राम जन्मभूमि मंदिर और आस्था का सफर

मुझे सरकार की बदौलत आस्था ट्रेन के द्वारा अयोध्या जाने का मौका मिला । मेरी ट्रेन पुरानी दिल्ली से रात 11.55 मिनट पर चलनी थी हमे 10 बजे वहाँ पँहुचने के लिए कहा गया । मुझे वहाँ का माहौल अलग सा लगा । वहाँ भक्तों के स्वागत का विशेष आयोजन था । 1504 यात्री एक गाड़ी से सफर करने के लिए निमंत्रित थे । सबसे पहले हमे एक स्थल पर इकट्ठा किया गया । उसके बाद सबका तिलक लगा कर हिन्दू रीति से स्वागत किया । उसके बाद गणमान्य सदस्य सांसद मनोज तिवारी ,विधायक जितेंद्र महाजन और पार्षद रीता माहेश्वरी जी ने उद्बोधन किया । उसके बाद उनके द्वारा हमपर फूलों की वर्षा की गई । उसके बाद नतमस्तक होकर हाथ जोड़कर विदा किया गया । मुझे सबसे ज्यादा इस बात की हैरानी हुई । अब तक हम हमेशा बड़े लोगों के सामने जाते समय खुद को अकिंचन समझते थे । आज उन्होंने हमारा सपना पूरा करने के साथ नतमस्तक होकर हमे बड़ा बना दिया । उन्होंने इतने बड़े समुदाय के लिए चाय और बिस्किट के जल पान का प्रबंध भी किया था । इतनी रात को इसके द्वारा हमारी नींद भी गायब हो गई । वहाँ पर हमे एक बिल्ला दिया गया । जिसे अधिकतर समय हमे अपने गले मे लटकाना पड़ा । वह हमारी टिकट के साथ पहचान पत्र भी था । उसके द्वारा अधिकतर आयोजन कर्ता को हमसे कुछ पूछना नहीं पड़ता था । उसका रंग और शब्द हमारे बारे मे सबकुछ बताने मे समर्थ थे । आस्था ट्रेन पूरे भारत से चलाई जा रही है । मैं गुजरात ,बिहार , झारखंड ,तेलंगाना ,आंध्र प्रदेश ,हैदराबाद बंगलोर और तमिलनाडु से आये यात्रियों से भी मिली ।मुझे लगता है राम मंदिर के कारण पूरा भारत एकजुट हो रहा है । इसकी कीमत सरकार ने हमसे केवल 875 रु लिए । हमारी यात्रा आस्था ट्रेन के द्वारा पूरी होनी थी । यह ट्रेन साफ-सुथरी थी लेकिन वातानुकूलित नहीं थी ।वहाँ एक तकिया ,पानी की बोतल ,चादर और कंबल दिया गया । यदि आपको ठंड ज्यादा लगती है तो उसका प्रबंध आपको करके जाना चाहिए । हमसे अधिक पूछताछ नहीं हुई । इस पहचान पत्र के द्वारा अधिकारी गण सब कुछ समझ जाते थे । अगले दिन हमे ट्रेन मे नाश्ता दिया गया । लंच के समय खाने का प्रबंध था । सब कुछ अच्छा था । मुझे उसमे आलू की सब्जी अच्छी नहीं लगी क्योंकि उसमे आलू के छिलके बिना उतारे सब्जी बना दी गई थी । वापिसी के सफर मे जब पूरी सब्जी का नाश्ता दिया गया । तो पूरी की संख्या पाँच थी लेकिन उनका आकार बहुत छोटा था । कुछ लोग तो पूरी को एक कौर मे ही खा गए । सब्जी इतनी कम थी कि आधे मे ही खत्म हो गई । इसमे मुझे सरकार से ज्यादा पेंट्री वालों का लालच लग रहा है । जिसने पैसे तो पूरे वसूल किए लेकिन खाने मे कटौती कर ली । अयोध्या मे इतने सारे लोगों को टेंट सिटी तक पहुंचाने के लिए बस लगा रखी थी । जिसके कारण हम आसानी से गंतव्य स्थल तक पँहुच गए । हमारे स्थल का नाम मिथिला था । जो सिटी टेंट मे सबसे दूर था । जहां हम जैसे वृद्ध जनों का जाना कठिन था । इतने बड़े स्थल की कल्पना करना मेरे लिए कठिन था । उसे देखकर मुझे कुम्भ के मेले की याद आ गई । वहाँ पर बहुत बड़े टेंट लगे थे । बड़े टेंटों मे लगभग 500 लोग समा सकते थे ।