#bhartiy khel ratn

                                             भारतीय खेल रत्न 
आज मुझे ओलंपिक में भारतीय नारी की कोशिश देखकर बहुत ख़ुशी हुई। पी वी संधू,साक्षी मलिक ने मेडल जीतकर भारतीय मेडल का सूनापन दूर कर दिया। वही पहली बार दीपा कर्माकर  ने  जिम्नास्टिक में पदार्पण करके , ओलम्पिक में  चौथे स्थान पर पहुच  कर, इस को सर्कस की दुनिया से दूर,  भारतीय को स्थान दिलवाकर उनकी  आशा बड़ा दी। भारत में जिम्नास्टिक को महत्व नही दिया जाता था। लेकिन अब मुझे उम्मीद है भारतीय लडकिया भी जिम्नास्टिक के पथ पर आगे बढ़ कर भारत का नाम रोशन करेंगी। 
         साक्षी मालिक का  अदम्य साहस भी प्रेरणा का सबब बनेगा। उसने पुरुष वर्चस्व वाले खेलो में मेडल दिलवाया है। उसके गांव में कभी लड़कियों ने कुश्ती में भाग नही लिया था। उसे अभ्यास करने के लिए लड़की साथी नही मिली। उसे हमेशा पुरुषो के साथ अभ्यास करना पड़ता था। उसके परिवार और उसकी झिझक मुझे सोचने पर मजबूर कर देती है। एक छोटे से गांव की लड़की जब पुरुषो के साथ अभ्यास करती होगी उसको किस तरह के उलाहनों का सामना करना पड़ता होगा। पुरुषों के मजबूत हाथो से कुश्ती के दाँव -पेच में हुनर साबित करना बहुत कठिन काम है।उसकी माँ और उसके जज्बे को मैं सलाम करती हूँ।
        संधू के पिता और उसकी जिजीविषा ही उसे इतनी ऊंचाइयों तक पहुँचा सकी। वरना 60 किलोमीटर का सफर तय करके अभ्यास करना साधारण लोगो के बस का नही होता। उसके पिता ने बेटी के भविष्य के लिए 7 महीने के लिए नोकरी से छुट्टी ली।संधू ने एक साल से ज्यादा समय से अपनी पसंद की चीजे नही खायी है।  इतना अधिक त्याग कितने लोग कर पाते है। . उसके गुरु गोपीचंद फुलेला ने भी गुरु -शिष्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है।  उन्हें द्रोणाचार्य पुरुस्कार मिलना सार्थक है। ऐसे गुरु ही दुसरो में प्रेरणा भरते है। 
      ऐसा  अचम्भा पहली बार हुआ है जब  ओलम्पिक में पहली बार भाग लेने वालो ने   पुरुस्कार भी जीतकर दिखा दिया। पहली बार ओलम्पिक में केवल महिलाओ ने सराहनीय खेल दिखाया। उनके सामने भारतीय मर्द पिछड़ गए। 
        ये  तीनो भारत के अलग स्थानों से सम्बन्ध रखती है। उनकी प्रेरणा उनके अंदर से उभरी वरना हर तरफ से उन्हें हतोत्साहित करने वाले लोग चारो और फैले हुए थे। हमारा सामाजिक माहौल लड़कियों को खेलो में प्रोत्साहित करने वाला नही है। उनके अंदर की आकांक्षा ने उन्हें रूढ़ियां तोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी हिम्मत अब उन्हें लड़कियों को आगे बढ़ाने का कदम उठाने में सहायक होंगी। 
       साक्षी के मेडल जितने की खबर से बहुत सारी लड़कियों के अभिभावकों ने अपनी लड़कियों का कुश्ती खेलने के लिए  नामांकन करवा दिया है। अब साक्षी का पूरा गाँव उसकी जैसी लड़की को वरदान समझ रहा है। ओलम्पिक से लौटने के समय भव्य स्वागत उसका प्रतिक है। 
         इन तीनो के पुरुस्कार जीतते ही इन पर सौगातो की बारिश हो रही है। इनकी अम्बेसेडर वैल्यू बढ़  गयी है। उनको जो मिला उसकी मुझे बहुत ख़ुशी है। लेकिन भारत में खेलो को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारों को कदम उठाने चाहिए। अमरीका, ब्रिटेन और चीन में खेलो और खिलाड़ियों पर कई करोड़ रुपया खर्च किया जाता है। जबकि उन्हें इनाम में ज्यादा राशि नही दी जाती। 
         पहली बार तीन महिला खिलाड़ियों को एक साथ खेल रत्न का पुरुस्कार मिला है। यह महिलाओ के लिए सम्मान का सबब है। 

