#HARMFUL OF PLASTIC

                        प्लास्टिक  के नुकसान 

   
    कुछ सालो पहले तक  हमारे जीवन में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होता था। लोगो को इसके बारे में पता ही नहीं था। पचास साल पहले लोगो का जीवन बहुत सादा था। जरूरत सीमित  थी लेकिन अब सभी घरो में अनेक रूपों में प्लास्टिक दिखाई देने लगा है।
        प्लास्टिक की पॉलीथिन जब आयी तब लोगो ने इसे बहुत पसंद किया। क्योंकि इसमें सामान डालने पर यह फटती नहीं थी जबकि कागज के लिफाफे में अधिक भार सहने का माद्दा नहीं होता था।ये कभी ख़राब भी नहीं होती थी। 
        जबसे पन्नियाँ आयी तब से लोग अपने' साथ थैला रखना भूल गए। धीरे -धीरे घर से खाली  हाथ निकलने में लोग शान समझने लगे। पन्नियों का इतना महत्व बढ़ गया कि लोग अच्छी पन्नी लगने पर दुकान वाले से फालतू पन्नी मांगने में भी गुरेज नहीं करते थे।
   अच्छी पन्नियों का इस्तेमाल एक से ज्यादा बार हो जाता था लेकिन साधारण पन्निया घर में आते ही सामान निकाल कर, कूड़ेदान के हवाले कर दी  जाती  है । एक तरह से हम दुकान से कूड़ा उठा कर, घर के कूड़ेदान में डालने के लिए लाते है । 
        आजकल रसोई से लेकर सोने का कमरा,कारखानों आदि  हर जगह प्लास्टिक ही प्लास्टिक दिखाई देती है। यदि मै  आपसे सोचने के लिए कहुँ । -'ऐसी जगह बताओ जहां प्लास्टिक का कोई सामान इस्तेमाल नहीं होता। 'आप अवश्य परेशान हो जाओगे हमारे चारो  तरफ प्लास्टिक की बहुतायत मिलेगी। 
       कुछ बर्षो पहले तक इसके नुकसान के बारे में किसी को पता नहीं था। अब हर तरफ कूड़े का अम्बार बढ़ता जा रहा है। कूड़े का ढेर रूपांतरित होकर मिटटी में बदल जाता है। लेकिन उसमे से झाँकती हुई पन्नियाँ मन में घृणा पैदा करती है। 
     खाने का सामान जिन प्लास्टिक के उत्पादों में रखते है उनमे भी रासायनिक खराबी पैदा हो जाती है। कहा जाता है। बहुत सारी आधुनिक बीमारियों का कारण प्लास्टिक है। जैसे त्वचा की ,पेट की आदि। इसलिए फिर से लोग धातु के बर्तनो का इस्तेमाल करने लगे है। 
     यह धरती अरबो सालो से है लेकिन धरती का रूप इतना नहीं बिगड़ा था जितना कुछ सालो में  बदल गया। अब तो धरती से आसमान तक प्रदूषित हो गया  है।
  •  यदि इन्हे धरती में दबाना चाहे तो मिटटी प्रदूषित होती है। 
  • जलाना चाहे तो इससे निकलने वाली गैसे वातावरण को प्रदूषित करती है।
  •   नाली में गिर जाये तो नालियों का पानी रोक देती है। बंद नालियों के कारण हर तरफ गन्दा पानी फैल जाता है। बरसात में पानी की निकासी न होने के कारण जल -भराव की समस्या का सामना करना पड़ता है।बरसात में  जल -भराव के कारण जिंदगी रुक सी जाती है। 
  • कूड़े को पन्नी में भरकर फेंक देने से, जानवर खाना समझकर  पन्नी भी खा जाते है।खाने के सामान पचने के आभाव में. ये  जानवरो की मौत का कारण भी बन गयी है। 
    इसकी अति अब विकराल रूप धारण कर चुकी है। इससे मुक्ति के उपाय करने पड़ेंगे वरना धरती जीने लायक नहीं रहेगी। धरती जैसा सूंदर गृह  अभी ब्रह्माण्ड में कही नहीं खोजा गया है। यदि हमे अच्छी जिंदगी चाहिए तो इसके लिए प्रयास करने पड़ेंगे।
     इसके लिए हमें प्लास्टिक की चीजों से दूरी बनानी पड़ेगी।
    घर से थैला लेकर चलने में परेशानी नहीं होनी चाहिए बल्कि अन्य को भी इसके लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। 
    यदि प्लास्टिक का सामान घर में आ गया है। तो इसका बहुउपयोगी प्रयोग करने के उपाय सोचने चाहिए।
      हमें केवल अपना ही भला नहीं सोचना बल्कि सृष्टि के भले के बारे में भी सोचना चाहिए। हमारे बाद भी धरती रहने लायक बनी  रहे। धरती पर सबसे बुद्धिमान प्राणी इंसान है।  धरती को बदलने की सामर्थ्य यदि किसी में है  तो वह केवल इंसान में है। हमे अपने दायित्व का सामना खुले मन से करना चाहिए। जिसमे जितनी सामर्थ्य होती है वही काम कर सकता है। अपनी जिम्मेदारी से मुकरने के बाद कही ऐसा न हो जिंदगी जीना  दुश्वार हो जाये।
                                                                              मधुरिमा पाठक
                                                                              पीजीटी हिंदी 

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