जिसमे पावर स्विच थे जिससे मोबाइल चार्ज किया जा सकता था । मुझे छोटा टेंट मिला था उसमे 22 लोगों के रुकने की व्यवस्था थी । मै जीवन मे पहली बात इतनी बड़ी जगह मे रुकी थी जहां मेरे चारों तरफ अनजाने लोग थे । वहाँ एक पलंग के अलावा मेरे पास अपना कहने को कुछ नहीं था । मेरे समान की रखवाली के लिए कोई लॉकर नहीं था । उस पलंग पर ही समान रखकर घूमने चले जाते थे । आजतक अपना समान मैंने कभी राम भरोसे नहीं छोड़ा था । शुरू मे हिचक हुई लेकिन बाद मे आदत पड गई । आपको मै सलाह देना चाहूँगी ज्यादा पैसे या कीमती समान लेकर न जाए क्योंकि वहाँ अधिक पैसों की जरूरत नहीं पड़ेगी । अभी अयोध्या का ज्यादा विकास नहीं हुआ है जिसके कारण आपको ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं पड़ेगी । रहने-खाने और आने जाने का प्रबंध सरकार ने कर दिया है । इसके अलावा आपको जीतने पैसों की जरूरत पड़े केवल उतना ही लेकर जाना । यानि बहुत कम पैसों की जरूरत पड़ेगी । इन टेंटों मे रात मे ठंड बहुत लगती है और दिन मे गर्मी भी लगती है । इसलिए अपना सही इंतजाम करके आना । मेरे हिसाब से आप हल्के कपड़ों के ऊपर गरम स्वेटर या शाल का इस्तेमाल करे तो बेहतर होगा । क्योंकि दोपहर मे गर्मी बहुत ज्यादा होती है जिस कारण दिन मे गरम कपड़े सहन नहीं होते । शाम ढलते ही ठंठ अपने सारे हथियार निकाल लेती है । बड़े टेंटों मे पावर पॉइंट है जिसमे आप अपना फोन चार्ज कर सकते है लेकिन छोटे टेंटों मे पॉवर पॉइंट नहीं है । जिसके पास पावर बेंक है वे उसे जरूर लेकर जाए क्योंकि आजकल फोन के बिना जीना मुश्किल हो जाता है । यहाँ पर पूरा परिवार एक साथ नहीं रह पाता है । औरते अलग और मर्द अलग टेंटों मे रहते है जिसके कारण फोन से ही बात हो पाती है । यह स्थल इतना बड़ा है जिसमे आप अपनों को आसानी से ढूंढ नहीं पाते है । मुझे अपने पति को ढूँढना मुश्किल हो जाता था । मुझे उन्हे ढूँढने के लिए घोषणा तक करवानी पड गई । टेंट सिटी मे खाने और पानी का पर्याप्त प्रबंध है । उसका खाना सात्विक और स्वादिष्ट है । सफाई भी सही है । नहाने आदि की विशेष व्यवस्था है । टेंटों का नाम भी राम से संबंधित है हम मिथिला मे ठहरे थे । वहाँ जानकी , पंचवटी ,प्रयाग और अंजनेरी जैसे नाम के स्थल बने है । गंतव्य से लेकर मंदिर तक बसे छोड़ देती है । उसके बाद लाने का भी प्रबंध है । आपको वहाँ अयोध्या मे छोटी गलियों मे जाने के लिए अन्य यातायात के साधनों की जरूरत पड़ेगी जहां बसे नहीं जा सकती है । कुछ लोग पैदल भी चले जाते है । हम जेसे शहरी लोगों के लिए इतना चलना मुश्किल था इसलिए हमने अन्य वाहनों का सहारा लिया । अधिकतर दर्शनीय स्थल 1 किलोमीटर के अंदर ही आ जाते है । हनुमानगड़ी एक प्रसिद्ध मंदिर है । इसमे रक्षा के लिए पुलिस तैनात थी । लेकिन मुझे यहाँ सफाई की कमी दिखाई दी । उसके बाद हम भृगु आश्रम गए । वहाँ की आरती देखकर मन खुश हो गया । वहाँ के बहुत पास कनक महल है लेकिन वह महल कम और मंदिर ज्यादा लगा । दशरथ महल भी मंदिर मे बदल गया है । उसकी भव्यता दर्शनीय है । आपको वहाँ जानकी महल , सुग्रीव महल या मंदिर कुछ भी कहा जा सकता है ,नागेश्वर नाथ मंदिर, त्रेता का ठाकुर ,छोटी छावनी ,सीता की रसोई और श्री कठिया मंदिर दिखाई देंगे । एक तरह से अयोध्या आध्यात्मिक नगरी है । उसके पास ही सरयू नदी बह रही है ।