त्योहार और स्वास्थय

                        त्यौहार और स्वास्थ्य 


  आजकल त्योहारों का माहौल है। हर तरफ खुशियाँ  छाई  हुई है। मन उमंग से भरा हुआ है। रोज अनेक तरह के पकवान बन रहे है। ऐसे त्योहारी मौसम में स्वास्थ्य का ध्यान रखना मुश्किल हो जाता है। हमारे देश में हर त्यौहार के साथ कुछ नियम -कायदे जुड़े हुए है। जिसका पालन करके हम स्वस्थ रहकर त्योहारों का मजा ले सकते है। 

     आपको यदि याद  हो तो आपको अपने घर की पुरानी  औरतो की दिनचर्या याद  कर लेनी चाहिए। वे पूर्णिमा ,नवरात्रि ,करवाचौथ ,होई  जैसे अधिकतर त्योहारों पर व्रत रखती थी। इससे उनका शरीर स्वस्थ रहता था। सिर्फ पूरे  दिन पकवान  खाना -पीना शरीर को ख़ुशी अवश्य देता है।  पर शरीर को ख़राब कर देता है। इसलिए जरूरत के मुताबिक ही खाना चाहिए अनाप -शनाप खाना नहीं चाहिए।  शरीर का स्वास्थ्य ही हमें असली ख़ुशी देता है। 

      ये समय मौसम बदलने का भी है। इस समय हम गलत कपड़ो का चुनाव करके बीमारियों को बुलावा दे रहे है। आप जवानी में गलत व्यवहार करके बीमारियों से बचे रह सकते है लेकिन बच्चो और बड़ो के लिए सही कपड़े  पहनना जरूरी है वरना  बिस्तर पर रहकर त्योहारी सीजन बिताना पड़ेगा।

      इस समय ऐसा माहौल है अस्पताल में एक बिस्तर भी नहीं मिल रहा है। इस समय करोना , डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां  विकराल रूप ले चुकी है।  इसलिए त्यौहार तभी खुशियां लाते  है। जब हम स्वस्थ रहते है। वरना  आपके साथ  पूरा घर दुःख में डूब  जायेगा।  इसलिए नियमो  का ध्यान रखते हुए त्योहार मनाये , स्वस्थ रहेऔर  ख़ुशी से भरे रहे। 

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...