#pakistan ko karara jbab

                                              पाक को करारा जबाब 
   
 पाकिस्तान  भारत  में अनेक तरह से दहसत फैलाने में लगा है। उसने  अपनी कोशिशो  पर शर्मिंदा होने के स्थान पर भारत को बदनाम करने में कोई कसर उठा नही रखी। उसके द्वारा नकली नोटों को भारत में भेजना, नशीली दवाइयों के द्वारा हमारी युवा शक्ति को नाकाम करना,हथियार की आपूर्ति दंगाईयो तक पहुंचा कर भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने की हरदम कोशिशो में लगा हुआ है। उसके बाबजूद झूठा आरोप भारत पर मढ़ने से बाज  नही आता। 
         भारत विभाजन के समय कश्मीर भारत का हिस्सा बना। कश्मीर के राजा ने इसके लिए अपनी सहमति दी। वहाँ की 50 % जनता मुस्लिम होने के कारण पाक कश्मीर पर अपना अधिकार हमेशा से समझता रहा। उसने 1948  में कबाइलियों के द्वारा कश्मीर को हड़पने की साजिश रची। उसके बाद १९६५,1971  के भारत पर आक्रमण के द्वारा भारत को हथियाने की नाकाम कोशिश की। उसके बाद उसे अहसास हो गया। भारत की शक्ति के सामने वह  बहुत कमजोर है। धोखे से 1999 के कारगिल हमले में उसकी रही सही पोल खुल गयी। विश्व समुदाय के सामने उसे मुँह की खानी पड़ी.. इस से शर्मिंदा होकर उसने  कारगिल युद्ध में  शहीद जवानों को अपना मानने से इंकार कर दिया। 
      1990  के दशक में कश्मीर से अनेक तरह से यातना देकर 50 % हिन्दुओ को कश्मीर छोड़ने के लिए बाध्य किया। ऐसा पहली बार हुआ था जब अपने देश से ही शांति के समय में देशवाशियो को शरणागत बनकर दूसरे राज्यो में जाना पड़ा। हमारी सरकार और संचार तन्त्रो ने इसकी सुगबुहाट तक आम लोगो तक नही पहुचने दी। हम जैसे लोगो को बर्षो बाद कश्मीरी हिन्दुओ का पलायन का कारण पता चला 
       आज भी उसके द्वारा हिंसा फैलाई जा रही है। बुरहान वानी जैसे आतंकवादियो को शहीद बता कर अपनी गन्दी मंशा जगजाहिर कर रहा है। सारा विश्व इसे भारत का अंदरूनी मामला कह कर सामने आने के लिए तैयार नही है। पाकिस्तान में बुरहान वानी की तस्वीरों से सजा  कर एक  ट्रेन चलाना इसका  सबूत है।  
     भारत के मोदी जी ने पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर आजाद कश्मीर पर अपना बयान दिया। उन्होंने पाकिस्तान के बलोचिस्तान पर अपनी चुप्पी तोड़ी। आजाद कश्मीर भी भारत का हिस्सा है। यह कहने की हिम्मत किसी और प्रधान मंत्री ने इससे पहले नही दिखाई थी। जबकि भारत के नक्शे में आज भी आजाद कश्मीर को दिखाया जाता है। जबकि इसपर पाकिस्तान का कब्जा है। वहाँ की जनता नरक की आग में झुलस रही है। उनको  अनेक तरह से यातनाये देकर चुप करवाया जा रहा है.