जिसका पाट बहुत चोंडा था । लेकिन स्नान करने की अलग व्यवस्था थी जहां लोग स्नान करते है । कपड़े बदलने के लिए भी विशेष जगह बनाई गई है जिससे औरतों को असुविधा न हो । आजकल लोग वहाँ पर सरयू जल ले जाते हुए दिखाई दिए । इसमे बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है इसके द्वारा हमने अनेक घाट देखे । जो हम पैदल नहीं देख पाते क्योंकि हमे इतना चलने की आदत नहीं है । हमने नया घाट से नाव लेकर सभी घाटों के दर्शन किए । सरकार ने वहाँ पर इलेक्ट्रिक नावों को भी चलाया है ।शाम को सरयू नदी की आरती की सुंदर व्यवस्था है । यदि आप हनुमान गडी से राम जन्मभूमि देखने जाओगे तो आपको बहुत कम चलना पड़ेगा । लेकिन यदि राम जन्मभूमि की भव्यता देखना चाहते हो तो आपको वहाँ पर उतरना चाहिए जहां बसे रुकती है । लेकिन वहाँ से मंदिर तक पँहुचने के लिए आपको पैदल चलने मे 2 से 3 घंटे तक लग सकते है । इसका मार्ग बहुत सुंदर बना है । अनेक स्थानों पर राम से संबंधित पेंटिंग लगी है । राम से संबंधित मूर्तियाँ भी लगी हुई दिखाई दे जाएंगी ।यहाँ सारे रास्ते राम भजन सुनाई देते रहते है । पूरा माहौल राम मय हो जाता है । इस रास्ते मे किसी गाड़ी की सुविधा उपलब्ध नहीं है । इसलिए अपने पैरों के द्वारा ही पहुंचना पड़ता है । अधिकतर लोग चलते -चलते ही बेदम हो जाते है । इसलिए मे आपको हनुमान गडी से ही राम जन्मभूमि जाने की सलाह दूँगी ।हनुमान गडी से राम मंदिर मुश्किल से 10 मिनट की दूरी पर है । क्योंकि मेने दोनों रास्ते देखे है ।इस रास्ते मे पौधारोपण किया गया था लेकिन उनकी सही प्रकार से सार संभाल नहीं होने के कारण वे सही तरह से पनप नहीं पा रहे है । आप मंदिर मे कोई भी चीज नहीं ले जा सकते है । आपकी जेब मे अगर टॉफी है तो वह भी निकलवा दी जाती है । आप कोई भी प्रसाद और पूजन सामग्री न ले जाए क्योंकि वह बाहर ही रखवा दी जाएगी । आपका फोन, इलेक्ट्रिक समान और पेन तक बाहर रखवा लिया जाता है ।यहाँ लॉकर सिस्टम की अच्छी व्यवस्था है एक साथ 14 लॉकर रूम बने है उन लॉकर मे आपका समान रख कर उसकी चाबी आपको दे दी जाती है । उस चाबी को संभाल के रखना है यदि वह चाबी खो जाएगी तो आपको समान भी वापिस नहीं मिलेगा । आपको जूते भी कॉउटर पर जमा करवाने पडते है ।जिसकी संख्या अलफाबेटिकल है उसका टोकन भी संभाल कर रखना पड़ेगा । क्योंकि उसके बिना आपको जूते वापिस नहीं मिल पाएंगे । लॉकर रूम और जूते आप जिस काउंटर पर जमा करवाएंगे उसकी दूसरी जगह से वह आपको मिल पाएंगे । इसलिए आप किसी को अपना समान दिखा कर मांग नहीं सकते बल्कि केवल टोकन और चाबी ही काम आएगी ।