बेबसी
हम सभ्य समाज में रहते हुए दम भरते है कि सब ठीक है। लेकिन कई बार ऐसी घटना घटित हो जाती है। कि हम सोचने के लिए मजबूर हो जाते है। इसे क्या कहना चाहिए जब एक औरत के लिए जीवन की सारी सुखद अनुभूतियाँ खत्म हो जाती है.
मेरी सहयोगी ने जब बताया उसने प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी छुप -छुप कर की है। मेरे लिए यकीं करना मुश्किल हो गया।
उसने कहा - मै सबके सो जाने के बाद पढ़ाई करती थी। यदि पति की आंख खुल जाती थी। वह मेरे बाहर होने का कारण पूछते थे तब मै उन्हें नींद न आने का कारण बताती थी। कभी नहीं कह पाती थी कि बाहर के कमरे में पढ़ रही थी। मेरे हाथ में पूरे दिन कोई किताब नहीं देख सकता था सब किताब देखते ही गुस्से से उबलने लगते थे। मैने घर में शांति बनाये रखने के लिए सभी के सामने कभी किताब खोलने की कोशिश नहीं की।
मुझे उसकी असमर्थता पर बहुत हैरानी हुई। उसका कारण पूछने पर उसने कहा - "जब मुझे देखने आये तब उन्होंने सबसे पहले शर्त रखी थी। आपकी बेटी कितनी भी पढ़ी लिखी है। हम सिर्फ इसी शर्त पर शादी करेंगे। ये कभी नौकरी नहीं करेगी। " मुझे यह शर्त सुनकर बहुत हैरानी हुई।
मैने आज के समय में सरकारी नौकरी करने वाली लड़कियों की हाथो- हाथ शादी होती देखी है। वही एक ऐसा परिवार भी हो सकता है.यह मेरी कल्पना से बाहर था।
मेने उससे पूछा जब तुम्हारी पढ़ने की इतनी इच्छा थी। तब तुमने यह शर्त क्यों स्वीकार की।
उसने कहा - इस रिश्ते को देखकर परिवार के लोग इतने खुश थे कि उनकी ख़ुशी के सामने मुझे अपनी ख़ुशी कोई खास नहीं लगी मैने शादी के लिए हाँ कर दी। वह शादी से पहले MA बीएड थी। उसने अच्छे अंको से पढ़ाई पूरी की थी। उसे पढ़ना बहुत अच्छा लगता था।
मैंने बहुत सारे लोगो को दिन रात पढ़ते हुए देखा है। कोचिंग सेण्टर में जाकर ज्ञान बड़ा कर भी इन प्रतियोगिताओ में असफल होते देखा है। उनकी एक नहीं अनेक बार की कोशिश बेकार गयी। मेरे लिए यह असम्भव कार्य लग रहा था।