#confident woman

                        आत्मविश्वासी औरत  

 आज  भी  नारी को जीवन में अनेक समस्याओं का सामना करता पड़ता  है। यदि  उसने बेटियों को जन्म दिया है तो वह पूरी जिंदगी सम्मान  पाने के  लिए तरसती   रहती है। उसकी काबिलियत मायने नहीं रखती। उसको खुद मजबूत बनना पड़ता है। तभी वह खुद को और अपनी बेटियों को समाज में सम्मान दिलवा सकती है।  ऐसे ही मेरे जीवन में रमा का  पदार्पण हुआ।
     वह सांबले रंग की प्यारी सी  औरत थी। उसके शब्दों में मिठास थी। जब चलती थी तो उसकी चाल  देखकर लगता था मानो नई  नवेली दुल्हन अभी डोली से उतरी   है। उसे देखकर बिलकुल नहीं लगता था उसकी उम्र पचास के आस -पास है।
      उसकी तीन बेटियां थी वे तीनो उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही थी। रमा एम  ऐ  बी.एड  होकर सरकारी विद्यालय में ऊँची नौकरी कर रही थी। सभी उसकी नम्रता के कायल थे। वह कभी ऊँची आवाज में  बोलती या किसी से लड़ती दिखाई नहीं दी। इस उम्र की औरतो की इतनी विनम्रता मुझे हैरानी में डाल  देती थी।
          वह हमेशा अपनी बेटियों को साक्षात्कार कराने  या किसी और काम से अकेले ही दिल्ली से बाहर ले जाती थी। अब से बीस साल पहले मैने   ऐसी सक्षम औरते नहीं देखी  थी।
    एक दिन उनसे मैने  पूछा -तुम ऐसा कैसे कर लेती हो तुम्हे डर  नहीं लगता। .
     उसने कहा -मुझे भी सामान्य औरतो के सामान पहले डर लगता था। जब मेरी नै शादी हुई थी। एक दिन मेने पति से नौकरी  के  सिलसिले में अपने साथ चलने के लिए कहा।
      उनके पास समय नहीं था। उन्होंने टाल  दिया।
मै  काम में लग गई। इस बारे में सोचना बंद कर दिया काम में लगे हुए मेने चलते -चलते अपने पति को उनकी बहन से बात करते सुना ।
      वह बहन से कह रहे थे -तेरी भाभी गांव  से आयी है। उसे शहर में घूमते हुए  डर लगता है। तुम उसके साथ चली जाना।
      ये बात मेरे मन को चुभ गई। गांव की होने का मतलब डरपोक होने से नहीं है। मेने धीरे -धीरे अपने को शहर के हिसाब से ढालना शुरू कर दिया। शुरू में डर  लगता था। बाद में आदत पड़  गई। 
     हम दोनों नौकरी   मै होने के कारण प्रत्येक जगह साथ नहीं जा  सकते थे  . समय की कमी ने भी मुझे विश्वासी बना दिया। हमारे घर तीन में  लड़कियां थी। उन्हें डरपोक या दब्बू  बनाकर जीवन भर रोने  की जगह खुद को विश्वासी बनाकर उनमे आत्मविश्वास जगाया जा सकता है।
     उन्हें देखकर लगता है डर  के आगे जीत  है। मेने बहुत सारी  .ऐसी औरतो को देखा है जो जिंदगी भर सभी को कोसते हुए अपनी और अपने आस -पास के लोगो की जिंदगी बर्बाद करती रहती है। लेकिन वह मेरे और मेरे जैसी औरतो के लिए प्रेरणा  स्रोत बनी.
      

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...