इन्हे जमा करवाने और लेने मे बहुत कम समय लगता है जबकि भीड़ बहुत अधिक होती है । यहाँ अनेक डॉ बैठे है जो आपका इलाज करके दवाई भी देते है । ऐसी व्यवस्था इससे पहले मैंने कभी नहीं देखी थी । यहाँ आप केवल भगवान के दर्शन दूर से कर सकते है । आपको भगवान के पास तक जाने की सहूलियत नहीं मिलेगी । भगवान की मूर्ति के बहुत दूर तक ही इंसान जा सकते है । इसलिए दूर से भगवान को देखते आये क्योंकि पास मे पँहुचते ही आपको सुरक्षा अधिकारी आगे बड़ने के लिए प्रेरित करेंगे । वहाँ आप जीभर कर उन्हे निहार नहीं सकते है । इसलिए मै पूरे मंदिर की भव्यता दूर से ही देखती आ रही थी सोने के दरवाजे और विशेष दीवारे मुझे अभिभूत किए जा रही थी । मुझे सोने के दरवाजे छूने का मौका मिला जो मैंने जिंदगी मे पहली बार देखे थे । यहाँ एक समय मे अनेक पंक्तियों के द्वारा बहुत सारे लोग भगवान के दर्शन कर सकते है । यहाँ लता मंगेशकर चौक देखने लायक है यहाँ बनी हुई वीणा मन को मोहित कर लेती है । सामने हनुमान जी के कंधे पर उठाए हुए राम अद्भुत छवि बिखेरते है । रात की रोशनी मे यह स्थल अद्भुत बन जाता है । पूरे अयोध्या मे बदलाव दिखाई देने लगा है । यहाँ की दुकानों पर एक ही तरह के बोर्ड लगे है । मुख्य दर्शनीय स्थानों की सफाई की व्यवस्था की जा रही है । अभी मुख्य स्थल मे बदलाव आया है बाकि जगह लगता है जैसे किसी छोटे शहर मे आ गए है । उन जगहों पर बहुत पिछड़ापन दिखाई दिया । यदि आप पैसे वाले है तो आप राम मंदिर के पास होटल बुक कराए वरना आपको आने -जाने मे परेशानी होगी । मेने राम मंदिर के रास्ते मे कुछ होटल देखे है । अभी वहाँ होटल बनने चालू हुए है इसलिए सरकार ने टेंट सिटी का निर्माण किया है ।टेंट सिटी बहुत बड़ी है इसलिए आपको अपनी टेंट सिटी कहाँ है याद रखना पड़ेगा यह कई जगह बसाई गई है और टेंट का नाम याद रखना पड़ेगा । हम सरकार के कारण गए थे । इसलिए सस्ते टेंट सिटी मे रुके थे । यदि आप अमीर है तो महगे टेंट रूम भी बने है जहां आप जा सकते है । यहाँ पर टेंट मे सफाई से खाना बनाया जाता है । यदि आप बाहर जाकर खाना चाहे तो मै आपको उसके लिए मना करूंगी । अभी अच्छे रेस्टोरेंट नहीं बने है इसलिए आप घर से सूखा नाश्ता लेकर जाए । वहाँ छोटे होटल या फेरी वाले दिल्ली से भी मंहगा समान बेच रहे है । उसी प्रकार आने जाने वाले वाहन भी मुंह मांगे दाम वसूल कर रहे है । क्योंकि इतनी भीड़ मे उन्हे बहुत अधिक फायदा हो रहा है । मेने जिंदगी मे पहली बार ऐसी ट्रेन मे सफर किया था जो निश्चित समय से पहले पँहुच गई थी । उन्होंने हमे नाश्ता 7 बजे दे दिया था तब मुझे अजीब लगा । मेने सोचा सुबह 10.45 बजे उतरना है तब तक हमारा सारा खाना पच जाएगा । उसके बाद क्या करेंगे । जो खाने का समान साथ लेकर आये थे वह तो खत्म हो चुका था । लेकिन हमारी ट्रेन 8.45 पर गाजियाबाद रुकी अधिकतर यात्री वही उतर गए । हमारी ट्रेन पुरानी दिल्ली स्टेशन पर 9.25 बजे पँहुच गई । हमे बहुत हैरानी हुई ।यह मेरी जिंदगी मे पहली बार हुआ था । मेरी ट्रेन हमेशा देर से भले पँहुचे लेकिन जल्दी कभी नहीं पँहुची थी । अधिकतर ट्रेन यदि जल्दी आती भी थी तब उसे हाल्ट पर रोक लिया जाता था । मुझे यहाँ आकर कुम्भ के मेले की टेंट सिटी की याद आ गई । अंतत कह सकती हूँ मेरा सफर अविस्मरणीय और सुखद रहा । https://www.youtube.com/watch?v=knk1EDKA7a4

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...