    .बलोचिस्तान की हालत उससे भी ज्यादा बदतर है। उनसे मानवीय अधिकार तक छीन लिए गए है। वहाँ के लोगो से जीने तक का अधिकार छीन लिया गया है। उन्होंने आजादी के समय पाकिस्तान में शामिल होने से साफ मना  कर दिया था। वहाँ  केवल सेना के बल पर अधिकार किया गया है। नाममात्र को चुनाव का ढोंग किया जाता है। वहाँ की केवल 10 % जनता चुनाव में भाग लेती है। अधिकतर फर्जी वोटिंग के द्वारा सत्ता चलाई जा रही है। 
      उनकी आवाज पहली बार संसार के सामने लाने का दम मोदी जी ने दिखाया है जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप पाकिस्तानी नेताओ ने इस मसले पर विचार करने के लिए नेताओ से बात की है। भारत की प्रतिक्रिया के कारण पाकिस्तान की तिलमिलाहट साफ दिखाई दे रही है।
     पहली बार मोदी जी ने बलोचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर का दर्द संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाने के बारे में कहा है। मोदी जी आज विश्व की आवाज बन गए है। जिन्हें गंभीरता से सभी सुन रहे है।  
     अब तक  पाकिस्तान भारतीय कश्मीरियो को सब्ज बाग  दिखा कर, पैसो  से खरीद कर बगाबत के लिए आमादा करने में लगा हुआ था। भारतीय आम  जनता को डरा -धमका कर, पत्थर फेकने,हिंसा फैलाने के लिए,भारतीय झंडा जलाने जैसी कार्यवाही कर रहा था। 80 %जनता को भारत में रहने से परेशानी नही है। नेता इस बात को बिगाड़ कर प्रस्तुत कर  रहे है। जिसका खामियाजा आम  जनता उठा रही है। कश्मीर की आम जनता सकून से सो नही पाती। दंगाई आधी रात को उठा कर सेना पर आक्रमण करने के लिए उकसाते है वरना उन्हें मारते  है। 
     चीन सरकार पाकिस्तान की हमदर्द बनकर भारत के खिलाफ कार्यवाही करने से गुरेज नही कर रही थी। जैसे ही भारत ने पाकिस्तान के बलोचो की आवाज उठाई वैसे ही चीन सरकार की आवाज बदल गयी उन्होंने पहली बार "आजाद कश्मीर को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर" कहा। क्योकि बलोचिस्तान से होकर चीन सरकार को ग्वादर बंदरगाह तक जाने का रास्ता मिलता। चीन सरकार ने ग्वादर बंदरगाह पर काफी पैसा खर्च किया है। 
     बलोचिस्तान के नेताओ ने और अफगानिस्तान के नेताओ ने मोदी जी का धन्यवाद दिया है। उनकी आवाज, उनका दर्द विश्व के सामने लाने के लिए। पाकिस्तान के दिए जख्मो के कारण विश्व करहा रहा है। जब सभी जख्मी देश मिलकर उसका विरोध करेंगे तभी उसे अपने गलत कारनामो का अहसास होगा। उसे रोकने के प्रयास करेगा। 

