दुर्गा पूजा और नारी
आजकल नवरात्रि का समय आ गया है । सारा हिन्दू समाज भक्तिमय दिखाई देने लगा है । हर तरफ मंदिर सजे हुए है । मंदिरों मे दर्शनार्थियों की लंबी पंक्ति लगी हुई है । अनेक जगहों पर पूजा से संबंधित समान बिक रहा है ।उत्तर भारत मे रामलीला ,गुजरात मे डांडिया खेला जा रहा है । वही बंगाल मे दुर्गापूजा की धूम है । दिल्ली जैसी जगहों मे तीनों उत्सव धूम -धाम से मनाते हुए लोग दिखाई दे जाएंगे ।
इन सबके बीच मेलों का आयोजन किया जा रहा है । जो भीड़ मे जाने से बचते है अब वे भी इनकी रौनक देखने के लिए बाहर निकलने लगे है । शाम के समय सड़कों पर भीड़ -भाड़ दिखाई दे रही है ।
इन सबके द्वारा देवी के अनेक रूपों की पूजा देखी जा सकती है । संसार मे संतुलन लाने के लिए नर के साथ नारी की पूजा जरूर की जाती है । जो कार्य नर नहीं कर पाते है । उनके लिए नारी का सहारा लिया जाता है । देवी की कहानियाँ सुनकर प्रतीत होता है । भगवान जब हारने लगते है तब वे भी देवी का सहारा लेने से चूकते नहीं है । अनेक राक्षसों का संहार देवी के द्वारा करते हुए दिखाया गया है जबकि पुरुष नारी से अधिक शक्तिशाली होते है । लेकिन कई जगह ब्रह्मा ,बिष्णु और महेश ने अपनी दिव्य शक्तियां देवी को देकर उन्हे शक्तिसंपन्न बनाया । इस काम को करवाने मे उन्हे महिला को कमतर साबित करने की जगह अपने बराबर का स्थान देते हुए दिखाया गया है ।
इन दिनों मे देवी की पूजा अनेक प्रकार से की जाती है । इसके कारण समाज मे साबित करने की कोशिश की जाती है । नारी को मौका मिले तो वह भी जीवन मे महत्वपूर्ण काम कर सकती है । बलवान और ताकतवर को भी धूल चटाने मे पीछे नहीं रहती है ।
इससे प्रेरणा मिलती है । नारी को कमजोर समझने की जगह उसे शक्तिसंपन्न बनाओ । उसकी शक्ति ,समाज के उत्थान के साथ परिवार के उत्थान मे सहायक होगी । वह किसी पर बोझ साबित नहीं होगी बल्कि वह एक नहीं अनेक परिवारों की तरक्की का कारण बनेगी । यदि एक आदमी पड़ाई करता है तब उसके कारण एक परिवार की उन्नति होगी है जबकि एक औरत की पड़ाई के कारण तीन परिवार सम्मानित महसूस करते है । उसका मायका ,ससुराल और उसका अपना परिवार अवश्य उन्नति करता है ।