मासूमियत के साथ गृहस्थी
रेशमा की शादी सत्रहवें साल में हो गई थी। वह बहुत भोली -भाली और मासूम सी लड़की थी। उसे सही तरह से दुनियाँ की समझ नहीं थी। बल्कि दुनिया को सही तरह से देखना अभी शुरू किया था। उसकी मासूमियत कई दफा हमें हंसने पर मजबूर कर देती थी। उसे घर गृहस्थी की भी जानकारी नहीं थी। उसके कारनामे हमारे बीच चुटकुलों का काम करते थे.
एक बार हम उसके घर गए। उसके फ्रिज में से बदबू आ रही थी। हमने उससे इसकी शिकायत की। फिर हमारा ध्यान दूसरी तरफ चला गया। हम अपनी बातो में मशगूल हो गए। हमें इसका ध्यान नहीं रहा कि हमने रेशमा से क्या कहा हैकुछ देर बाद उसके हाथ में धूपबत्ती दिखाई दी। हमने सोचा पूजा के लिए जलाई होगी। लेकिन वह आयी। उसने फ्रिज के अंदर सामान हटा कर जगह बनाई और उसमे धूपबत्ती रख दी। हमें समझ नहीं आया। उसे क्या कहे।
हमारे अनुसार उसे फ्रिज से ख़राब खाना निकाल के फेंक देना चाहिए था। लेकिन किसी को सलाह देना कभी -कभी कितना मुश्किल होता है। यह हमें उस दिन पता चला। हम चुपचाप उसके कारनामे को देखते रह गए।
पहले ज़माने में फ्रिज में से पानी निकल कर नीचे एक ट्रे में इकट्ठा होता रहता था। यदि उसमे से पानी नहीं निकालो; तब उसका सारा पानी फेल कर सारे घर को गीला कर देता था। ट्रे में पानी भर जाने पर उसे फेंक कर खाली करना पड़ता था।
ऐसे ही एक बार हम उसके घर गए. पानी फैलकर हमारे पास तक आ रहा था। फिर हमने उससे शिकायत की।
उसने कहा -दीदी ये फ्रिज तो ख़राब है। इसमें से पानी निकलता रहता है।
हम उसके ज्यादा सम्पर्क में नहीं रहते थे। तब उसे सलाह किस तरह दे. हमे समझ नहीं आ रहा थे। कही हमारी सलाह को हमारा बड़प्पन न समझ ले। इस लिए चुप रहने में ही हमने अपनी भलाई समझी।
उसके बचपन में पापा की मौत हो गई थी जिसके कारण उसके पिता की जिम्मेदारी भी माँ को उठानी पड़ी। उन्होंने अपनी नौकरी के कारण उसे उसके चाचा के घर भेज दिया था।
किसी की लड़की को घर में रखकर घर के काम- काज सीखाना आसान नहीं होता। अपनी बेटी को डाँटा जा सकता है लेकिन किसी और की बेटी को डाँटने से पहले सोचना पड़ता है। जितनी सख्ती माँ दिखा सकती है उतनी कोई ओर नहीं दिखा सकता क्योंकि दुनिया माँ की सख्ती पर उसे निर्दयी नहीं कहती लेकिन दूसरे के बच्चे को अपने घर में रख कर केवल जिम्मेदारी निभाई जाती है। क्योंकि दूसरे के पास कोई अधिकार नहीं होता माँ हमेशा अपने अधिकारों का उपयोग बच्चो को शिक्षा देने में करती है।
इतनी छोटी उम्र में शादी होने के कारण उसे काम नहीं आते थे। ससुराल में कोई बड़ी उम्र की औरत के आभाव में काम कौन सिखाता। पराये रिश्ते की गंभीरता को समझते हुए टोकाटाकी नहीं करते थे। इसलिए ऐसे नजारे अधिकतर देखने में आते थे।