#rajnath singh or sark smellan

                                            राजनाथ और सार्क सम्मेलन 
      पहली बार मुझे एहसास हुआ मैं सशक्त गृहमंत्री के राज में रह रही हूँ। अब से पहले जितने भी नेता थे वे दूसरे देशो के सामने दयनीय अवस्था में अपने दर्द को बयान करते थे। दयनीय अवस्था के लोगो पर केवल दया की जाती हैं। साथ ही कमजोर लोगो पर ध्यान कम दिया जाता है।  हमारी समस्या लोगो के लिए अहम नही थी।
     एक बार विदेश में मैंने ये समस्या रखी तब मुझे जबाब मिला -"जो समस्या तुम्हारी है जिस समस्या से किसी अन्य पर असर नही होता। उसके लिए तुम किसी अन्य से मदद की उम्मीद कर रहे हो।  तुम्हारा साथ कोई क्यों देगा। सबसे पहले भारत के नेताओ को उसका सामना करने के लिए कदम उठाने चाहिए जब तुम कदम उठाने में असमर्थ हो तो दुसरो से उम्मीद मत करो। ." सभी देशो में भारतीय अकर्मण्यता का यही सन्देश जाता था। भारत केवल हाथ जोड़े खड़ा रहने वाला देश है इसके बस में गिड़गिड़ाने के आलावा कुछ नही है। यह किसी का कुछ बिगाड़ नही सकता।
      आज हमारे नेताओ की छवि बदल रही है रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तिया याद आ रही है।
 "क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो।
उसको क्या जो दंतहीन ,विषहीन विनीत सरल हो। "
        राजनाथ सिंह के सार्क  सम्मेलन में पहुँचते ही कोई बड़ा नेता उन्हें लेने एयरपोट पर नही आया।  सारे भारतीय  मीडिया कर्मियों को उनके साथ अंदर नही जाने दिया। अन्य रिपोर्टरों को उनके भाषण को रिकॉर्ड करने की अनुमति प्रदान नही की गयी। उन्होंने प्रतिरोध स्वरूप हाथ गर्म जोशी के साथ नही मिलाया। उन्होंने पाकिस्तानी गृहमंत्री  के लंच का निमन्त्रण भी ठुकरा दिया। अब तक जितने भी नेता पाकिस्तान में गए उन्होंने इससे पहले पाकिस्तानी नेताओ की भूरी -भूरी प्रशंसा की।भले ही उनके मन में कड़वाहट भरी थी।                 इससे उन्होंने भारत का कभी महत्ब नही समझा। भारत पाकिस्तान की अपेक्षा अधिक ताकतबर है। 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना को मुँह की खानी पड़ी थी। वह हार बहुत शर्मदायक थी वरना अब तक पाकिस्तान कई और हमले भारत पर कर चुका होता।
     जितनी पाकिस्तान की जनसँख्या है। उससे अधिक भारत की जेलो में कैदी है।  .
        भारत में आतंकवादी घटनाओ का जन्मदाता होने के बाद भी पाकिस्तान बुरहानवानी जैसे लोगो को महिमामंडित करके उन्हें शहीद की श्रेणी में रखता है। जिसने भारत के 60 से अधिक लोगो को आतंकवादी बनने के लिए प्रेरित किया। सारा संसार आतंकवाद से कराह रहा है। पाकिस्तान में आतंकवादी सरकार की नाक में दम किये हुए है। लेकिन वह एक तरफ आतंकवाद की बुराई करता है लेकिन भारत के आतंकवादियो  को पाल पोस रहा है। यह दोरहा रवैया संसार के सामने लाना जरूरी था। यदि राजनाथ का भाषण कवर करने की  पाकिस्तान अनुमति दे देता तो उसकी पोल सारे संसार के सामने खुल जाती।
       राजनाथ और मोदी जैसे नेताओ से पाकिस्तान डरने लगा है। मोदी ने पाकिस्तान के सभी हमदर्द देशो से दोस्ती का हाथ मिला लिया है। इस कारण पाकिस्तान छटपटा रहा है। इसकी प्रतिक्रिया दिखाई देनी शुरू हो गयी है। पाकिस्तान को अमरीका की तरफ से मिलने वाली मदद पहले की अपेक्षा चौथाई रह गयी है। जिन देशो में पाकिस्तानी लोगो को हाथो -हाथ लिया जाता था। वहाँ भारतीयों को स्थान मिलने लगा है।
       पाकिस्तान को कश्मीर का दर्द दिखाई देता है। लेकिन जिसे वह आजाद कश्मीर की संज्ञा देता है। जो पाकिस्तान के नियंत्रण में है। उनकी कराह सुनाई नही देती है। जिन्हें  वहाँ के वाशिंदों ने जानवरो की तरह जीने के लिए मजबूर कर दिया है। मैं चाहती हु हमारे नेता वहाँ की हालत कश्मीरियो के सामने लाये। जिससे उनकी आँखों के सामने सच्चाई आये। आज सिर झुकाये मुश्कुराने वाले नेताओ की नही जुझारू और कर्मठ नेताओ की जरूरत है। जो हमें मिल गए है।
      

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...