शांति और अशांति का अंतर्
हम सोचते है जहाँ भी मुसलमान होते है वे दूसरे समुदाय वालो को पसंद नहीं करते। इसलिए वे उन्हें अनेक तरह से परेशान करते रहते है। लेकिन ये अधूरी सच्चाई है। क्योंकि जिन देशो ने राष्ट्रीय धर्म इस्लाम बना दिया है। जहाँ उनके धर्म के आलावा अन्य धर्म के लोग बचे नहीं है। वे अपने धर्म से निकली अनेक शाखाओ वालो को परेशान करने लगे है। वहां अनेक तरह के दंगे फसाद अब पहले से ज्यादा हो रहे है।
अफगानिस्तान में हाजरा समुदाय वालो का इस कदर मारा गया है कि इस समुदाय वालो को 75 % तक खत्म कर दिया गया है। वहां शिया - सुन्नी का झगड़ा चल रहा है। अभी मस्जिद में हुए बम विस्फोट को क्या कहेंगे जिसमे सौ से अधिक लोग मारे गए है।
ये मानव इतिहास का काला पहलू है। जिसमे प्यार और नफरत साथ -साथ चलती है। इतने लोग तब भी मारे नहीं जाते थे। जब मानव जंगली जीवन जीता था। जितने अब लोग हिंसात्मक कार्यवाही के कारण मारे जा रहे है। जितने भी मुस्लिम राष्ट्र है सब हिंसा की आग में सुलग रहे है।
उनके लिए अपने देश में रहना मुहाल हो रहा है। दूसरे देशो की तरफ भाग रहे है। कोई देश उन्हें पनाह देने के लिए तैयार नहीं है। उन लोगो के बारे में सोच कर देखिये जो अपना भरा -पूरा घर छोड़ कर भाग रहे है। कितने बेबस होकर वे घर छोड़ते है उनके दर्द के बारे में सोच कर रूह कांप उठती है। वे सिर्फ सुकून और जिन्दा रहने के लिये दर -बदर भटक रहे है।
हर इंसान की जान अपने घर की हर चीज में बसती है। वे कितनी मुश्किल से घर छोड़कर खाना -बदोश की जिंदगी बिताने के लिए निकलते है। जबकि उन्हें पता है। उन्हें किसी भी देश में स्वीकार नहीं किया जायेगा। उन्हें हर जगह दुत्कारा जायेगा लेकिन अपनी और अपनों की जिंदगी के लिए घर बार छोड़ने के लिए मजबूर होते है।
इसलिए कहा जाता है स्वर्ग से सुंदर अपना देश होता है। अपने देश में रहते हुए जो सम्मान पा सकते है। वह कही और नहीं मिलेगा। देश के हिसाब से भी सम्मान और अपमान का सामना करना पड़ता है।
इसलिए कहा जाता है - अपने देश के लिए सर्वस्व त्यागने में भलाई है। यदि आपके पास सभी सुख के साधन है लेकिन देश में अशांति है तब आपके सुख रखे रह जायेंगे। जैसे अफगानिस्तान के अमीर लोग जिंदगी के लिए जान हथेली पर लिए भाग रहे है।