास्ता बर्षो बाद पड़ा था। हमने एक हफ्ता शहर घूमते हुए बीता  दिया। हमारे दिल में कसक अवश्य थी कि हमारा वास्ता इतनी बुरी औरत  से इस अन्जान नगरी में क्यों   पड़ा।
     शहर छोड़ने से एक रात  पहले मैना  ने कहा _"आप के लिए एक कमरा देख लिया है। आप कल आकर देख लेना और पैसे जमा करवा देना। "
     हमने कहा - " हम कल शहर छोड़ कर दिल्ली जा रहे है। अब एक हफ्ते बाद आकर मकान देखेंगे।"
     इस पर मैना आपे  से बाहर होकर कहने लगी -" हमने इतनी मेहनत करके आपके लिए कमरा ढूंढा है। एक हफ्ते बाद आपको वह मकान नहीं मिलेगा। यदि आपको मकान चाहिए तो जाने से पहले देख कर उसके पैसे दे जाओ वरना वह मकान किसी और को दे दिया जायेगा। "
    उसके अचानक बोले गए शब्दों को सुनकर हम स्तब्ध रह गए। हमने कहा -"यदि आप हमे पहले वह मकान दिखा देती तो उस घर में रहने लायक समान रखवा कर हम जाते। कुछ घंटो में जरूरत का समान नए शहर में ढूंढ कर रखवा पाना हमारे लिए बहुत मुश्किल है। हम चाहते है ये राधा के साथ ही घर में रहे। उसके बाद सामान का इंतजाम करके जहाँ  चाहेगी रह लेगी। "
       इस पर मैना  बोली -"राधा आपकी बेटी के साथ नहीं रहना चाहती है। "
        मैना की बात सुनकर मेरा दिमाग घूम गया। मे मैना की बात सुनकर चुप  हो गयी।
      उसके बाद मेने राधा और उसकी माँ से बात की तो उन्होंने कहा "-हमे आपकी बेटी के साथ रहने में कोई एतराज नहीं है। मैना कह रही है आपकी बेटी हमारे साथ नहीं रह सकती। यदि आपकी बेटी हमारे साथ रहेगी तो वह हमसे मकान खाली करवा लेगी। हम इस कारण डरे हुए है। आप ही बताये अनजान शहर में उसका विरोध करके हम कैसे रहेंगे। इसलिए उसकी जी हजूरी कर रहे है। "
      ये बात सुनकर मैना को फिर से फोन मिलाने की कोशिश की लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। करीब रात  दस बजे उसका फोन आया। उसने कहा -यदि आपकी बेटी  राधा के साथ रहना चाहती है  तो आपको बाइस हजार रूपये अभी देने पड़ेंगे। वरना आपकी बेटी नहीं रह सकती। "
     मेने खुशामद भरे लहजे में कहा "-आप के पैसे बेटी वापस आकर दे देगी। इस वक्त हमारे पास ज्यादा पैसे नहीं बचे। क्योंकि होटल आदि के कारण खर्च हो गए है।  आधे पैसे जाते हुए आपको दे जाते है बाकि पैसे बाद में हिसाब करके  मिल जायेगे। "
    उसने कहा -मुझे अभी दोगे तभी कमरा मिलेगा वरना कुछ नहीं होगा।
    मेने कहा" -आपने पहले नौ हजार रूपये देने की बात कही  थी। ये एकदम बाइस हजार कैसे हो गए। आप मुझे बताये।"
     उसमे उसने मुझे मकान की सफेदी ,अलमारी खरीदने ,बिजली ढीक करवाने ,पलंग खरीदने,पानी की व्यवस्था  और गैस खरीदने के हिसाब गिनवाने शुरू कर दिये। .उस पर भी मुझे सही ढंग से हिसाब समझा नहीं सकी। उचित जबाब समझाने के बदले उसने फोन बंद कर दिया।
      ये सारा समान कोई अपने साथ ले नहीं जा सकता ये तो मकान मालकिन के पास रहने की चीजे है। इसका हिसाब तीन  बच्चो से लेने का तुक समझ नहीं आ रहा था।
     अगले दिन मेने बेटी के अफसर के सामने अपनी समस्या रखी तो उन्होंने  कहा -"ये औरत आपके साथ गलत व्यवहार कर रही है। मै मैना से बात करूंगा। "
      हम इसके बाद दिल्ली आ गए। चार दिन बाद जब अफसर से बात हुई तो उन्होंने बताया।  मैना ने उनसे कहा -ये सब चीजों के पैसे नहीं है बल्कि इसमें सुरक्षित मनी   और चार महीने का किराया हम पहले से ले रहे है। "
     उसकी बात सुनकर में ठगी सी रह गयी। उस औरत  ने सुरक्षित मनी अलग और किराया पहले से लेने की बात कहकर सोचने पर मजबूर कर दिया। लोग किस तरह अपने शब्दों को मरोड़ते रहते है। उन्हें दुसरो को उलझन में डालकर मजा आता  है। यदि वह  हमारे साथ सही सलूक करती तो शायद खुश होकर उसकी मदद करते।
      आज के जमाने में कोई इंसान कितनी अधिक चालबाजिया चल सकता है। उस औरत को देखकर आपको लगेगा ये कितनी गरीब और परोपकारी  औरत  हे लेकिन उसने  मेरी जिंदगी में कांटे बिछाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
      आज उसके बताये मकान में बेटी को ठहराने  से डर लग रहा है। जब उसने मुझे बेब्कुफ़ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी वह बेटी को कितना परेशान करेगी। उसके कारण मेरा एक हफ्ता बेकार चला गया। उसकी चालबाजियों के कारण मै बेटी के लिए रहने का इंतजाम नहीं कर सकी. मेरे दिल की कसक मुझे परेशान कर रही है। 
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